चुनावी हताशा में डूबे विपक्ष का चुनाव आयोग पर हमला

देश मे चल रहे चुनावी महासमर लोकसभा चुनाव 2019 मे रोज नए -नए तेवर देखने को मिलते है । कभी राफेल तो कभी सर्जिकल स्ट्राईक , कभी बिगड़े बोल तो कभी सुप्रीम कोर्ट , कभी वाड्रा तो कभी ई डी ,कभी भैया तो कभी दीदी । कुल मिलाजुलाकर इस बार का यह चुनावी रण काफी रोचक हो चला है । चुनावी बिगुल बजते ही नेताओ का मंचो से आये दिन कुछ ना कुछ नया शगूफा छोड़ना आम हो चला है । यह शगूफा कई बार जनता को आहत करता है तो कई बार यह आम लोगो को सोचने पर मजबूर करता है , ऐसे मे चुनाव आयोग की अपनी एक विशेष भूमिका होती है ।मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा , चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा और चुनाव आयुक्त अशोक ल्वासा , इन तीनों पर भारत के इस महापर्व की जिम्मेदारी है और हर नागरिक इनके निष्पक्ष कार्य पर भरोसा व्यक्त कर चुका है । यह भी सौ प्रतिशत सत्य है कि इनके निर्देशन में चुनाव आयोग संवैधानिक दायित्वों को निभाने में कोई समझौता नहीं करेगा। किसी भी नेता के दबाव में नहीं आएगा और न ही किसी राजनीतिक दल की मदद करेगा। चुनाव आयोग से आने वाली ख़बरें बहुत आश्वस्त  कर रही हैं। जैसे की बड़बोले और  बेलगाम नेताओं पर बैन , कई फर्जी नामांकन का निरस्तीकरण इत्यादि । इन सूचनाओं को बेधड़क जनमानस तक  पहुंचाइये कि चुनाव आयोग कैसे हमारे भरोसे पर खरा उतर रहा  ताकि कुछ देशविरोधी तत्व हमारे देश के इस सवैधानिक पद को कलंकित ना कर सके । हर दिन विपक्ष अनर्गल आरोप लगाकर चुनाव आयोग पर तंज कस रहा जो की भारतीय संविधान पर घाव है ।चुनाव आयोग के सामने प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ आचार संहिता के उल्लंघन के पांच मामले आए। यह भी शर्मनाक मामला है कि भारत के प्रधानमंत्री जैसे पद के विरुद्ध आप  आचार संहिता का उल्लंघन जैसे आरोप दर्ज करा रहे वो भी सिर्फ इसलिए की प्रधानमंत्री आकर यह सूचना दे रहा की हमने सर्जिकल स्ट्राईक की हमने राडार नियंत्रण प्रणाली का सफलतम प्रयोग किया या हम देश को झुकने नही देंगे । हद है ! आयोग ने चेतावनी दी थी कि सेना के नाम पर वोट नहीं मांगा जाएगा , कांग्रेस क्रोस बोर्डर एक्टिविटी की  चार तारीखों की लिस्ट लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस मे उतर आई और बाकायदा सेना के नाम पर राजनीति शुरू हो गयी ।  धार्मिक पहचान और उन्माद के नाम पर वोट नहीं मांगा जाएगा , मायवती खुलेआम कह गयी मुसलमान अपना वोट व्यर्थ ना करे ।  शुरू में तीन चार नेताओं के ख़िलाफ़ कारर्वाई  हुई और फिर वही ढाक के तीन पात । लेकिन अब  जब नरेंद्र मोदी का नाम आया तो देश की जनता सोचने पर मजबूर हो गयी की कुछ खुरापाती लोग चुनाव आयोग को बदनाम करने की साजिश मे लगे हुए है ।वाराणसी मे भी चुनाव आयोग के सामने एक ऐसा मामला आया जिसमे आयोग ने एक सराहनीय फैसला लिया । मामला था बर्खाश्त फौजी तेजबहादुर यादव के नामांकन निरस्त होने का । तेजबहादुर ने भोजन मे अनियमितता का आरोप लगाया था । फौज की  नौकरी से हाथ धो बैठने वाला तेजबहादुर उस समय चर्चा मे आया जब सपा ने उसे अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया पर शिकायतों के मद्देनजर आयोग ने नामांकन को निरस्त कर दिया । बाद मे विपक्ष और महगबन्धन ने चुनाव आयोग पर उँगली उठाई और मामला सुप्रीम कौर्ट मे गया जहाँ कौर्ट ने भी आयोग के फैसले को सही ठहराया । आजकल वही गठबन्धन और उसके अंध समर्थक हताशा मे चुनाव आयोग और सुप्रीम कौर्ट तक को भाजपा और मोदी जी का एजेंट बता रहे । सोचने की बात है की इसका आने वाले समय मे भारतीय लोकतन्त्र पर क्या असर होगा ?9 अप्रैल को लातूर में प्रधानमंत्री मोदी ने पुलवामा और बालाकोट के नाम पर वोट नही  मांगा सिर्फ ये कहा कि हमे सेना पर गर्व है हमने ये सीना ठोक के किया , और आगे भी करेंगे  विपक्ष कहता है यह आचार संहिता का उलंघन है । जब फैसले  आया तो चुनाव आयोग  ने प्रधानमंत्री को क्लिन चिट दी।  मोदी के ख़िलाफ़ 5 शिकायतें थीं। एक भी शिकायत के पुख्ता प्रमाण नही थे ना कोई मामला बनता था पर रबिश कुमार जैसे लोगो को यह नागवार गुजरी  पर अंत मे पूर्ण बहुमत से क्लिन चिट मिला ।9 अप्रैल को अमित शाह ने केरल के वायनाड मे सिर्फ इतना कहा कि आज देश के कई हिस्सो मे टुकड़े टुकड़े गैंग के लोग साजिश कर रहे यह बात भी कुछ तथाकथित देशभक्तो को नागवार गुजरी पहुच गए चुनाव आयोग पर फिर वही नतीजा क्लीन चिट क्योंकि कोई मामला बनता ही नही दिखा । अमित शाह जी के दिल में यही भारत है जो रबिश कुमार और स्वरा भाष्कर के दिल मे है बस उसे देखने के नजरिये मे फर्क है । अगर रबिश कुमार कन्हैया कुमार  जावेद अख्तर जैसे लोगो की माने तो वो  सहमति से भारत के एक हिस्से को ही पाकिस्तान घोषित करवा दें।  इसे धार्मिक उन्माद और धार्मिकता का इस्तमाल करने का आरोपी नहीं माना जाता क्योंकि हम बहुत सहनशील  है।
इन सबके बीच चुनाव आयुक्त अशोक ल्वासा भी हैं जिहोने आजम खां को दो बार  लगातार दंडित किया । तीनो आयुक्तों ने मिलकर साध्वी प्रज्ञा और योगी आदित्यनाथ जी तक को बैंन  किया और विपक्ष आरोप लगा रहा कि भाजपा पर कार्यवाही नही हुई । चुनाव आयोग पर भरोसा होना चाहिए ,जो संवैधानिक दायित्व के बोध पर अडिग है। 2014  से पूर्व चुनाव आयोग के भीतर बहुत कुछ ऐसा हुआ था  जिससे भरोसा बनता नहीं है पर आज जो पैनल काम कर रहा वो लाजवाब और काबिले तारीफ है ।  लोकसभा का चुनाव लंबे अवधि का चुनाव होता है , किसी किसी राज्य में एक चरण में चार सीटों पर मतदान कराना पड़ता है पर विपक्ष का निशाना सिर्फ और सिर्फ ध्रुवीकरण करना है ।आफिस आफ प्रोफिट के नाम पर आम आदमी पार्टी के विधायकों की मान्यता रदद् करने का ऐतिहासिक फैसला  देखिए। दिल्ली में चुनी हुई सरकार को काबू करने की एक पहल नज़र आएगी क्योंकि स्वनत्र सरकारे तानाशाह हुआ करती है । कितनी बहसें होती थीं उस वक्त चैनल में जिन्हें ये करना था वो करके वापस जा चुके हैं। पर आज कुछ सत्ता लालची न्यूज एंकर , कुछ दंगाई छात्र नेता कुछ बिगड़ैल नवाबजादे एंडर्सटीएलिस्ट फिल्मी सितारे और चाटुकार अपने निजी स्वार्थ के लिए चुनाव आयोग जैसी साफ सुथरी संस्थाओ को भी नही बख्श रहे उसे गंदा करने पर तुले है जिसकी मैं घोर निंदा करता हूँ । जय हिन्द ।—- पंकज कुमार मिश्रा जौनपुरी

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