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रिजल्ट का डर और बोझ कब तक संभालें बच्चे

सुशील शर्मा एक बच्ची जो बहुत गरीब परिवार से थी सरकारी स्कूल में पढ़ती थी बहुत ज्यादा होशियार नहीं थी ,घर का वातावरण भी ऐसा नहीं था की कोई उसे उत्साहित करे ,घर के सारे काम भी उसे ही करने पड़ते थे आखिर कैसे भी करके उसने 10 बोर्ड की…

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सफर झूठ से हकीकत का

लोग हासिल कुछ इस तरह से भी मुकाम करते हैं अपनों को डुबा कर के, दरिया पार करते हैं। जीत पर ही नहीं हम हार पर भी नाज करते हैं हम कायर नहीं जो पीठ पीछे वार करते हैं। छुपाते चाहते नफरत तो सरे आम करते हैं फर्ज इन्सानियत का…

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अन्धकार को मत धिक्कारें , अच्छा हो एक दीप जलाएं

लोकसभा के चुनाव चल रहे हैं, जो सात चरणों में होने निश्चित हुए थे.  6 चरणों के चुनाव हो चुके हैं, हजारों उमीदवार की किस्मत ईवीएम में बंद हो गयी है, जिसका खुलासा 23 मई को हो जायेगा .  जब तक ईवीम बंद है सभी अपने अपने पक्ष में निर्णय…

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नांच नचाते नेता

पहले  सेवक  बनते नेता । शुद्ध भाव के दिखते नेता । 1 आया देखो मौसम ऐसा । घर – घर जा  रहें हैं नेता । 2 उत्सव का  माहौल बना है । गली – गली में दिखते नेता । 3 पिछली बार थे निर्धन दिखते । बन  गए  करोड़पति  ये …

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ग़ज़ल

दिल से गर आह  निकलती  है निकल  जाने दे। कैसे  भी  गम  की  ये  चट्टान  पिघल  जाने  दे। ज़िंदगी से हटा  ले गम को  कुछेक पल के लिए, मेरे  इस  दिल  को  जरा  सा  तो  बहल जाने दे। मैंने    माँगी   हैं   अपनी    मुस्कुराहटें   जिससे, वो  कह  रहा  है   जरा  वक़्त  …

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‘जीने की जिजीविषा’

दिखाई पड़ती है झलक कुछ हल्की सी उम्मीदों से भरी टोकरी की वही झलक हौले से हवा दे जाती है जज़्बातों की रोशनी को जैसे किसी खिड़की की हल्की सी झीरी से झांकती है रोशनी खिड़की पूरी खुल जाती है हौसलों की हवा से मंज़िल पाने की चाहत में हौसलों…

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मुहब्बत करने वालों में गदर देख लेना

मुहब्बत करने वालों में गदर देख लेना । आँधी औ तूफाँ का कहर देख लेना ।। जिंदगी की कशमकश में मुकद्दर आजमाने वालों । तुम अपनों के मुँह में ज़हर देख लेना ।। अगर हौसला टूट जाये मुहब्बत करने वालों । तुम समन्दर में उठती लहर देख लेना  ।। जब…

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पुष्प

खिलते हुए पुष्प माध्यम हैं प्रसन्नता का। धरती की सुंदरता का, मन की शांति का। ये मुरझाये तो वीरान हो जाएंगे, मंदिर, मन, सेज, धरती, हम और आप। इनको चढ़ना है सदैव ईश्वर के चरणों में, शहीदों के शव पर। तिरंगे की शोभा बढ़ाकर। मांगलिक कार्य की शुरुआत करके। इससे…

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अध्याय जीवन का,

*जीवन  के  इस  अध्याय  में,* अल्पविराम सी  बाधाएँ कई, मत  सपनो  को  तू विराम दे, कैसे भी उनको पूरा करना है, करता चल नित प्रयत्न यूँ ही। *जीवन  के  इस  अध्याय  मे,* प्रताड़ित  करते  शब्दो   की आएंगी नित पीड़ाएँ दर्द भरी, मत  घबरा  तू  पीड़ाओं  से, करता चल नित प्रयत्न…

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“मुक्तक “

नैन कटीले कजरा तोरे या तेरा श्रृंगार लिखूँ लिखूँ चाँद सा चेहरा या गले का तेरे हार लिखूँ रूप कुमुद्नी के जैसा चाल हिरन सी मतवाली लिखूँ मैं जीवन या फिर तुझको मैं अपना संसार लिखूँ ।                            “2” सौगन्ध राम की कब तक खाओगे बताओ तो नेताजी मुददों से…

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