Posted in Special Article कविता और कहानी

ऐसी किताब दे

कोई हमारे हाथ में ऐसी किताब दे । उलझे हुए सवाल का सीधा जवाब दे सबकी है यह वसुंधरा, सबका है यह गगन सबके लिये है रौशनी, सबके लिये पवन फिर दो दिलों में क्यों घृणा का बीज पल रहा ? क्यों बांस के जंगल–सा मेरा देश जल रहा ?…

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सिक्के

डॉक्टर सरोजिनी प्रीतम अध्यापिका ने छात्रों को सोलह आने सच का मुहावरा जब बार बार समझाया ’आने‘ के पुराने सिक्के के बारे में बतलाया तोे ’आने के सिक्के-जाने के सिक्के‘ कह-कह कर छात्र हंसे सिर पीटकर अध्यापिका बोली ’छोडो यह मुहावरा वे सोलहों आने तो खर्च हो चुके।‘

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मुझे भी पढ़ लो

सोनाली सिंघल मैं एक किताब हूँ हर किसी के सवालों का जवाब हूँ बोलों क्या जानना चाहते हो तुम तुम्हारे हर सवाल का जवाब है मेरे पास हिम्मत हो तो सुनकर देखो छुपे हैं मुझमें ऐसे गहरे राज़ ज्ञान का भंडार हूँ मैं जीवन का शृंगार हूँ मैं गौर कीजिए ज्ञान…

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बहुत कुछ लिखने के प्रयास में

कभी – कभी ,हम कुछ भी नहीं लिख पाते ।लिखना तो बहुत कुछ चाहा था ,मन में अनेक भावनायें एवं विचार उमड़ – घुमड़ रहे थे ! लिखना आरम्भ भी कर दिया था ,परन्तु क्यों और कैसे लिख कुछ और ही गई !कभी शब्द अर्थ हीन बन गये ,कभी अनेकार्थक ,परन्तु मेरे अभीष्ट को फिर भी न समेट…

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… अश्रुनाद ….

मेरी अन्तर प्रतिध्वनियाँ स्मृति चिन्हों से टकरातीं अभिलाषित सघन घटायें नयनों को आ बरसातीं डा. उमेश चन्द्र श्रीवास्तव लखनऊ

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चाहा था जिसे मैंने दिल से दिलरूबा तू नहीं

चाहा था जिसे मैंने दिल से दिलरूबा तू नहीं।चाहा था जिसे मैंने दिल से दिलरूबा तू नहीं।पाया था बड़ी मुश्किल से दिलरूबा तू नहीं।चाहा था जिसे मैंने वो थी ताजा एक ग़ज़ल, चेहरा उसका था कमल।गेसू बिखरे बिखरे, करती दिल मैं हलचल।वो थी ताजा एक ग़ज़ल, चेहरा उसका था कमल।गेसू…

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होली है — होली है

बीत गया सर्दी का मौसम ,बीत रहा सुहाना बसंत फाल्गुन की खुशियां छाई हैं संग लेकर होली के रंग. प्रीत भरा होली का उत्सव, इंद्रधनुष सी छाई बहार कहीं गुलाल से सजे गाल, कहीं रंग की पिचकारी फुहार, कहीं नटखट बच्चो की टोली , हुड़दंग मचा खेलें होली, बाँहों में भरकर गले लगा ,…

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होली का मस्त हुड़दंग सबको पसंद है

होली का मस्त हुड़दंग  सबको पसंद है,बूढ़ा,बच्चा और जवान;सब लामबंद है.हर कोई  बीस है, कोई भी  उन्नीस नहीं,सबों का मुखरा  आज  रंग से बदरंग है. वासंती बयार  ने बौरा  दिया है  सबको,फाग  के  राग पर  सब  थिरक  रहा  है.गांव हो या शहर हो;गली हो या सड़क,रंग-अबीर-गुलाल चहुँओर बरस रहा है.गरीब हो…

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“एक शाम अशोक मिज़ाज बद्र के नाम” भोपाल में सम्पन्न,

मिज़ाज को “आज का शायर” के ख़िताब से नवाजा गया।ख़ुशबू कल्चरल एन्ड एजुकेशनल सोसायटी, भोपाल द्वारा स्वराज भवन भोपाल में “एक शाम अशोक मिज़ाज के नाम” से किये गए आयोजन में अशोक मिज़ाज  को “आज का शायर”सम्मान से नवाज़ा गया। उनकी तीन किताबें क्रमशः”में अशोक हूँ, में मिज़ाज भी,अशोक मिज़ाज की…

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सामाजिक समरसता का प्रतीक है होली

सामाजिक समरसता  का प्रतीक है होली, राष्ट्रीयता की भावना से सराबोर है होली. राग और रंग का मादक मधुर मिलन है, सबके अधरों पर है बसंतोत्सव की बोली. ढोलक के थाप  पर  फाग  का  राग है, मुखरे पर  फैला  अबीर और गुलाल  है. प्रेम के रंग में  आज  डूबा सारा…

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