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नवगीत – दुलरुआ फाग

कुमार गौरव अजीतेन्दु ग्यारहों मासों का इकलौता दुलरुआ फाग देखते उसको उतरतीं पूस-माघी त्योरियाँ चैत्र ले के गोद में रहता सुनाता लोरियाँ जेठ और बैसाख रखते दूर अपनी आग सानते भूले नहीं सावन या भादो कीच में टोकने आते नहीं हैं क्वार-कातिक बीच में नेह अगहन का मिले आषाढ़ रखता…

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तपता सूरज

तपता सूरज झुलसाता फिर थम जाता बनकर के प्रहरी साँझ हुई सब घर लौटे क्यों मौन खड़ा ढल गई दुपहरी । कागज पे सब व्यापार बना उड़ गया हवा कब ठहरी क्या पुण्य बना क्या पाप बना जीवन नैया कब ठहरी । पा लूँ कितना कि मन की खाई भर…

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मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं के पात्र हमारे आस-पास ही मौजूद हैं- कृष्ण कुमार यादव

मुंशी प्रेमचंद को पढ़ते हुए हम सब बड़े हो गए। उनकी रचनाओं से बड़ी आत्मीयता महसूस होती है। ऐसा लगता है जैसे इन रचनाओं के पात्र हमारे आस-पास ही मौजूद हैं। हिन्दी साहित्य के इतिहास में उपन्यास सम्राट के रूप में अपनी पहचान बना चुके मुंशी प्रेमचंद के पिता अजायब…

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अँतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर मानव मूल्यों को समर्पित अनुराधा प्रकाशन के मस्तक पर एक और ताज़ !

कविता मल्होत्रा जी की 8वीं पुस्तक का लोकार्पण लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जायेगा….. जी हाँ मित्रो, 8 वर्ष और हर वर्ष एक पुस्तक वो भी लगभग 200 प्रष्टों की जिसमे मानवता कूट कूट कर भरी हो न समय रुकता है, न ही कविता जी कि कलम ,…

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भारत की गरिमा को बरकरार रखना है

हिंदुस्तान के हित को ताक पर रखकर,स्वार्थ की राजनीति भूलकर न कीजिए.सैनिकों  के पराक्रम  पर  प्रश्न दाग कर,शत्रु को मचलने का  मौका मत दीजिए.एक-एक  हिंदुस्तानी  सब  देख  रहा  है,सबके वक्तव्य  का आकलन कर रहा है.दुश्मन के लिए जो  विरुदावली गाता है,उसके भाग्य  की  भूमिका  लिख रहा है.सरहद   के  उस  पार …

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भगोरिया पर्व :लोक गीत,संगीत,नृत्य और प्रकृति की सौंदर्यता

भगोरिया पर्व मध्यप्रदेश के धार,झाबुआ ,आलीराजपुर ,खरगोन आदि के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में नृत्य ,संगीत ,लोक गायन ,एक जैसे ड्रेस कोड वाले सुन्दर परिधान,चांदी के सुन्दर पहनावे के साथ धूमधाम से मनाया जाता है | भगोरिया पर लगने वाले हाट -बाजार मेले का रूप ले लेते है | मेले में अपनी जरुरत…

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लाल घर आया तेरा

माँ मैं तुमसे सत्य कहा था माँ मैं जब भी लौटूंगा, लिपट तिरंगा में आऊंगा; होंगे सजे वीरत्व ध्वज केशर अल्पना सजेंगे गौरवपथ मेरे बलिवेदीमाटी के चन्दन! ✴✴✴ माँ मैं तुमसे सत्य कहा था एकदिन वीरगति को पाऊँगा, भारत माँ के काम आऊंगा ; दुश्मन दलन सीमा पर कर मैं…

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