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कृष्णा फिर नया अवतार धरो

ओ गिरधारी फिर से जन्मों नएं एक अवतार में। तुम फिर से आओ दण्डिंत करने ईस कलयुगी संसार में। घूमं रहे कितने नर-पिचाश मनु रूप धरके। पीड़ा-यातना देते हैं चिर हरते र्तिस्कार करते नारी सम्मान हर लेते है। एक चिरहरण बो था जहां द्रोपती रोई थी। तब गहन अंधेरा निगल…

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धर्म, अध्यात्म और वर्तमान जीवन –सत्य

सचही कहा हैकिधर्म और अध्यात्म जीवन के ऐसे दो रंगहै,जो दिखते तो एक दूसरे के करीब जैसे , एक दूसरे से गड्डमड्ड होते से, पर अपने अर्थों मे बिल्कुल ही पृथक अस्तित्व रखते हैं।चूकि अध्यात्म हमें जीवन सत्य की ओर उन्मुख करता हैऔर धर्म भी ऐसे ही मानव निर्मित सिद्धांतों…

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