परम पिता परमात्मा की रहमत हुई, एक और पुष्प खिला अनुराधा प्रकाशन को आशा जी रूपी,सुगँधित सुमन मिला

अनुराधा प्रकाशन परिवार से जुड़ी एक अद्वित्तीय साहित्य सेविका,पटना विश्वविद्यालय में हिंदी साहित्य के शिक्षण से सेवा निवृत, आदरणीय श्रीमति आशा सहाय जी ने अनुराधा प्रकाशन की सदस्यता स्वीकार कर के हिंदी साहित्य में अपना योगदान देने की सहमति दी है। अनुराधा प्रकाशन परिवार में आपका अभिनँदन है आशा जी।आशा जी की रचनाएँ ऑनलाइन पत्रिका पूर्वाभास और अभिव्यक्ति अनुभूति एवँ दैनिक ट्रिब्यून तथा कल्चर टुडे में प्रकाशित होती रहती हैं। जागरण जँक्शन में नियमित ब्लॉग लेखन की अविराम दिनचर्या का सफर तय करती लेखनी जब मानवता का सँदेश देती है तो मस्तक श्रद्धा से झुक जाता है।

सरहदों को खोल दो ,टूट जाने दो ईर्ष्या के कपाट

आज मनुजों को धरा के विश्व मनुज से जोड़ दो

प्रेम की भाषा को सुखकर समूचे विश्व में प्रसार दो

भूल कर कटुता जाति-धर्म की,घृणा को बिसार दो

प्यार तो उन्मुक्त है सदा,इस की सरहदें होती नहीं

भावनाओं की लहरों पर सवार व्यापती हैं हर कहीं

निस्वार्थ प्रेम की तरंगों को अब नित नया प्रवाह दो

फूल खिलने दो हर हृदय के,नव सुगन्ध को राह दो।

अनुराधा प्रकाशन से प्रकाशित आशा जी की पुस्तक – “मत थको विहग”, समाज को, निरँतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहने की प्रेरणा देती है।

आशा जी के मार्गदर्शन में, मानव मूल्यों को समर्पित अनुराधा प्रकाशन,नवसुगँध की राह पर अग्रसर रहे,इसी शुभकामना के साथ अनुराधा प्रकाशन परिवार आशा जी का हार्दिक स्वागत करता है।

कविता मल्होत्रा (क्रिएटिव डायरेक्टर – अनुराधा प्रकाशन , सम्मानित सँरक्षक – अनुराधा प्रकाशन)

मनमोहन शर्मा शरण (प्रधान संपादक, प्रकाशक एवं संस्थापक – अनुराधा प्रकाशन)

Author: admin

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