“एक शाम अशोक मिज़ाज बद्र के नाम” भोपाल में सम्पन्न,

मिज़ाज को “आज का शायर” के ख़िताब से नवाजा गया।
ख़ुशबू कल्चरल एन्ड एजुकेशनल सोसायटी, भोपाल द्वारा स्वराज भवन भोपाल में “एक शाम अशोक मिज़ाज के नाम” से किये गए आयोजन में अशोक मिज़ाज  को “आज का शायर”सम्मान से नवाज़ा गया। उनकी तीन किताबें क्रमशः”में अशोक हूँ, में मिज़ाज भी,अशोक मिज़ाज की चुनिंदा ग़ज़लें और संमन्दर आज भी चुप है का लोकार्पण किया गया।पुस्तकों पर चर्चा  करते हुए उस्ताद शायर जनाब ज़फर सहबाई साहब ने कहा कि जो ग़ज़ल को जानते हैं वो अशोक मिज़ाज को भी जानते हैं,वो हिंदी और उर्दू में बराबरी से मक़बूल हैं।अहद प्रकाश ने कहा कि अशोक मिज़ाज ग़ज़ल के ऐसे संजीदा और सच्चे शायर हैं जिन पर हिंदी और उर्दू नाज़ करती हैं।नुसरत मेहदी सचिव उर्दू अकादमी ने कहा कि अशोक मिज़ाज बहुत अच्छे और सच्चे इंसान हैं और उसी तरह उनकी शायरी भी सच्ची और अच्छी है,वो जो जीते हैं वही लिखते भी हैं।जनाब इक़बाल मसूद ने कहा कि अशोक मिज़ाज ने ग़ज़ल की लशकारे मारती हुई सरज़मीं पर अपना परचम लहराया है।डॉक्टर रज़िया हामिद ने कहा कि अशोक मिज़ाज सलाहियत से भरपूर शायर हैं।
इसके बाद अशोक मिज़ाज ने अपनी ग़ज़लें पढ़ते हुए कहा,
में समन्दरों का मिज़ाज हूँ, अभी उस नदी को पता नहीं,
सभी मुझसे आ के लिपट गयीं, में किसी से जा के मिला नहीं।इसी ग़ज़ल से उनका नाम मिज़ाज रखा गया था।
ख़ुशबू संस्था के शोएब अली खान ने सम्मान पत्र पढ़ा।इसके बाद हुए मुशायरे में अशोक मिज़ाज सहित 15 शायरों ने अपने कलाम पढ़े।कार्यक्रम की अध्यक्षता विजय बहादुर सिंह ने की।मुख्य  अतिथि डॉक्टर नुसरत मेंहदी थीं।संचालन बद्र वास्ती और शोएब अली खान ने किया।
साजिद प्रेमी ने सभी का आभार माना।

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