पुष्प

खिलते हुए पुष्प माध्यम हैं प्रसन्नता का।

धरती की सुंदरता का, मन की शांति का।

ये मुरझाये तो वीरान हो जाएंगे, मंदिर, मन, सेज, धरती, हम और आप।

इनको चढ़ना है सदैव ईश्वर के चरणों में, शहीदों के शव पर।

तिरंगे की शोभा बढ़ाकर।

मांगलिक कार्य की शुरुआत करके।

इससे ही मिलती है इन्हें खुशी।

मगर देते हैं इनको हम बहुत दुःख,

भ्रष्टाचारियों, घोटाले बाजों के गले में पहनकर।

आप भी बनिये, हम भी बनें पुष्प!

औरों के साथ साथ हम भी सुगन्धित होंगे,

मन को बगिया बनाकर,,,,,,,,

     नेपाल सिंह गुर्जर

गूजर झिरिया, गाडरवारा

Author: admin

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