बेटी

बेटी चन्दन बेटी नन्दन बेटी ही मुस्कान है
पूज रहा बेटी को घर घर सारा हिन्दुस्तान है।

जिसके घर न बेटी होती तरस रहे वो घर आंगन,
सूनी दीवाली होती है सूना होता है सावन।
महक उठेगी बगिया जिस दिन,बेटी बने महान है,,

चमकायेगी शान युगों तक लाज निभाये दो कुल की,
किलकारी से गूंज उठेगी जैसे गलियां गोकुल की ।
खुली पवन में उड़ने दो जो बेटी के अरमान हैं,,,,

ऋतु औऱ मौसम में भी आलस कभी न देखा है,
हर दम मुस्काती रहती है दर्द कभी न सेका है।
नत है बेटी के चरणों में मधुकर आज जहांन है,,
रचना- कवि रामगोपाल श्रीवास, मधुकर,
चीचली (गाडरवारा) नरसिंहपुर (म. प्र.)

Author: admin

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