बैशाखी

धरती की गोद पर सुंदर उजियाला छाया है।बैशाखी का त्यौहार नई उम्मीदों को लाया है।।
धरती के आँचल ने अपना सुनहरा रूप दिखलाया है।धरती की सुंदरता देख किसान का मन हर्षाया है।।
देख धरती का सुनहरा रूप कृषक झूम के नाचा है।अपनी फसल से अब उसको खुशाली की आशा है।।
अबकी फसल से उसके सारे संकट दूर हो जाएंगे।कर्जे  सारे  दूर  कर  चैन  की  नींद  अब पाएगा।।

नीरज त्यागी

Author: admin

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