“मुक्तक “

नैन कटीले कजरा तोरे या तेरा श्रृंगार लिखूँ

लिखूँ चाँद सा चेहरा या गले का तेरे हार लिखूँ

रूप कुमुद्नी के जैसा चाल हिरन सी मतवाली

लिखूँ मैं जीवन या फिर तुझको मैं अपना संसार लिखूँ ।

                           “2”

सौगन्ध राम की कब तक खाओगे बताओ तो नेताजी

मुददों से कब तक भटकाओगे बताओ तो नेताजी

फितरते अपनी कब बदलोगे गिरगिटों जैसी

राम मन्दिर कब बनबाओगे बताओ तो नेताजी ।

कुमार तरूण “सागर”

ग्राम-गूजरझिरिया (गाडरवारा)

Author: admin

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