सफर झूठ से हकीकत का

लोग हासिल कुछ इस तरह से भी मुकाम करते हैं

अपनों को डुबा कर के, दरिया पार करते हैं।

जीत पर ही नहीं हम हार पर भी नाज करते हैं

हम कायर नहीं जो पीठ पीछे वार करते हैं।

छुपाते चाहते नफरत तो सरे आम करते हैं

फर्ज इन्सानियत का अदा हर बार करते हैं

धर्म की आड़ में यहां लोग नित् नये काम करते हैं

छुपाते पापो को और पुण्य का प्रचार करते हैं।

चिंगारी को हवा देकर उसे विकराल करते हैं

दिखावे के लिए फिर पानी का छिड़काव करते हैं।

लोग दुश्मनों को यूं ही अब बदनाम करते हैं

जब कि अपने ही लोग पीठ पीछे वार करते हैं

बिना मतलब के लोग कब किसी से प्यार करते हैं

माली बन के रक्षक फूलों का व्यापार करते हैं।

नाम-विनीता धाकड़

Author: admin

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