हक का घर

समीर और सीमा दोनों को बैंक से लोन मिल गया था . और उन्होने ताबड़तोड़ 2बीएचके फ्लेट खरीद लिया था . बस एक ही बात की कसक थी सीमा के मन में कि काश माँ आज जिंदा होती तो कितनी प्रसन्न होती ! सीमा की शादी के वक्त समीर और उसकी माँ डेढ़ कमरे के मकान में किराए से रहते थे . रूपियों पैसो की तंगी तो थी ही . ऐसे में सीमा की माँ का बेटी के घर आकर रहना कहाँ संभव था.सीमा के माँ की सहेली उसे अपने साथ वृद्धाश्रम ले गई कि अकेले रहने से  तो बेहतर है ये .सीमा इसी दिन की प्रतीक्षा में थी की कब खुद का मकान हो जाए और वो माँ को वृद्धाश्रम से अपने घर लिवा लाए . खैर ! मृत्यु का देवता कब इंसानी योजनाओं के लिए रुकता है .   मन में माँ को याद करते करते सीमा नए घर में समान जमा रही थी . समीर का उत्साह तो देखते बन रहा था.  समीर ने ड्रोइंग रूम की एक दीवार पर अपने स्वर्गीय पिताजी , दादाजी और परदादा की तस्वीरें टांग दी थी .

सीमा भी दौड़कर अपने माँ की तस्वीर ले आई और द्रोइंग रूम की दीवार पर लगा दी . समीर ने देखा तो पूछा “ ये तुमने  माँ जी की तस्वीर यहाँ क्यू टाँगी ? “ सीमा ने कहा “ ऐसा क्यो पूछ रहे हो  ? “ इस बीच सीमा की नज़रों से समीर की चढ़ी त्योरियाँ चुकी नहीं थीं .

तभी सीमा की सास उसे समझाते हुए बोली “ बहू ! समीर पर और उसके घर पर उसके पिता से लेकर उसके परदादा तक सबका हक है आखिर वही तो इस पूरे खानदान का इकलौता चिराग है . उन सब की आत्माओं को उचित आदर देना ये तो समीर का फर्ज़ है .

सीमा आहत हुई थी . कहना चाहा था उसने कि मै भी मेरे माँ की इकलौती संतान थी. बहुत कम उम्र में  वैधव्य का दुख झेलकर मुझे पाला पोसा था . मुझ पर भी तो उनका उतना ही हक है .लेकिन बहस करने का उसका स्वभाव नहीं था .  उसने माँ का फोटो उतार कर अपनी अलमारी में रख दिया . उस दिन जब माँ की बरसी पर वो वृद्धाश्रम गई तो वहा एक बड़े से हाल में कुछ वृद्धों की तस्वीरें लगी हुई थीं जो अब इस दुनिया में नहीं थे लेकिन वे इस आश्रम में रहा करते थे .  सीमा ने आश्रम की दीवार पर टंगी हुई अपनी माँ की फोटो देखी और रो पड़ी थी . शायद ये आश्रम ही सीमा की माँ का  हक का घर था .

अनुरूपा चौघुले

Author: admin

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