बहुत कुछ लिखने के प्रयास में

कभी – कभी ,
हम कुछ भी नहीं लिख पाते ।
लिखना तो बहुत कुछ चाहा था ,
मन में 
अनेक भावनायें एवं विचार 
उमड़ – घुमड़ रहे थे ! 
लिखना आरम्भ भी कर दिया था ,
परन्तु 
क्यों और कैसे 
लिख कुछ और ही गई !
कभी शब्द 
अर्थ हीन बन गये ,
कभी अनेकार्थक ,
परन्तु मेरे अभीष्ट को 
फिर भी न 
समेट पाये ! 
काग़ज़ कोरा का कोरा 
रह गया ! 
शब्द न जाने कहाँ 
विलीन हो गये !
सोचती हूँ यह 
शब्दहीनता 
शायद 
भावों को मुखरित कर दे !!!

डॉक्टर उषा कस्तूरिया

Author: admin

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