घोषणा-पत्र

तुम्हारी इच्छाओं को
बाकायदा लिखकर लायें हैं हम।
हे प्यारी जनता! तुम्हारे लिए
घोषणा-पत्र लायें हैं हम।

मतदान तुम देना हमें
सुन कर घोषणा-पत्र।
मत होना तुम ज्यादा निराश
सुन कर घोषणा-पत्र।

कईं बार हम इनको
नाम दे देते हैं संकल्प-पत्र भी।
जिन्हें पूरा करना होता है
केवल और केवल हमारी
इच्छाओं पर निर्भर।

हे प्यारी जनता!
सवाल-जवाब करना
ना तो तुम को आता है
और ना ही तुम को भाता है।

तुम सुन भर लेना घोषणा-पत्र
किसी प्रायोजित रैली में
या रेडियो,टीवी पर
प्रायोजित किसी कार्यक्रम में बस
गर्व करना और मत देना
हमारे घोषणा-पत्र पर,
केवल और केवल हमें।

जो बनाया गया है
केवल और केवल तुम्हारे लिए
जमाने से बनाते और
जारी करते आयें है
हम तुम्हारे लिए घोषणा-पत्र।

ठीक वैसे ही जैसे कोई माई
बना दिया करती है
पहली, आधी कच्ची-पक्की रोटी
किसी काले कुत्ते के लिए और
मल देती है सरसों का तेल उस पर।
और हाँ, एक बात याद रखना तुम हमारी
“माई” तो कतई भी नहीं हैं हम तुम्हारी,
लेकिन “माईबाप” हम ही हैं तुम्हारे।

©डॉ. मनोज कुमार “मन”

Author: admin

1 thought on “घोषणा-पत्र

  1. बहुत उम्दा रचना । सटीक प्रहार घोषणा करने बालों पर ।

    सुदेश दीक्षित

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