प्रत्येक इंसान यहां गुनाह करता है

डॉक्टर सुधीर सिंह

प्रत्येक इंसान  यहां गुनाह करता है,
प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष करता ही रहता है.
खुदा की नजर में  सब गुनाहगार है,
उनकी दृष्टि से  कोई  नहीं बचता है.
जिसने दिल से  कसूर कबूल किया,
वही   दुनिया  का  सच्चा  इंसान है.
गुनाह का  बोझ  जो  ढोता  नहीं है,
उस पर ईश्वर भी  होते  मेहरबान हैं.
बेवजह किसी  का दिल न दुखाइए, 
दिल प्रभु का दिया  हुआ उपहार है.
प्रेम से रह कर प्रेम  ही सदा बांटिए,
प्रेम परमात्मा  का  दिया उदगार है. 
कभी  प्रकृति  की  गोद में बैठ कर,
उसकी सुषमा को  ध्यान से देखिए.
वहां कहीं  भी गुनाह  के कांटे नहीं,
खिले  प्रेम-पुष्प का आनंद लीजिए.

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