होली का मस्त हुड़दंग सबको पसंद है

होली का मस्त हुड़दंग  सबको पसंद है,
बूढ़ा,बच्चा और जवान;सब लामबंद है.
हर कोई  बीस है, कोई भी  उन्नीस नहीं,
सबों का मुखरा  आज  रंग से बदरंग है. 
वासंती बयार  ने बौरा  दिया है  सबको,
फाग  के  राग पर  सब  थिरक  रहा  है.
गांव हो या शहर हो;गली हो या सड़क,
रंग-अबीर-गुलाल चहुँओर बरस रहा है.
गरीब हो या अमीर;सैनिक या किसान, 
होली के नशा में हिंदुस्तान नाच रहा है.
गोपियों के  हाथ  मेंं रंगभरी पिचकारी,
कृष्ण  की  टोली  पर रंग  बरस रहा है.
कहीं नहीं कटुता है ;सर्वत्र  है सद्विचार,
सौहार्दपूर्ण  परिवेश में सब मिल रहे हैं.
नाचते-गाते  हिंदुस्तानियों को  देखकर,
दुनिया के सारे लोग भी मजा  ले रहे हैं.
खेत हो या खलिहान;या  आसमान हो, 
होली के   गीतों  से सब  गुंजायमान है. 
बसंत  के  बांहो  में  मस्त  रंगोत्सव  है,
प्रेम काआनंदआज सर्वत्र ही समान है.

Author: admin

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