सामाजिक समरसता का प्रतीक है होली

सामाजिक समरसता  का प्रतीक है होली,

राष्ट्रीयता की भावना से सराबोर है होली.

राग और रंग का मादक मधुर मिलन है,

सबके अधरों पर है बसंतोत्सव की बोली.

ढोलक के थाप  पर  फाग  का  राग है,

मुखरे पर  फैला  अबीर और गुलाल  है.

प्रेम के रंग में  आज  डूबा सारा देश है,

कहीं नहीं  कलुषता  और  मनमुटाव है.

सबों के मन में  अनुराग ही अनुराग है,

वासंती  बयार में  उड़ा  होश-हवास है.

प्रकृति में सर्वत्र  उमंग और उल्लास है,

राधा को अपने कन्हैया  की  तलाश है.

प्रेम और सद्भाव बरस रहा है गली-गली,

राधा और कृष्ण की  निकल गई टोली.

रंगों की बौछार है ; मस्ती की फुहार है,

गाँव की गोरी  सब लगती  है चुलबुली.

जाति-पाति,  ऊंच-नीच, वैर-वैमनस्यता;

रंगो में बह   गया, सब  निष्प्रभाव है,

कहीं न कड़वाहट, मन में न मलिनता,

वातावरण में फगुनाहट का प्रभाव  है.

अनुरागित  मन  है; रंगीन  मौसम है,

ऋतुराज  बसंत  का   शुभागमन  है.

गांव-गाँव, शहर-शहर   वसंतोत्सव है;

घर-बाहर प्रेम व आनंद का मिलन है.

Author: admin

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