हाँ मुझे मेरे देश से प्रेम है

16 वर्षीय बालक ——( ए . लक्ष्मण राज ‘लकी’ ) की कलम से

ना जाने कितने अत्याचार होते है
भ्रष्टाचार होते है
कई औरतो को शर्मिंदा होना पड़ता है
फिर भी मुझे अपने देश से प्रेम है

अमीर लोग गाड़ियों मे घूमते है
गरीब लोग नंगे फिरते है
भिखारी खाने के लिए तड़पता है
फिर भी मुझे अपने देश से प्रेम है

यहाँ लोग खुले मे शौच करते है
अपनी इज़्ज़त छोड़ देते है
अपना आत्मसम्मान गवा बैठते है
फिर भी मुझे इस देश से प्रेम है

लड़कियाँ घर से निकलने से डरते है
माँ बाप उनकी शिक्षा बंद करा देते है
उनकी बाल विवाह करा दी जाती है
फिर भी मुझे मेरे देश से प्रेम है

अपने ही बारे मे सोचते है यहाँ लोग
स्वार्थी बन चुके है सब के सब
जलन एवं कपट से जीते है अपनी ज़िन्दगी
फिर भी मुझे अपने देश से प्रेम है

खुशियों मे हाथ बढ़ाते है
मुश्किलों मे वही हाथ छोड़ देते है
अच्छे काम मे कभी कदम नहीं बढ़ाते है
फिर भी मुझे अपने देश से प्रेम है

लोगो मे बुराईया ढूंढ़ लेते है
उनकी अच्छाई को जान नहीं पाते है
सरे आम बेज़्ज़ती कर देते है
फिर भी मुझे अपने देश से प्रेम है

मजहब के नाम पे लड़ लेते है
अंधविश्वास मे खो जाते है
अपने ही देश को नीचा दिखाते है ।
फिर भी मुझे मेरे देश से प्रेम है

ए . लक्ष्मण राज ‘लकी’

Author: admin

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