पंखुरी

मन की पंखुरी पर छिटके कुछ तारे,

न जाने कितनी हसरतें दिल मे उतारे,

प्रेम का ज्वार लिये मै भी हुई बावरी,

अविरल बहती रही यादों के सहारे।

ओढ़ चुनरिया धानी, मेरे शब्दों मे रंग प्रीत के,

छनकती पायल रही गीत लिये मन-मीत के,

सघन -श्यामल लटें भी खेले आँख-मिचोली,

उतर आई हो जैसे धरा पर सपनों की डोली,

बैरी नैनों ने भी सारे भेद खोल डारे,

मन की पंखुरी पर छिटके कुछ तारे।

बसंती हवा भी यूँ चली मदमाती,

सूखी-बंजर धरती पर जीवन बरसाती,

सूने-सूने आंगन मे बजी प्रेम शहनाई,

संवेदनाओं ने भी दिल मे ली अँगड़ाई,

मनमोहक छवि पिया की नयनों मे उतारे,

मन की पंखुरी पर छिटके कुछ तारे।

उज्जवला साखलकर

Author: admin

2 thoughts on “पंखुरी

    1. धन्यवाद
      होली की हार्दिक शुभकामनाये

      मनमोहन शर्मा ‘शरण’
      9213135921

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