प्रेम

   कृष्ण कुमार निर्माण

प्रेम—-

अगर व्यक्ति विशेष से हो तो–

जख्म बन जाता है

जो कभी ठीक नहीं होता

रिसता रहता है पल प्रतिपल

प्रेम—–

अगर हो खुद से तो

दवा बन जाता है और

हर मर्ज को कर देता है ठीक

प्रेम—-

अगर वतन से हो तो

शहादत बन जाता है और

सबकी नमन करने के लिए विवश कर देता है

प्रेम—-

अगर हो समाज से तो

जीवन जीने के अर्थ देता है

हर पल हरवक्त हर दम

नया कुछ करने की प्रेरणा बन जाता है

प्रेम—-

अगर हो नफरत से तो

विनाश का कारण भी बन जाता है और

चारों और विध्वंस,तबाही मचा देता है

अब ये आप पर निर्भर करता है कि—–

आप और हम कौनसे प्रेम को अहमियत देते हैं

प्रेम तो प्रेम है

और प्रेम सारे ही सही होते हैं

सिर्फ नफरत को छोड़कर।।।।

   कृष्ण कुमार निर्माण

Author: admin

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