हे नारी ! तुझको नमन “दोहे”

नारी सच में धैर्य है,लिये त्याग का सार।

प्रेम-नेह का दीप ले,हर लेती अँधियार।।

पीड़ा,ग़म में भी रखे, अधरों पर मुस्कान।

इसीलिये तो नार है,संस्कार का मान।।

नारी हरदम श्रेष्ठ है,हैं ऊंचे आयाम।

इसीलिये करता “शरद”,बारम्बार प्रणाम।।

नारी ने नर को जना, इसीलिये वह ख़ास।

नारी पर भगवान भी,करता है विश्वास  ।।

नारी से ही धर्म है,नारी से अध्यात्म।

नारी से ही देव हैं,नारी से परमात्म।।

नारी से महके पवन,नारी है सिंगार।

नारी गुण की खान है,नारी है उपकार।।

नारी शोभा विश्व की,नारी है आलोक।

नारी से ही हर्ष है,बिन नारी है शोक।।

नारी कर्तव्यों भरी,नारी सचमुच वीर।

साहस,कर्मठता रखे, नारी हरदम धीर।।

हो जननी की धूप या,हो भगिनी की छाँव।

नारी ने हर रूप में,महकाया है गांव।।

नारी की हो वंदना,हो नित मंगल गान।

नारी के सम्मान से,ही है नित उत्थान।।

             -प्रो.शरद नारायण खरे

                   विभागाध्यक्ष इतिहास

शासकीय जे.एम.सी.महिला महाविद्यालय

            मंडला(मप्र)-481661

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