कृष्णा फिर नया अवतार धरो

ओ गिरधारी फिर से जन्मों

नएं एक अवतार में।

तुम फिर से आओ दण्डिंत करने

ईस कलयुगी संसार में।

घूमं रहे कितने नर-पिचाश

मनु रूप धरके।

पीड़ा-यातना देते हैं

चिर हरते र्तिस्कार करते

नारी सम्मान हर लेते है।

एक चिरहरण बो था

जहां द्रोपती रोई थी।

तब गहन अंधेरा निगल के तुम

प्रकाश-ज्योति बन आए थे।

दुर्योधन कितने आज भी

जन्में ईस संसार में।

मैं करती प्रार्थना हे कृष्णा

एक नएं रुप मे आके।

ईस संसार का उद्धार करो

फिर से तुम नया अवतार धरो।

दुष्कर्मी-पापी कितने

र्कम – अभाव लिए घूंम रहे।

लिप्त है पापो से कपट-छल कर रहे।

दिन-दहाड़े हो या अंधकार रात्री

निर्मल मन नौच लेते है।

स्त्री की करते अवहेलना

दाग-कुण्ठां से भर देते है।

करूणाहिन पापी मानव

अस्मत दागदार कर देते है।

आओ तुम फिर एक बार

ओ निरगुन मुरली धारी

धरा ये सुगंधमयी करो।

प्रभू उतर आओ बैंकूठ से

पापियों का सघांर करो।

दुषित होती ईन हवाओ में

अपनी बंसी की सूरताल भरो।

कलयुगी इस भूमि को

शुद्ध ,निर्मल ,निष्पाप करो।

हे कृष्णा मेरे पालन हारा

फिर से नया अवतार धरो।

आके देखो कितने कंश,

दुर्योधन ,शिशुपाल जैसे

घूम रहे इस वसुधा पे।

करते अहित ,अनउचित र्कम

धरणी शर्मसार कर रहे।

ओ कृष्णा तुम आओ फिर से

प्रेम करूणा का राग भरो।

सुंन्दर इस भूमि को

पाप-ताप से मुक्त करो।।

साथी मुर्ख्जी। (टीना)

Author: admin

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