अन्धकार को मत धिक्कारें , अच्छा हो एक दीप जलाएं

लोकसभा के चुनाव चल रहे हैं, जो सात चरणों में होने निश्चित हुए थे.  6 चरणों के चुनाव हो चुके हैं, हजारों उमीदवार की किस्मत ईवीएम में बंद हो गयी है, जिसका खुलासा 23 मई को हो जायेगा .  जब तक ईवीम बंद है सभी अपने अपने पक्ष में निर्णय आयेंगे , ऐसा सोच सकते हैं या ऐसा स्वप्न देख सकते हैं .

भारतीय युवा काफी समझदार है, योग्य व शिक्षित है, जो बातों में नहीं काम में विशवास करता है.  उसने जो भी निर्णय लिया होगा जनता के / देश के हित में ही लिया होगा .  अभी एक चरण (सातवाँ) बाकी है जो 19 मई को होगा.  अलग अलग चेनलों में, समाचार पत्रों में रैलियों में सभी अपने अपने पक्ष में दावे करते हैं, या कर रहे हैं, किन्तु

‘ये जो पब्लिक है सब जानती है, अन्दर क्या है, बहार क्या , ये सब कुछ पहचानती है …. ये जो पब्लिक है ….

जो हैं मित्रो! उन रैलियों की लाइव रिकॉर्डिंग सब देख रहे होते हैं.  अपने को कोई कमतर आंकता नहीं है.  कोशिश होती है कि जो हुआ पिछले चरण में, सो हुआ,  किन्तु आने वाले चरण में शायद हमारी बात के प्रभाव से लोगों की मानसिकता बदले और हमारे पक्ष में बात बन जाये.  इसलिए मुझे ऐसा लगता है कि एक साथ चुनाव करने का प्रयास किया जाना चाहिए .

एक बात और जो इस बार विशेष तौर पर उभरी है.  अधिक नेताओं की जुबान अपने बस में नहीं रही.   चुनाव आयोग को न जाने कितने अधिक लोगों को कितनी बार (बार-बार) नोटिस भेजने पड़े.  बार बार जवाब माँगा गया.  भाषा संयमित हो जो सबको प्रिय लगे.

      इस बार प्रमुख मुद्दे—जिनपर चुनाव लड़ा जाता है अथवा लड़ा जाना चाहिए, वो कहीं गम हो गए (रोटी कपडा और मकान) रोजगार और व्यापर ठप्प होते जा रहे हैं.  इनकी सुध कौन लेगा, इस विषय में न बात करके विरोधियों कि, उनके खानदान की कमियां गिनने की मनो होड़ लग गयी है.  देखो कौन ज्यादा कमियां निकलता है

      मेरा मानना है कि भाई उसने क्या गलत किया यह बताने के बजे, आपने क्या सही किया , यह पब्लिक को बताएं तो हितकर होगा.

अन्धकार को क्या धिक्कारे अच्छा हो एक दीप जलाएं

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