चुनावी व्यंग – साँड़ की रैली और नामांकन

कुछ दिन पहले एक साँड़ सपा की रैली में घुसा था यकीन मानिए अगर वो मोदी जी की रैली में घुसा होता तो चुनाव  मे ना सिर्फ टिकट का प्रबल दावेदार होता बल्कि गठबन्धन के प्रत्याशी के रूप मे चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा होता। और सुप्रीम कोर्ट अगर इजाजत दे देता तो आज वह बनारस से  102वां उम्मीदवार होता  । और तो और यकीन मानिए समाजवादी पार्टी या महागठबंधन  उसे टिकट भी दे देती क्योंकि तब साँड़ को इसलिए दलित साबित किया जाता की उसे मोदी जी से मिलने नही दिया गया । या फिर साँड़ को पिछड़ी जाति का बता कर उसे बाबा साहेब अम्बेडकर का हितैषी और दबा कुचला बताया जाता भले वो रैली मे पांच दस लोगो को दबा के कुचल देता । उसे बाकायदा केजरीवाल जी     देशभक्त साबित करते क्योंकि वो मोदी के खिलाफ है तभी रैली मे पहुँचा । उसे चारागाह की घास सुखी मिली इसलिए उसने चारगाह छोड़ कर बनारस से नामांकन का फैसला किया और  नेताओ की रैली का रुख किया । हद है भाई ! साधो एक बात तो है खनन घोटाले और मूर्ति घोटाले के बाद चोर चोर मौसेरे भाई वाली कहावत अब चोर चोर बुआ भतीजा मे बदल चुकी है यही बात उस साँड़ को नागवार गुजरी और बबुआ के रैली मे जा पहुँचा । साँड़ से एक इंटरव्यू मे पत्रकारो ने पूछा की उसने विरोध के लिए अखिलेश की रैली को ही क्यों चुना तो साँड़ ने अपनी बात रखते हुआ कहा कि हमारी संख्या जिस तरह यू पी मे बढ़ी है उसके लिए पिछली सपा सरकार ही जिम्मेदार है क्योंकि पूर्ववर्ती स्वपरिवार विकासपुरूष अखिलेश ने गायो को तो कटवाया पर हमारी बिरादरी को सड़को पर छोड़ते गए अब हमने मिलकर फैसला लिया है की हम अखिलेश के हर रैली मे विरोध प्रदर्शन करेंगे । पर तभी इंटरव्यू के बीच मे कन्हइया कुमार को साँड़ के कानो मे ये  कहते सुना गया कि यू पी मे अखिलेश के सी एम बनते ही  तेरे टुकड़े होंगे हजार । तुरंत साँड़ ने केजरीवाल की तरह यू टर्न लिया और साँड़ ने कहा उसके पास पार्टी की च्वाइस है और वह कांग्रेस के साथ गठबंधन करेगी देश मे । एक तरफ कलकत्ता  के लोग उस सांड को अल्पसंख्यक मुस्लिम  बोलकर उसके पक्ष मे खड़े होते तो दूसरी तरफ हैदराबादी अवैशी समूह उसे देश की क्रांति बता जाती । सांड डांस करता तो न्यूज चैनलों पर रबिश कुमार हेडलाइन्स बनाते की साँड़ का डांस भाजपा वालो की साजिश है  , सांड ने डांस करकर नोटबन्दी को बताया भ्रष्टाचार !पर यदि साँड़ भाजपा जॉइन करता तो फिर सोशल मीडिया पर सांड की हिस्ट्री निकल कर वाइरल हो रही होती जैसे कि साँड़ इंटरमीडिएट फेल है । साँड़ मुस्लिम विरोधी  है । साँड़ आर एस एस से जुड़ा है इति इति ।तभी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई जाती ,रणदीप सुरजेवाला जेब से खुद  लिखा एक खर्रा निकालते और कहते कि 1947 के विभाजन में उस सांड के दादा के परदादा के दादा गफ्फूर मियां के साथ भारत आये थे इसलिए साँड़ की विचारधारा कांग्रेसी है । फिर सांड को टिकट देने वाले नेता तथा आत्मघोषित निष्पक्ष पत्रकार कहते वाराणसी में खुद नंदी आये हैं। वहां एक आम सांड देश बदलने को लड़ रहा है। सांड को भूख लगती तो वह चारागाह का मसला उठाता। पूरा बनारस गिल्टी फील कर रहा । विपक्ष कहता 2014 में हमने जिसे चुना उसने एक भी चारागाह नहीं बनवाया इसलिए हम साँड़ को सपोर्ट करेंगे । सांड जुलूस से  नामांकन दाखिल करता नामांकन मे गठबंधन के कई दिग्गज उपस्थित होते खुले ढाले मे साँड़ के ठीक बगल मे केजरीवाल बाए ममता दीदी उनके बगल मे राहुल जी और उनके बगल मे सीताराम येचुरी और मायावती । यह पूरा दृश्य  ठीक वैसे ही होता जैसे सपा का नया उम्मीदवार मोदी जी के खिलाफ धूमधाम से वारणसीे मे नामांकन करने जा रहा हो । साँड़ सर्जिकल स्ट्राईक पर विरोध करता तो जुलूस मे से कपिल सिब्बल सहमति मे  सिंग हिलाते । साँड़ नोटबन्दी को नुकसान देय बताता तो मनमोहन सिंह भीड़ मे से जयकारा लगाते जय नंदी महाराज । साँड़ यदि जी एस टी को लूट बोलता तो सोनिया भांगड़ा करती जुलूस के आगे । और अंत मे जब साँड़ कहता की हमारा गठबंधन यू पी मे भाजपा  पर भारी पड़ रहा तब तुरन्त अखिलेश झुक कर मायावती के पैर छु लेते और कहते की भले बापू आपसे हार गया बुआ पर ये यू पी के विकास की जीत होगी ।अब आप बताइये आप इस देश के प्रबुद्ध  वोटर है आप क्या अपने मत का प्रयोग इन साँड़ महोदय के पक्ष मे करते या आप देश के लोकतंत्र को चुनते जिसमे 56 इंच का सीना ठोकने की ताकत है और जो देशहित मे ऐसे फैसले लेने की हिम्मत रखता है जिससे उसकी राजनीतिक साख भले दांव पर लग जाये पर देश नही झुकने पाये वाली बात हो  !— पंकज कुमार मिश्रा जौनपुरी

Author: admin

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