वैज्ञानिक पीढ़ी चढ़ गई सीढ़ी जो तुम्हीं ने बनाई परस्पर दोषारोपण क्यूँ जब सेज तुम्हीं ने सजाई

जवान होती बेटियों और बेटों की सुघड़ गृहस्थी बसाने की चिंता में घुलते अभिभावकों की मनोदशा आज किसी क्रॉनिक डिसीज़ से कम नहीं है।

मात्र चँद मँत्रों की गुँजन, चँद साखियों की ध्वनि, चँद लफ़्ज़ों का कुबूलनामा, या चँद हर्फों का आदान प्रदान,क्या कभी किसी को जन्म जन्माँतर का साथी बना सकता है?

आज की पीढ़ी के ज़हन में उबलता ये अहम मुद्दा यूँ तो किसी जवाब का मोहताज़ नहीं है, क्यूँकि जिसने प्रकृति की निस्वार्थता का क़ायदा पढ़ लिया हो उसे किसी और सबक़ को सीखने की ज़रूरत नहीं रह जाती।

लेकिन आज ज़माना है विदेशी उच्च शिक्षा की उपाधियों की प्रतिस्पर्ध का। ज़रा सोचिए जिन मासूम युवा नौनिहालों को अभिभावक इन किताबी ज्ञान की यज्ञशालाओं में सामग्री की भाँति झोंक देते हैं, उच्च ताप में पके उन मासूमों का क्या क़सूर जिन्हें मात्र इँजीनियर, डॉक्टर, गणितज्ञ, अर्थशास्त्री, सरीखी रोबोटिक डाइयों में ढाल कर विदेशी उच्च शिक्षा की काग़ज़ी डिग्रियाँ थमा दी जातीं हैं।

गर्वित होते अभिभावक इन उपाधियाँ की तराज़ू पर अपने बच्चों के जीवनसाथियों को तोल कर जब बैलेंसशीट बनाने की जुगाड़ करते हैं तो, उस जीवन रथ के पहिए कभी परस्पर सामँजस्य बना ही नहीं पाते, क्यूँकि उन्हें प्रकृति के नियम तो कभी किसी ने पढ़ाए बी नहीं होते।आधुनिक पीढ़ी को लगता है कि, तालमेल बैठाने वाली, ये तो घर के अनपढ़ बुज़ुर्गों की बनाई हुई मनगढँत कहानियाँ हैं, जो उन्हें अपने मतलब के लिए, घर की दहलीज़ के खूँटों से बाँध कर रखना चाहती हैं, ताकि वो बुढ़ापे में उनकी नर्सिंग कर सकें, जिसे ख़रीदने की क्षमता दिखाती आज की युवा पीढ़ी, अपने घर के बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए बक़ायदा चाइल्ड केयर और ओल्ड ऐज केयर टेकर की तमाम वैब साइट्स का हवाला देकर अपने दायित्व से मुक्त हो जाती है।

कौन समझाएगा इस वैज्ञानिक पीढ़ी को कि –

💐आत्मिक सौंदर्य कभी किसी तारीफ़ का मोहताज़ नहीं बोता

वात्सल्य कभी किसी प्रतिस्पर्धा का कटु आग़ाज़ नहीं होता

निस्वार्थ प्रेम तो रूह का श्रृँगार है, ममता का राज़ नहीं होता

💐

अपनी जवानी की स्वच्छन्दता के लिए, या फिर अपनी वृद्धावस्था में केयर की पक्की रजिस्ट्री के लिए, अपने छायादार वृक्ष की शाखाओं को, अपने से अलग करने से पहले, ये हर घर के अभिभावकं को सोचना है, कि अपने बच्चों को विदेशी उच्च उपाधियाँ की चकाचौंध के लिए दाँव पर लगाना है, या उन्हें सूरज की तरह चमकने के लिए सूरज की तरह जलना भी सिखाना है।

क्यूँकि –

💐तालीम वो नहीं होती जो कैसे कमाना है पढ़ाए

तालीम वो होती है जो क्या कमाना है सिखाए 💐

Author: admin

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