हमारी भी सुनो भाई…………. मायापुरी के बेहाल /परेशान व्यापारियों की आवाज़

पूरे देश में लोकसभा चुनाव को लेकर चुनावी माहौल है । पार्टियों की जगह–जगह रैलियां होना स्वाभाविक है ।  सभी पार्टियाँ अपने को कमतर कतई नहीं मानती । दूसरे को कमतर बताना और अपने को श्रेष्ठ साबित करने के लिए स्वप्न जाल बुनकर जनता की भलाई के दृष्टिकोण से उसे प्रस्तुत करना, यह भी मानो आम बात सी हो गई है ।  किन्तु जब हम भारत की बात करते हैं और भारत को समझाने का प्रयत्न करते हैं तो स्पष्ट उत्तर सामने आता है — ‘भा + रत’  — ‘भा’ – ज्ञान  ‘रत’ लगा है, मतलब साफ है जो सदियों से ज्ञान में लगा है ।  जब बात ज्ञान की होती है तब समझ रूपी प्रकाश विद्यमान होता है और समझ रूपी ज्ञान हो तब किसी जिम्मेदार नेता से इतना नीचे स्तर पर बयानबाजी करना कतई स्वीकृत नहीं है ।  समाजवादी पार्टी जो उत्तर प्रदेश को बेहतर प्रदेश बनाने की बात करते हैं, उनके राष्ट्रीय महासचिव आजम खान , जिसने सभा में बोलते हुए अपने विरोध में विरोधी  पार्टी की उम्मीदवार जया प्रदा के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करके बेहद अमानवीयता का प्रदर्शन किया है जिसका विरोध  कांग्रेस–भाजपा व अन्य पार्टियों की ओर से भी किया जा रहा है ।  ‘उत्कर्ष मेल’ परिवार भी इस बयानबाजी की घोर निन्दा करता है, विशेषकर यह नारी जाति का अपमान है । जिस देश की संस्कृति–संस्कारों का हिस्सा है नारी जाति को सम्मान देना तथा सम्मान व आदर से देखना । वहां एक राष्ट्रीय पार्टी के जिम्मेदार नेता से अजिम्मेदाराना व ओछा बयान कतई स्वीकार नहीं होना चाहिए । आजम खान को सम्पूर्ण नारी जाति से इस गलती की माफी मांगनी चाहिए ।

                बात यदि दिल्ली की करें तो यहां भी पिछले सप्ताह ‘मायापुरी की स्क्रैप मार्किट में DPCC एवं एमसीडी द्वारा 852 फैक्ट्री मालिकों को भारी जुर्माना (1 लाख / 50 हजार) जमा कराने का नोटिस भेजा गया । उस नोटिस में कहीं भी सीलिंग की बात नहीं लिखी थी । अचानक सीलिंग की कार्यवाही होती देख 400–500 व्यापारियों ने एकत्र् होकर आवाज उठाई और निवेदन किया कि सभी व्यापारी एकमुश्त राशि जमा कराने को तैयार हैं  । परन्तु सीलिंग न की जाए ।  यदि सीलिंग की कार्यवाही में राहत नहीं मिलती है तो इस पर व्यापारियों ने समय मांगा जिससे वे अपना सामान बाहर निकाल सकें और अपनी वैकल्पिक व्यवस्था कर सकें ।  जब इस पर भी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला और कुछ फैक्ट्रियों को सील कर दिया गया तब व्यापारी भड़क गये । यह तो सरासर व्यापारी भाईयों के साथ अन्याय है । उनमें से कुछ ने पत्थर भी फेंके जिससे दो चार जवान घायल भी हुए ।  जवानों ने भी बदले की कार्यवाही करते हुए सामने जो आया व्यक्ति या सामान सब पर डंडे बरसाने शुरू कर दिये ।  यहां एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया ।  जब कोई जुलूस या विरोध प्रदर्शन किया जाता और रास्ते मे खड़ी सरकारी बसों को नुकसान पहुंचाया जाता तब बड़ी बड़ी बातें की जाती थीं ।  किन्तु व्यापारियों का गुस्सा जवानों ने सामने आये सामान पर भी निकालना शुरू कर दिया । यह कहां तक न्यायोचित कहा जा सकता है । बीजेपी और आमआदमी पार्टी एक दूसरे को दोषी ठहराने पर तुले हैं ।

Author: admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *