जो भी होगा, अच्छा ही होगा

संपादक : मनमोहन शर्मा ‘शरण’

लोकतन्त्र् का महापर्व देश में लोकसभा चुनाव चल रहे हैं । अंतिम चरण चल रहा है । इस बार नेताओं ने अपने–अपने भाषणों में कितनी बदजुबानी की, अनेक बार चुनाव आयोग को भी नोटिस भेज–भेज कर हस्तक्षेप करना पड़ा । एक दूसरे पर व्यक्तिगत आरोप लगाकर अपने को बेहतर और दूसरे को नीचा दिखाने का प्रयास किया जा रहा है । वास्तविक मुद्दे जैसे कहीं खो गए, उन पर से ध्यान हटाया जा रहा है । बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या बनकर उभर रही है, व्यापारियों का बुरा हाल है । और तो और संकेत मिलने लगे हैं कि मंदी के दौर से भारत भी अब प्रभावित हो सकता है । इन मुद्दों को छोड़ बातें क्या हो रही हैं––––आप सब जानते हैं ।
एक तरफ हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा है कि महागठबंधन ‘खिचड़ी’ सरकार चाहता है । ‘खिचड़ी’ चिकित्सक की दृष्टि में तो लाभदायक है, हल्की होती है सरलता से पच जाती है । खैर, हम यह क्यों भूल जाते हैं कि लोकतन्त्र् में जनता जनार्दन होता है । सरकार आप, महागठबंधन या कोई और नहीं, जनता बनाती है । जनता जिसको चाहती है वही बना पाता है । उसी पार्टी की सरकार बनती है । किसी को अपने बीते कल को बिल्कुल नहीं भूलना चाहिए । हम क्या थे और आज क्या हैं, यह प्रभु कृपा और जनता का ही प्यार है । 2 सीटों से पूर्ण बहुमत तक का सफर, इसमें हमने भी बहुत खिचड़ी का स्वाद चखा है ।
लेकिन मेरा मानना है कि इस बार जो भी होगा अच्छा ही होगा । क्योंकि मुझे लगता है कि इस बार पक्ष मजबूत होगा तो विपक्ष भी मजबूत होगा । जो स्वस्थ वातावरण के संकेत हैं । क्योंकि आपने देखा विपक्ष बेहद कमजोर होने का नतीजा क्या होता है । पक्ष मनमाने तरीके से डंडे का फंडा चलाते हुए एक के बाद एक ऐसे निर्णय भी सामने आए जिससे पूरा देश प्रभावित हुआ, न जनता कुछ कर सकी, विपक्ष के हाथ तो कुछ था ही नहीं ।
इसलिए सरकार जिसकी भी बने पर विपक्ष मजबूत होगा । ऐसा मेरा मानना है । यही सबके लिए हितकर होगा–––––

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