पहला प्रहार

राजीव अपने घर से निकल पड़ा था ऑफिस के लिए वह तेज कदमो के साथ बस स्टाॅप की ओर बढ़ रहा था धूप तेज और गर्भी का मौसम में पैदल चलने से पसीना की बूँदे उसके चेहरे पर दिख रही थी। वह भागता हुआ बस स्टाॅप पहुँचा वहाँ बस लगी हुई थी अभी वह कुछ दूरी पर ही था कि तेज घमाके की आवाज आयी जैसे कोई टायर फटी हो चंद सेकेण्ड में ही वहाँ भागम भाग शूरू हो गये बस स्टैण्ड तक जाने की हिम्मत नही हो रही थी लेकिन जाना जरूरी था भागम-भाग का माहौल फिर पुलिस का जमावडा बढने लगा देखते ही देखते पूरा बस स्टाॅप छावनी में तब्दील हो गया राजीव समझ नही पा रहा था कि दरअसल हुआ क्या है कोई बताने की स्थिति में नही था?इतने में अलांउस्मेंट होने लगी जो जहा है वही रूकें तलाशी चल रही और बम होने की संभावना है? पुलिस द्वारा सेफ जोन बनाकर सभी यात्रीयो को एक तरफ किया जाने लगा सभी बाते कर रहे थे ।बहुत बडा हमला था दो बस के परखच्चे उड गये थे उसमे घायलो को एम्बुलेन्स मे डाला जा रहा था ।भयावह सीन थे हृदय विदारक भी।दरअसल यह एक आतंकवादी द्वारा किया गया विभत्स घटना थी जो वहा मौजूद लोगो को एक-एक विभत्सता देखने को मजबूर कर रही थी।बहुत से लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके थे और कईयो की जान चली गयी थी।राजीव कशमकश मे था कि वह क्या करे? घर वापस जाय या ऑफिस फिर उसने सोचा ऑफिस को फोन पर बता दी जाय अतः उसने सूचना दे दी फिर घर भी बोलकर वह हास्पीटल की ओर दौडा जहाँ अफरा तफरी मची थी।कई लोगो को खून की आवश्यकता थी जो हाॅस्पीटल में मौजूद नही थी।राजीव ने वहाँ मौजूद सभी से आग्रह करते हुए खून डोनेट किया राजीव को खून देता देख कई लोग आगे आये और उन्होने भी खून दी ।बडी भयावह स्थिति थी वहाँ पर।   भारी मन से राजीव सोचता हुआ मायूस होकर अपने घर की तरफ चल पड़ा। उसके आँखो के सामने बार-बार वही सब कुछ किसी फिल्म की भाँति दिख रहे थे।वो रोते विलखते बच्चे चीख पुकार और दौडते भागते लोग वो सोच रहा था कि आखिर ये निर्दोष लोगो ने क्या बिगाडा था किसी का जो इनको खामोश कर दिया गया।आज आतंकबाद और नक्सल से जूझ रहा समाज कितना वेवस है वो जब चाहे अपने मकसद को पूरा कर लेता है और हम चंद जाँच के अलावा कुछ नही कर पाते फिर चंद मुआवजो से लिपापोती कर दी जाती है।आज इस तरह की घटनायें कब कहाँ और कैसे हो जाये कुछ कहा नही जा सकता ।पूरा विश्व इस आतंक त्रासदी से त्रस्त है । जरूरत एक दृढइच्छाशक्ति की है जो एक निश्चित मिशन बनाकर इनके खात्मा के लिए काम करे जैसा कि हाल के दिनो में प्रदर्शित हुई है जिसे सब मिलकर एक साथ जारी रख सकें और उनकी जडो का खात्मा कर सकें।
राजीव आये दिन ऐसी घटनाओ को सुन रहा था पर आज देखकर वह विचलित हो उठा और गहरी सोच मे खो गया दर असल वह जानना चाहता था आखिर इसकी वजह क्या है तो वह तुलनात्मक अध्ययन करने लगा।
        हमारा देश विकास को प्राप्त करने के लिए दिन रात हमेशा अपनी लोगों की उत्थान करने की बात करता है उसके तरीके विकसित करता है और हमें  कर्मशील बनाने के लिए हर संभव प्रयास करता आया है जिसके परिणाम स्वरूप अच्छे कर्म करते हुए उद्योग टेक्नोलाॅजी और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में पाक से ही नही बल्कि दुनिया के देशों में हमारी एक अलग साख कायम हुई है ।आज हमारी प्रगति देखकर पूरे विश्व में भारत  में उत्पादित वस्तुओं का व्यवसाय बढ़ रहा है और पूरा विश्व यहां अपना बाजार तालाश रहा है । 
                   जबकि हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान अपने नाकारा पन की वजह से ही हमेशा की तरह गैर वाजिव तरीके और शाॅट- कट तरीके से धन कमाने के जुगाड़ लगाता रहा लोग आलसी हो गये , विकृत मानसिकता के शिकार हो गये, भारत के प्रति जलन बढ़ने लगा और आतंक का जहर पूरे पाक पर हावी हो गई लोकतंत्र नाम की कोई चीज नहीं बची धीरे धीरे वहाँ लोगो की दुर्गति होने लगी, लोग बेरोजगार होने लगे, भ्रष्ट आचरण करने लगे, लूटपाट बढ़ गई , महिलाओ पर अत्याचार बढ गया अल्पसंख्यक पर अत्याचार बढ गया और आतंकराज कायम हो गया  सिपाही भ्रष्टाचार में लिप्त रहने लगे, फलस्वरूप राजकोष खाली होने लगा, देश कर्ज में डूबता गया । लेकिन अभी भी वहाँ की जनता को होश नही आया है इतनी जलन भारत के प्रति भर दी गई है कि वह कुछ सोचना ही नही चाहता लोकतांत्रिक मूल्यों पर लौटना ही नही चाहता जो उसके लिए और वहाँ के लिए अच्छे संकेत नही हैं।
अब जबकि नयी सरकार है तो सबसे पहले आतंक और नशीले प्रयोग बंद करने होंगे लेकिन उसके अपने चाटुकार मंत्रियों और सिपहसालारों से धटती राजकोष को बढ़ाने के बजाय भारत जैसे विकसित राष्ट्र से मुकाबला की पड़ी है।  वह सिर्फ सोचता है तो आतंक, खाता है आतंक और बेचता है आतंक ऐसे में कोई चाहकर भी उसकी मदद तो क्या आसपास भी फटकना नही चाहेगा। 
       दरअसल यह आतंक का करोबार ज्यादा अमीर बनने के लिए ही शुरू किए गये थे जो अब उसके लिए आफत बनी हुई है थोडे दिन की चमक तो दिखी थी वह दो तीन दशक पहले का दौर था लेकिन शैतान की उम्र लम्बी और टिकाऊ नही होती जो अब सामने दिख रही है चंद निलामी और सामान बेचने से खरबो के कर्ज तले दबे पाई-पाई के मोहताज पाक आज जिस स्थिति में है वह उसी के द्वारा बोई फसल है हैरत तो तब होता है जब उससे भी वहाँ की सरकारें कोई सीख लेने को या गलती स्वीकार करने को तैयार नहीं है। जनता  को नशे की लत लगवाना फिर टैक्स बढाकर नशीले पदार्थों से धन कमाना। राजकोष में धनराशि बढ़ने तो लगी लेकिन सभी खोखले हो गये।नशे के लिए लूट पाट करने लगे और फिर देखते ही देखते आतंक का जन्म स्थली और शरण स्थली बन बैठा पाकिस्तान।और आज स्थिति यहाँ तक आ गयी कि आतंक ही उसका आधार बन गया है।
देखते देखते राजीव घर आ गया और अपने कार्यो में लग गया।इन तुलनात्मक विश्लेषण से राजीव के मन में पडोसी मुल्क के प्रति जो प्रेम थे वो प्रायः नफरत का रूप ले चुका था शायद राजीव की तरह ही हम सब भारत वासी के लिए पाक प्रेम समाप्त करना ही पहला प्रहार होगा आतंकबाद पर और इससे मुक्ति के लिए सभी स्तरो पर यह प्रेम हमें कठोरता से बंद करना होगा ।
                                 “आशुतोष”
                                  पटना बिहार

Author: admin

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