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सुधार : सरकारी स्कूलों के बच्चों को ही सरकारी नौकरी में लाइये…..!

पंकज सीबी मिश्रा  / राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी यह सितंबर माह शिक्षक दिवस के लिए जाना जाता है। किन्तु वर्तमान शिक्षा व्यवस्था का जो हाल है वह बेहद दयनीय और चिंताजनक है। पहले तो उन सभी शिक्षकों के प्रति आभार प्रकट करता हूँ जो आज भी स्वयं सरकारी मास्टर है, अस्सी हजार के…

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पेगेसस से भी खतरनाक अवसरवादी नेता

ब्राह्मण सम्मेलन क्युकी ब्राह्मणों को उलझाना है । ईद पर टोपी क्युकी मुसलमानों को टोपी पहनाना है ,ये सब नेताओं का चाल चरित्र है । ये नेता तो इतने गिरे है कि डकैत फूलन देवी तक को माला फूल पहनाकर सोशल मीडिया पर परोश रहे , उससे भी ज्यादा शर्मनाक रहा जब मियां खलीफा की…

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भव्या फाउंडेशन का सम्मान समारोह जयपुर में संपन्न होगा

अंतर्राष्ट्रीय मैत्री सम्मलेन और ग्लोबल एक्सेलेंसी अवार्ड -2023 में देश ,विदेश और प्रदेश की 200 प्रतिभाओं को सम्मानित किया जायेगा, जिनमे निशक्त जन, कैंसर पीड़ित और आटिज्म वर्रिएर्स, नेत्रहीन बच्चों और बाल बसेरा गृह के बच्चों को भी सम्मानित किया जायेगा। इस बार इस प्रोग्राम में 15 देशों के अवार्डीज़ शामिल होंगे ।इस रविवार 30…

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योग और अध्यात्म

आओ, योग करें  हम  और   करें     आत्म- मन्थन, योग   हमारे   लिए आज  है   कितना      उपयोगी? इसका है अभिप्राय पुरुष-प्रकृति की विवेचना और पुरुष- तत्व   का   आसन- रूप  में    विश्लेषण  है। गीता में भी कहा कृष्ण ने पुरुष-प्रकृति विश्लेषण है, अन्य वक्ता  भी  इसको   इसी अर्थ  मैं   हैं    मानते। इसके  होते   पन्द्रह  प्रकार  जो  अति महत्वपूर्ण …

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हॉन्गकॉन्ग को लेकर भारत ने बदले अपने सुर

चीन अपने पडोसी देशों से रिश्ते बद से बदतर करता जा रहा है, चाहे वह ताइवान हो, जापान हो या कोई और देश,वह  हर किसी से उलझने का साहस करता नजर आ रहा है। अगर हॉन्गकॉन्ग की बात करे तो ये बोलना कतई गलत नही होगा कि चीन ने  वहा लोक-तंत्र की हत्या कर दी…

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मनुवाद से मानवता तक : हमारे शौर्य पर किसका जोर..!

पंकज सीबी मिश्रा  / पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक जौनपुर यूपी पहले परशुराम फिर संत तुलसीदास , महान चाणक्य , स्वतंत्रता के समय मंगल पांडेय , बलिदान के समय वीर चंद्रशेखर आजाद और अब राजनीति में कई ब्राह्मण जिन्होंने मनुवाद के अलख को शीर्ष तक पहुंचाया । सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ ऐसे कई विभूतियों ने…

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छंद- गीतिका : यह समझ

मापनी- 2122 2122 2122 212 पदांत- यह समझ समांत- अहले साँस चलती है समय से तेज पहले यह समझ। चल सके तो वक्‍़त के ही संग बहले यह समझ। पंचतत्‍वों से बना अनमोल है यह तन मिला, ये बचें इनके लिए हर कष्‍ट सहले यह समझ। यह अगर हैं संतुलित तो मानले तू है सुखी,…

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डिज़ीज़ फ़्री इँडिया

कविता मल्होत्रा शक्ति, पावर, सत्ता का, आजकल हर तरफ बोलबाला है एक दूजे से आगे निकलने की होड़, हर मन का निवाला है ✍️ ये पश्चिमी सभ्यता के गहन प्रभाव का ही परिणाम है, कि आजकल समाज में विशिष्ट दिवस मनाने का प्रचलन है, जो तथाकथित आधुनिकता की देन है।कभी मातृ दिवस कभी पितृ दिवस…

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पुस्तक परिचय : संगम शब्दों का

लेखिका की कलम  से संगम शब्दों का – यह एक यथार्थ अभिव्यक्ति  है।  जिसमें, काल्पनिकता का समावेश ना होकर यथार्थ के चित्रण को  अभिव्यक्त किया गया है। संपूर्ण पुस्तक में उन सभी पहलुओं व मुद्दों पर प्रकाश डाला गया है जो कि,हमारे आसपास में घटित होते हैं । चाहे वह आर्थिक हो ,धार्मिक हो, सामाजिक…

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एक झूठ

एक प्रसिद्ध पत्रिका में लिखी हुई समस्या उसे अपने एक परिचित की समस्या सी लगी।थोड़ा सा और पता करने पर उसे महसूस हुआ कि यह कहानी तो शायद उसी परिचित व्यक्ति की है । उनकी पत्नी उन्हें छोड़कर अपने मायके में रह रहीं थीं ।वे उनके ही पड़ोस में रहने वाले वर्मा जी थे ।              …

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