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बाबुल (कविता-3)

”कभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान है पिता बड़ी ही हसरतों से, बड़ी ही हसरतों से … पाला पोसा बड़ा किया, उच्च शिक्षा दिला, आत्मनिर्भर बनाया संस्कार, तहजीव, सभ्यता सब सिखाया मुझे, किन्तु किन्तु …. अधिकार के लिए, सम्मान के लिए …. बोलना न सिखाया मुझे बड़ी ही हसरतों… पाला पोसा बड़ा किया… आज बहुत ही,…

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क्या गर्भपात नैतिक रूप से उचित है?

लैंगिक समानता के लिए गर्भपात का अधिकार महत्वपूर्ण है। अलग-अलग महिलाओं के लिए अपनी पूरी क्षमता हासिल करने के लिए गर्भपात का अधिकार महत्वपूर्ण है। गर्भपात पर प्रतिबंध लगाने से महिलाओं को उन अवैध तरीकों का उपयोग करने के लिए मजबूर किया जाता है जो अधिक हानिकारक हो सकते हैं। लेकिन दूसरी ओर जीवन के…

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लॉक डाऊन पीरियड में मैं की महामारी से खुद को बचाया जाए

(कविता मल्होत्रा ) प्रदूषित मानसिकताओं के सँक्रमण से इस तरह सोशल डिस्टेंस बनाया जाएअपने अहम का सफ़ाया कर के “मैं” की महामारी से खुद को बचाया जाए ज़रा सोचिए –कल तक समूचे विश्व के तमाम देशों में एक दूसरे पर अपना वर्चस्व क़ायम करने की होड़ लगी हुई थी, और आज अचानक सब एक दूसरे का…

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रजिस्टर्ड पोस्ट का अंत : भरोसे की वह मुहर अब नहीं रहेगी

विजय गर्ग डाकिए की साइकिल की घंटी, थैले से झाँकते पत्रों की उत्सुक प्रतीक्षा, और रजिस्टर्ड डाक की पावती पर हस्ताक्षर का रोमांच – ये पल भारतीयों के दिलों में एक युग की तरह अमर हैं। लेकिन अब यह युग समाप्त होने जा रहा है। भारतीय डाक विभाग ने 1 सितंबर, 2025 से अपनी 50…

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विरोध प्रदर्शन का बेहद घटिया तरीका !

पहले कानपुर फिर  प्रयागराज और अब मुरादाबाद  में पत्थर  चले ,जबकि कानपुर में हुए पत्थरबाजी को लेकर उत्तर प्रदेश प्रशासन ने जिस प्रकार कार्रवाई की है एक उदाहरण हो सकता है कानून व्यवस्था में शांति स्थापना का। लेकिन इसके बावजूद भी उन्मादियों में कोई सबक नहीं है। तब जब पूरे देश में योगी जी के…

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चेतना के फूल

चेतना के फूल तभी खिले जब सर्वस्व चढ़ाया है भानु का तांडव जारी फिर भी अंतरमन प्रेम से नहाया है कोई तो बात होगी सावन की फुहार में जो कीचड़ में भी कमल खिलाने की संभावनाओं को प्रकट करती है।दृष्टि हो तो सृष्टि बदल जाती है वर्ना सदियों के फेरों में उम्र निकल जाती है।जब-जब…

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यादे यूँ भी पुरानी चली आईं (गीत)

मन की बाते बताये तुम्हें क्याहै ये पहली मुहब्बत हमारीभले दिन थे वो गुजरे जमानेमीठी मीठी सी अग्न लगाई हम तो डरते हैं नजदीक आकेजान ले लो – ऐ जान हमारीकब से बैठे दबाये लबो कोकब से यारी है गम से हमारी चढगयी सर आसमाँ तकये नशीली रात खुमारीबजते घुघरू से आवाज आईदेखो कैसी चली…

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लघुकथा : अभिशप्त

–डॉ. कृष्ण शाह यात्री(नेपाल) वह फूलवारी एक नमूने के रूप में बसाई गई थी। वहाँ हर तरह के फूलों ने शोभा बढ़ा रखी थी। उस फूलवारी की ख्याति, सुगंध और सुंदरता सारी दुनिया में फैली हुई थी।उस फूलवारी में कुछ निर्मम काँटे भी थे। वे काँटे हमेशा फूलों को हानि पहुँचाने की कोशिश करते थे।…

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पावन होली की हार्दिक शुभकामनाएं : डॉक्टर सुधीर सिंह

पावन होली की हार्दिक शुभकामनाएं,हर हिंदुस्तानी यहां  सुखी-समृद्ध रहे।सबों के मन में रहे  भाईचारे का भाव,प्रगति-पथ पर सब  सदा अग्रसर रहे। प्रेमपूर्ण परिवेश के रंग में रंग जाने से,फाग का राग दिल गाने लग जाता है।थिरकने लगता है अधर गीत सुनकर,ढोल,मृदंग पर थाप बरसने लगता है। गुलाल की खुशबू  से  भींगा माहौल,वसंत का एहसास  कराने…

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