बाबुल (कविता-3)
”कभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान है पिता बड़ी ही हसरतों से, बड़ी ही हसरतों से … पाला पोसा बड़ा किया, उच्च शिक्षा दिला, आत्मनिर्भर बनाया संस्कार, तहजीव, सभ्यता सब सिखाया मुझे, किन्तु किन्तु …. अधिकार के लिए, सम्मान के लिए …. बोलना न सिखाया मुझे बड़ी ही हसरतों… पाला पोसा बड़ा किया… आज बहुत ही,…
