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सुरक्षित समाज और कार्यस्थल
पुरुषों की सारथी भूमिका एक प्रगतिशील समाज की पहचान इस बात से नहीं होती कि वहाँ कितनी ऊँची इमारतें हैं,बल्कि इस बात से होती है कि वहाँ महिलाएँ कितनी सुरक्षित और सम्मानित महसूस करती हैं। घर की चारदीवारी से लेकर दफ्तर के केबिन तक,महिलाओं ने अपनी योग्यता को साबित किया है। लेकिन इस सफर को…
प्रेम,love,attracfion : आशा सहाय
मेरे घर के बरामदे मे कपड़े सूखने के लिए टाँगीगई एक अलगनी पर एक अत्यंत छोटी सी चिरैया ने पंखों का एक छोटा सा घोंसला बना लिया अथवा यों कहूँ कि लटका लिया है।सफेद छोटे छोटे पंखों का एक आकर्षक घोंसला।आश्चर्य होता है कि कहाँ से उसने इतने छोटे छोटे पंख ढूँढे होंगे।मै चिकित्सीय कारणों…
न्यायालय की गरिमा और लोकतंत्र की परीक्षा
लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में न्यायपालिका केवल एक संवैधानिक संस्था नहीं, बल्कि नागरिकों के अधिकारों, विधि के शासन और राज्य की जवाबदेही का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। जब कोई नागरिक न्यायालय की चौखट पर पहुंचता है, तो वह केवल अपने विवाद का समाधान नहीं चाहता, बल्कि उसे इस बात का भरोसा भी होता है कि उसकी…
न्याय के मंदिर की गरिमा और नागरिक मर्यादा : डॉ. सत्यवान सौरभ
भारतीय लोकतंत्र की संपूर्ण संरचना चार प्रमुख स्तंभों—विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और स्वतंत्र मीडिया—पर आधारित है। इनमें न्यायपालिका वह संस्था है, जिसके समक्ष प्रत्येक नागरिक अंतिम उम्मीद लेकर पहुँचता है। जब प्रशासनिक तंत्र विफल हो जाता है, जब शासन से निराशा हाथ लगती है और जब अधिकारों का हनन होता है, तब नागरिक न्यायालय का दरवाज़ा…
कहानी : युक्ति -राजेन्द्र परदेसी
विभागाध्यक्ष के सम्मुख अजीब समस्या थी। दो खाली पदों के लिए पहले से ही ऊपर से दो नाम चयन हेतु उनके पास आ चुके थे। उधर वही ऊपर वाले आये दिन सार्वजनिक रूप से यही घोषणा करते कि किसी भी स्तर पर भाई-भतीजाबाद और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। हर कार्य में पारदर्शिता बरती…
जहां सुमति तह सम्पत्ति नाना – जहां कुमति तह विपती निधाना : राम मन्दिर चढ़ावा चोरी जघन्य पाप
पंकज सीबी मिश्रा , राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी अयोध्या रामचरित मानस का मुख्य केंद्र रहा है । यहां से भगवान राम की जीवन यात्रा प्रारम्भ हुई जो मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम बनने तक कई घटनाओं से होकर गुजरी। पूज्य बाबा तुलसीदास जी लिखते भी है जहां सुमति तह सम्पति नाना जहां कुमति तह विपती…
न्याय मंदिर से लेकर राम मंदिर तक : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव
राजनीतिक सफरनामादुनिया में न्याय के मंदिर के रूप् मेें स्थापित न्यायालय न केवल कानून की रक्षा करते हैं, उनके पालन की जिम्मेदारी तय करते हैं बल्कि वे आम आदमी के लिए आषा के केन्द्र बिन्दु भी होते हैं । आम आदमी जब सरकारी व्यवस्थाओं से हार जाता है तब वह न्यायलय की दहलीज पर नया…
व्यंग्य: ईर्ष्या की प्रासंगिकता — राजेन्द्र परदेसी
पता नहीं किस मूड में हमारे पूर्वजों ने यह युक्ति गढ़ दी कि “ईर्ष्या कबहूँ न कीजिए”। मुझे तो ऐसा लगता है कि उन्हें शायद किसी की प्रगति देखी नहीं गई, तभी हताश होकर उन्होंने यह उक्ति बना दी। वरना यह तो सर्वविदित है कि लोग उसी से ईर्ष्या करते हैं जो प्रगति-पथ पर बढ़ता…
रिश्तों में दखल देता मौत क्यूंकि समाज में बढ़ रहें पति पत्नि और वो के मामले……! – पंकज सीबी मिश्रा
पंकज सीबी मिश्रा, सामाजिक चिंतक, उप संपादक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी सिया – केतन मामले ने समाज में राजा रघुवंशी मर्डर केस की यादें ताजा कर दी है। ₹600 करोड़ की संपत्ति, ₹17 करोड़ शादी का बजट, बारात के लिए दो चार्टर्ड विमान की बुकिंग , उदयपुर में पूरा एक शाही लक्जरी 5-स्टार होटल ,…
बेशर्मी और केवल बेशर्मी – कुशलेन्द्र श्रीवास्तव
अपनी धार्मिकता को महसूस किया जा सके पर ऐसा नहीं हो सका । इन दिनों युवाओें का आचरण अजीब ढंग का महसूस किया जाने लगा है । स्वछंदता और बेशर्मी इसके मानक बन चुके हैं । यही कारण है कि देश के विभिन्न अंचलों मेें ऐसी घटनाएं घटित हो रही हैं । शादी-ब्याह को खेल…
