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जातिवादी नेता ही देश में असली समस्या, सोशल मिडिया पर सनातन और सवर्ण है इनके निशाने पर ……
पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी इसमें ग़लत है क्या कुछ..? ये जातिवादी गुंडे आरक्षणम देहि बोलते बोलते एक धरने में रोज़ घुसते हैं और बिना लॉग लपेट के खाना खाकर ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद बोलकर चल देते है। आख़िर ये सब नेता और साहेब के चेले ही तो हैं जिन्होंने अस्सी साल तक…
हनुमान अंश : वह फिल्म जिसने दर्शकों को श्रद्धालु बना दिया : महेन्द्र तिवारी
भारत में समय समय पर ऐसी फिल्में आती रही हैं जो केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बनतीं, बल्कि समाज की भावनाओं, संस्कृति और आस्था से गहरा संवाद स्थापित करती हैं। वर्ष 2026 की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल हनुमान अंश भी ऐसी ही एक कृति है। संत नीम करौली बाबा के जीवन, उनकी करुणा, सेवा…
राजनीतिक सफरनामा : जेनजी के लिए लालीपाप का दौर – कुशलेन्द्र श्रीवास्तव
भारत में आजकल जेनजी हीरो बन चुके हें जिसे देखो वह ही जेनजी को मनाने-थपाने मेें लगा हुआ है । जेनजी कल तक सो रही थी, राजनीतिक पार्टिंयां उन्हें नारे लगवाने के काम में लगा कर उन्हें अपनी ही ताकत से विस्मृत कर देती थीं । वही जेनजी दिल्ली मेें कॉकरोच पार्टी के आन्दोलन के…
1991 के आर्थिक संकट में एस. वेंकिटारमनन की निर्णायक भूमिका
आज गवर्नर फ़िल्म देखकर 1990-91 में भारत के आर्थिक संकट की भयावह याद ताज़ा हो गई, जब भारत लगभग दिवालिया होने के कगार पर खड़ा था। आज भारत 693 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार के साथ विश्व के अग्रणी देशों की क़तार में खड़ा है। तब यह विश्वास करना कठिन था कि साढ़े तीन…
ब्रिक्स की ‘गूंज’ वाशिंगटन से इस्लामाबाद तक खलबली
अजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार,लखनऊ ( उ. प्र.)नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मंच पर जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक साथ कैमरे के सामने आए, तो वाशिंगटन से लेकर पश्चिमी राजधानियों तक भू-राजनीतिक हलचल तेज होना लाजिमी था।…
आत्मविश्वास : -अजय कुमार पाण्डेय
हैदराबाद की प्रतिष्ठित टेक कंपनी की सुबह हमेशा की तरह व्यस्त थी। सभी लैपटॉप, ई-मेल, ऑनलाइन मीटिंग और समय-सीमाओं के भीतर अपने लक्ष्य की दौड़ में व्यस्त थे।कंपनी की चकाचौंध में साधारण कपड़े पहने घबराया हुआ चेहरा और आँखों में कहीं नौकरी से न निकाल दिए जाने की आशंका लिए रवींद्रन हड़बड़ी में कई गड़बड़ियाँ…
डिजिटल युग में हिंदी : उमा त्रिवेदी
(14 सितंबर – हिन्दी दिवस पर विशेष) तकनीक की नई जुबां और बढ़ती पैठ”निज भाषा उन्नति अहै,सब उन्नति को मूल।बिनु निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल॥”“भारतेंदु हरिश्चंद्र”एक दौर था जब यह आशंका जताई जाती थी कि अंग्रेजी और आधुनिक तकनीक के बढ़ते वर्चस्व के बीच हिंदी कहीं पीछे न छूट जाए। लेकिन डिजिटल…
कचरे के ढेर, बीमारियों के शहर – डॉ. प्रियंका सौरभ
हम अपने घर को साफ रखने के महत्व से अवगत हैं, लेकिन जैसे ही हम अपने घर से बाहर निकलते हैं, हमारी जिम्मेदारी की भावना गायब हो जाती है। कई लोगों को घरेलू सामान सड़क के किनारे, नाले में, खाली जगह पर या सार्वजनिक स्थानों पर फेंकने की आदत पड़ गई है। प्लास्टिक बैग, पॉलिथीन,…
आरक्षण की समीक्षा रोकने वाले राजनैतिक गिद्ध : मलाई खैरात की पीढ़ी दर पीढ़ी मिल जो रही….
पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी संसद में आरक्षण लेकर करोड़पति बने नेता आरक्षण छोड़ना नहीं चाहते और अब जब इस बेतरतीब आरक्षण की समीक्षा पर चर्चा शुरू है तो आरक्षण की समीक्षा रोकने को लेकर उलूल जुलुल बयानबाजी कर रहें। कभी खड़गे का उदाहरण देकर तो कभी मांझी का उदाहरण देकर…
नेपाल का जलप्रलय : गर्म होते हिमालय की भयावह चेतावनी – महेन्द्र तिवारी
26 अगस्त 2026 की सुबह नेपाल के हिमालयी क्षेत्र में एक ऐसी प्राकृतिक आपदा आई जिसने पूरे दक्षिण एशिया को झकझोर दिया। नेपाल और तिब्बत की सीमा पर स्थित लांगटांग पर्वतीय क्षेत्र में एक विशाल हिमखंड और चट्टान का हिस्सा अचानक टूटकर नदी घाटी में गिर गया। इस घटना से भोटे कोशी और त्रिशूली नदी…
