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नयी पीढ़ी बनाम पुरानी पीढ़ी : कालजयी द्वन्द्व — राजेन्द्र परदेसी
नयी पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी में सदा से मतभेद रहा है, और वह रहेगा ही। कारण यह है कि नयी पीढ़ी के पास जोश होता है। वह इस जोश पर विश्वास करके सोचती है कि भविष्य के हर अवरोध को वह सहजता से पार कर जाएगी।वहीं पुरानी पीढ़ी के पास अनुभव होता है। वह जानती…
Tattwamasi Trust,Delhi Hosts Successful Free Dental Camp in Dwarka
NEW DELHI — Tattwamasi Trust organized a comprehensive free dental care camp at Sanchar Vihar Society in Sector 4, Dwarka, on September 27. Held in collaboration with the Rotary Association, the initiative saw a turnout of nearly 100 residents seeking expert consultation and care for various oral health issues.The event was spearheaded by trust organizers…
बस कीजिये ! देशव्यापी व्यवस्था चलने दीजिये, धरनो से धारणा नहीं बदलेगी…!
सवर्णों से दूर हुई पार्टियों का ही अस्तित्व खत्म हुआ हैदेश का पॉलिटिकल लोकतंत्र दो संविधान चलवा रहा,एससी/एसटी एक्ट और यूजीसी रेगुलेशन देश विरोधी.! पहले गरीबों को उनका हक़ दीजिये तब जाति और आरक्षण की बात कीजिए पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी बड़ी ही विकराल स्थिति है एक सवाल का कुछ…
राजनीतिक सफरनामा : चुनाव आयोग पर उठते सवाल
कुशलेन्द्र श्रीवास्तवभारत का चुनाव आयोग चर्चाओं मेें हैं, चुनाव आयोग से ज्यादा चर्चाओं में ज्ञानेश कुमार हैं जो मुख्य चुनाव अधिकारी हैं । जब से वे मुख्य चुनाव अधिकारी बने हैं तब से ही वे चर्चाओं मेें हैं । कुछ अधिकारियों की कार्यप्रणाली होती ही ऐसी है कि वे विवाद को जन्म देते रहते हैं…
माँ बोली—अतीत से भविष्य तक
डॉ. विजय गर्ग माँ बोली केवल बातचीत का माध्यम नहीं होती, बल्कि यह हमारी पहचान, भावनाओं, संस्कृति, स्मृतियों और सामाजिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। बच्चा दुनिया को समझने से पहले अपनी माँ की आवाज़ और शब्दों को पहचानना शुरू करता है। माँ की लोरी, परिवार की बातचीत, दादा-दादी की कहानियाँ और घर में…
स्कूलों की चमक से आगे सीखने की गुणवत्ता
भारत में स्कूली शिक्षा की बहस लंबे समय तक विद्यालयों की संख्या, नामांकन और बुनियादी सुविधाओं के इर्द-गिर्द घूमती रही। अब प्रश्न बदल रहा है। बच्चा विद्यालय में पहुंच रहा है या नहीं, यह महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे बड़ा प्रश्न यह है कि विद्यालय पहुंचने के बाद वह सीख क्या रहा है, उसकी जिज्ञासा कितनी…
कल्पनाएँ , स्वप्न या सत्यमूल : आशा सहाय
कल्पनाएँ जो सामान्य शब्दों में मनोजगत की सृष्टि समझी जा सकती हैं और मानव निर्मित दृश्य और अदृश्य जगत को प्रभावित कर, उसे रंग रूप और आकार देती हैं ,वे स्वयं कहाँसे और क्यों सृष्ट होती हैंयह एक विचारणीय प्रश्न है।कल्पना से क्या ज्ञान का कोई सम्बन्ध है?क्याये सत्य के समीप होती हैं अथवा उसके…
जातिवादी नेता ही देश में असली समस्या, सोशल मिडिया पर सनातन और सवर्ण है इनके निशाने पर ……
पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी इसमें ग़लत है क्या कुछ..? ये जातिवादी गुंडे आरक्षणम देहि बोलते बोलते एक धरने में रोज़ घुसते हैं और बिना लॉग लपेट के खाना खाकर ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद बोलकर चल देते है। आख़िर ये सब नेता और साहेब के चेले ही तो हैं जिन्होंने अस्सी साल तक…
हनुमान अंश : वह फिल्म जिसने दर्शकों को श्रद्धालु बना दिया : महेन्द्र तिवारी
भारत में समय समय पर ऐसी फिल्में आती रही हैं जो केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बनतीं, बल्कि समाज की भावनाओं, संस्कृति और आस्था से गहरा संवाद स्थापित करती हैं। वर्ष 2026 की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल हनुमान अंश भी ऐसी ही एक कृति है। संत नीम करौली बाबा के जीवन, उनकी करुणा, सेवा…
