Special Article
कचरे के ढेर, बीमारियों के शहर – डॉ. प्रियंका सौरभ
हम अपने घर को साफ रखने के महत्व से अवगत हैं, लेकिन जैसे ही हम अपने घर से बाहर निकलते हैं, हमारी जिम्मेदारी की भावना गायब हो जाती है। कई लोगों को घरेलू सामान सड़क के किनारे, नाले में, खाली जगह पर या सार्वजनिक स्थानों पर फेंकने की आदत पड़ गई है। प्लास्टिक बैग, पॉलिथीन,…
आरक्षण की समीक्षा रोकने वाले राजनैतिक गिद्ध : मलाई खैरात की पीढ़ी दर पीढ़ी मिल जो रही….
पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी संसद में आरक्षण लेकर करोड़पति बने नेता आरक्षण छोड़ना नहीं चाहते और अब जब इस बेतरतीब आरक्षण की समीक्षा पर चर्चा शुरू है तो आरक्षण की समीक्षा रोकने को लेकर उलूल जुलुल बयानबाजी कर रहें। कभी खड़गे का उदाहरण देकर तो कभी मांझी का उदाहरण देकर…
नेपाल का जलप्रलय : गर्म होते हिमालय की भयावह चेतावनी – महेन्द्र तिवारी
26 अगस्त 2026 की सुबह नेपाल के हिमालयी क्षेत्र में एक ऐसी प्राकृतिक आपदा आई जिसने पूरे दक्षिण एशिया को झकझोर दिया। नेपाल और तिब्बत की सीमा पर स्थित लांगटांग पर्वतीय क्षेत्र में एक विशाल हिमखंड और चट्टान का हिस्सा अचानक टूटकर नदी घाटी में गिर गया। इस घटना से भोटे कोशी और त्रिशूली नदी…
राजनीतिक सफरनामा : मिलावटी सामग्री ने होश उड़ाए – कुशलेन्द्र श्रीवास्तव
अब सारी मुहिम मिलवाटी सामग्री को जब्त कर लेने की है । त्यौहार आते ही खाद्य विभाग सक्रिय हो जाता है और खाद्य सामग्री बेचने वालों पर कार्यवाही करने लगता है, शेष दिनों के ऐसी कार्यवाही नहीं हो पाती । फोटो मेें देखा जा रहा है कि किस बेरहमी के साथ खाद्य सामग्री में मिलावट…
साक्षात्कार : आने वाली पीढी के लिए ज्ञान का महासागर भरा पडा है। –रामदेव धुरंधर
मॉरीशस के वरिष्ठ साहित्यकार रामदेव धुरंधर से राजेन्द्र परदेसी की बातचीत । प्रश्न 1 – मित्र रामदेव धुरंधर जी, आपसे एक महत्वपूर्ण प्रश्न करता हूँ। हिन्दी जगत में एक धारणा बनी होती है आप भारत के नागरिक थे जो मॉरिशस में जा कर बस गए हैं। आप इस पर क्या कहेंगे?उत्तर – आपका प्रश्न स्वयं…
व्यंग्य -बर्थ-डे अनारकली का : – राजेन्द्र परदेसी
सुबह आफिस जाने लगा तो श्रीमती जी ने कहा, अजी सुनते हो! आज जरा जल्दी लौट आना। शर्मा जी के यहाँ शाम को चलना है, उनकी अनारकली का बर्थ डे है। उनकी मिसेज कल ही कह गयी थी कि आप दोनों जने जरूर आइयेगा।यह तो जानता था कि शर्मा जी मुहल्ले के बडे़ आदमी है।…
बेरोजगारी का शोर बनाम समाधान – राजेंद्र परदेसी
आज शिक्षा और बेरोजगारी की बहुत बात की जाती है। नेताओं से लेकर चाय की दुकान तक यही चर्चा है। पर क्या कभी हमने सोचा है कि समस्या की जड़ कहाँ है? क्या कोई भी सरकार, चाहे वह किसी भी राज्य या देश की हो, विद्यालयों और विश्वविद्यालयों से निकलने वाले हर विद्यार्थी को सरकारी…
व्यवस्था परिवर्तन बनाम आत्म परिवर्तन -राजेन्द्र परदेसी
पक्ष हो या विपक्ष, चुनाव आते ही दोनों जनता से कहते हैं – “व्यवस्था बदलो”। वही आम जनता, जो प्रतिनिधि चुनकर व्यवस्था चलाने के लिए भेजती है। जिसे अधिक लोग चुनकर भेजते हैं, उसी को सत्ता मिलती है। हम हर पांच साल में एक सपना देखते हैं। “इस बार व्यवस्था बदल जाएगी”। नया नेता आएगा,…
बदलता भारत, बनता भारत
हम जिस भारत के रूप में उभरे हैं, और जिस भारत की हम अभी भी तलाश कर रहे हैं प्रत्येक स्वतंत्रता दिवस हमें अपने राष्ट्र के अतीत पर चिंतन करने और भविष्य पर विचार करने का अवसर देता है। स्वतंत्रता के पिछले 80 वर्षों में भारत में आए कुछ परिवर्तनों को याद करने का यह…
सामनता पर मुखर हुआ समाज, छात्रों के सब्र का बाँध टूट रहा
मुद्दा : आरक्षण की गलत नीतियों से प्रभावित हो रहा सामान्य वर्ग के छात्रों का भविष्यमांग : जिन राज्यों अथवा गाँवों में आरक्षण की जरुरत बस वही तक सिमित कीजिये आरक्षणसुझाव : आरक्षण रिफार्म कीजिये, आरक्षण को आर्थिक स्थिति पर लागू कीजियेलेखक : पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर रांची में आंदोलनरत छात्रों…
