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राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूंगा है : महात्मा गांधी

महात्मा गांधी ने अदालती कामकाज में भी हिन्दी के इस्तेमाल की पुरजोर पैरवी की थी। वे कहते थे, देश की उन्नति के लिए राष्ट्रीय व्यवहार में हिन्दी को काम में लाना अत्यंत आवश्यक है। क्योंकि अपनों तक अपनी बात हम अपनी भाषा द्वारा ही पहुंचा सकते हैं। अपनों से अपनी भाषा में बात करने में…

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विकसित भारत का लक्ष्य पाने के लिए स्थिर सरकार जरूरी”: वित्त मंत्री

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘जब तक जीडीपी नहीं बढ़ेगी, हम अर्थव्यवस्था की मांगों को पूरा नहीं कर पाएंगे. हमें निवेश एवं सेवाओं को बढ़ाने, शैक्षणिक संस्थानों और लोगों को घर खरीदने एवं कारोबार शुरू करने के लिए धन की जरूरत होती है.’ केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि वर्ष…

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तेरा क्या होगा कालिया…… ! – कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

‘‘तेरा क्या होगा कालिया’’ कोई कह नहीं रहा है पर कहता हुआ सा दिखाई दे रहा है । चुनाव चल रहे हैं और चुनाव में ‘‘बोल वचन’’ भी चल रहे हैं और बोल वचनों का अंत ऐसी ही सोच के साथ होता है । आदमी बोलते समय सब कुछ भूल जाता है जो मन में…

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गांधी जयंती व शास्त्री जयंती पर स्वच्छता अभियान प्रारम्भ

  गन्तव्य संस्थान , भारतीय प्राकृतिक चिकित्सक संघ , सर्वधर्म वेलफेयर सोसायटी, अखिल भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा परिषद , एवं रेजिडेंशियल वेलफेयर सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में 2 अक्टूबर 2023 को प्रातः 9 बजे स्वच्छता अभियान के तहत सफाई का कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। इस अवसर पर बच्चों के साथ साथ बड़ों ने भी इलाके में सफाई…

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साहित्यिक गुरुओं , अध्यात्मिक जगद्गगुरु एवं साहित्यिक विभूतियों ने किया 11 पुस्तकों का लोकार्पण

नयी दिल्ली ( 8 जुलाई (शनिवार), गाँधी शांति प्रतिष्ठान , आई टी ओ, दिल्ली में अनुराधा प्रकाशन द्वारा पुस्तकों का लोकार्पण, काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया , आयोजन में प्रयाग पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ओंकारानंद सरस्वती जी महाराज , प्रोफेसर (ग्रुप कैप्टेन) ओ पी शर्मा जी (महानिदेशक-महर्षि विश्विद्यालय, नॉएडा), श्री पवन…

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गुलाबी/काला/ सफेद..

कई दिनों से!दिन क्या महीनों से बंद हूँ।न खुलकर सांस ले पा रहा हूँ,न ही रोशनी की किरण ही मुझ तक पहुँच रही हैं।दम घुट रहा है।              शायद उसके कदमों की आहट है। पता नहीं आज क्या करेगा? मुझे निकालेगा या मुझ जैसे और साथियों को यहाँ बंद कर देगा। हे ईश्वर!                हाँ…

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देश को प्लास्टिक मुक्त बनाने की कमजोर मुहिम से कैंसर का खतरा चरम पर ..!

आज विश्व में कैंसर एक लाइलाज बीमारी के रूप जानी जाती है , उसके लाइलाज होने के पीछे हम आप और बढ़ता प्लास्टिक उपयोग है । सिंगल यूज प्लास्टिक सबकी जरूरत बन चुकी है और एक सर्वे के मुताबिक विश्व का 40% कैंसर प्लास्टिक के उत्पादों, प्लास्टिक के अवयवों या प्लास्टिक के कारण विकसित होता…

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   कुछ इस तरह मनाएँ छब्‍बीस जनवरी इस बार,

सुधाकर अमृतवर्षा, दिवाकर रश्मि‍मणि बिखेरे इस बार,स्‍वाति गिरे धरा कुमकुम का शृंगार करे इस बार,क्षितिज पर फहराए विजयी विश्‍व तिरंगा अपना इस बार, कुछ इस तरह मनाएँ छब्‍बीस जनवरी इस बार,दो देश करते हैं जैसे विकास के लिए कोई करार।ग़रीबों के हक़ की बात करें इन्‍सानियत के दुश्‍मनों का करें बहिष्‍कार,बच्‍चों की सेहत पर दें ध्‍याननारी…

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तुम कल नहीं रहे तो क्या होगा???

डा.सर्वेश कुमार मिश्र (महासचिव वैश्विक संस्कृत मंच दिल्ली प्रांत) _ खुद को महान समझते हो, बल और बुद्धि की खान समझते हो, पर सोचा है गर तुम कल नहीं रहे तो क्या होगा?? सोचा है कल का सूरज गर न सके देख तो क्या होगा?? सुनो शुक्कर की बाजार भी लगेगी शनि बाजार भी लगेगी…

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स्वार्थ निहित राष्ट्रवादियों से सावधान ..!

राष्ट्रवाद के निमित्त देश हित में सामाजिक  रंग और भावना कैसा है,कोई इसे हनुमान की तरह सीना फाड़कर नहीं दिखा सकता। राष्ट्रवादी होने का कोई गीत नहीं गाया जा सकता। राष्ट्रवाद अपने आप में एक जज्बा है, जूनून है जिसे मौक़ा मिलने पर पूरी ताक़त से दिखाया जाना चाहिए ना की पहले भारत तेरे टुकड़े…

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