Special Article
सामनता पर मुखर हुआ समाज, छात्रों के सब्र का बाँध टूट रहा
मुद्दा : आरक्षण की गलत नीतियों से प्रभावित हो रहा सामान्य वर्ग के छात्रों का भविष्यमांग : जिन राज्यों अथवा गाँवों में आरक्षण की जरुरत बस वही तक सिमित कीजिये आरक्षणसुझाव : आरक्षण रिफार्म कीजिये, आरक्षण को आर्थिक स्थिति पर लागू कीजियेलेखक : पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर रांची में आंदोलनरत छात्रों…
प्रेमचंद की १४६ वीं जयंती पर उनकी पत्नी को समर्पित
‘शिवरानी देवी’ कहावत है- “ हर सफल पुरुष के पीछे एक स्त्री का हाथ होता है।” तथा“ पुरुष की उन्नति में स्त्री का मौन किंतु अपरिहार्य योगदान निहित होता है।” इस कहावतों को चरितार्थ किया है प्रेमचंद की अर्द्धांगिनी शिवरानी देवी ने, जिन्होंने अपने मौन, संयमित एवं अनिवार्य योगदान से प्रेमचंद नामक विराट साहित्य पुरुष…
स्वतंत्रता से विकसित भारत की ओर
15 अगस्त भारत के इतिहास का वह स्वर्णिम दिवस है जिसने करोड़ों भारतीयों को स्वतंत्रता का अमूल्य उपहार दिया। यह केवल राष्ट्रीय ध्वज फहराने और देशभक्ति के गीत गाने का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन, कर्तव्यबोध और भविष्य के संकल्प का भी दिन है। स्वतंत्रता हमें सहज रूप से प्राप्त नहीं हुई; इसके पीछे असंख्य स्वतंत्रता…
पेपर लीक पर गैर-भाजपा सरकारों से जवाबदेही कब?
– डॉ. सत्यवान सौरभ – भारत में प्रतियोगी परीक्षाएं केवल रोजगार का माध्यम नहीं हैं, बल्कि करोड़ों युवाओं के सपनों, परिवारों की उम्मीदों और सामाजिक न्याय की आधारशिला भी हैं। कोई भी परीक्षा तभी सार्थक मानी जाती है जब उसमें प्रतिभा, मेहनत और निष्पक्षता का सम्मान हो। लेकिन जब प्रश्नपत्र लीक हो जाता है, तो…
कहां चला गया पुलिस के हाथों में लहराने वाला डंडा
संजय सक्सेना,लखनऊ,वरिष्ठ पत्रकार उत्तर प्रदेश की सड़कों पर वर्षों तक एक दृश्य बेहद सामान्य हुआ करता था, जो अब केवल पुरानी यादों या पुलिस थानों की धूल फांकती फाइलों में सिमट कर रह गया है। खाकी वर्दी पहने एक पुलिस कर्मी, जिसके हाथ में एक लंबी, मजबूत और पॉलिश की हुई बेंत की लाठी होती…
कॉकरोच आंदोलन: गांधीवाद की छाया या डिजिटल युग का नया प्रतिरोध?
– डॉ. प्रियंका सौरभ भारत में जब भी कोई नया जन-आंदोलन उभरता है, उसे पुराने वैचारिक फ्रेमों में समझने की कोशिश होती है। कॉकरोच आंदोलन के साथ भी यही हुआ है। कुछ लोग इसे युवाओं के असंतोष की नई अभिव्यक्ति मानते हैं, तो कुछ इसे गांधीवादी परंपरा की छाया में पढ़ने का प्रयास कर रहे…
तेल,युद्ध,ब्याज दर और निवेश: वैश्विक आर्थिक तूफान में भारत की बाजार- नाव कितनी सुरक्षित? -वैश्विक संकटों के बीच भारतीय बाजार की चमक: मजबूत अर्थव्यवस्था या विदेशी पूंजी का अस्थायी सहारा? -समग्र व्यापक विश्लेषण
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चा तेल और ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बीच भारतीय शेयर बाजार की मजबूती -क्या भारत विश्व आर्थिक अनिश्चितता में निवेश का नया सुरक्षित केंद्र बन रहा है? क्या भारत ऐसी मजबूत, समावेशी और आत्मनिर्भर आर्थिक संरचना तैयार कर रहा है,जो तेल के झटकों,युद्ध के प्रभाव, विदेशी पूंजी की निकासी और वैश्विक…
परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता की नई कसौटी
भारत की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली केवल योग्य अभ्यर्थियों के चयन का माध्यम नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में समान अवसर, सामाजिक न्याय और योग्यता आधारित प्रतिस्पर्धा का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। करोड़ों विद्यार्थी वर्षों तक कठिन परिश्रम, आर्थिक सीमाओं और मानसिक दबाव के बीच इस विश्वास के साथ तैयारी करते हैं कि उनकी सफलता का निर्धारण…
अनैतिक आंदोलन से अनैतिक व्यवस्था बदलने की तैयारी
पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी सीजेपी के आंदोलन के बाद एक और आंदोलन की सुगबुगाहट है और वह है वर्तमान आरक्षण व्यवस्था के विरोध का। हालांकी इस पर लोगो के अलग – अलग मत है पर एक चीज जो सोचे जाने योग्य है वह है शिक्षा व्यवस्था में उदारीकरण और समानता…
