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आदिवासी समाज की लोकप्रिय नेत्री है द्रौपदी मुर्मू , अगली राष्ट्रपति बनने की ओर अग्रसर !

राष्ट्रपति पद के लिए 18 जुलाई को चुनाव होने है और देश की राजनीति में पहला नागरिक कौन इसपर घमासान मचा है ! ममता बनर्जी अपने  अहम में चूर वामपंथ विचारधारा के साथ विपक्ष को भड़का रही जबकि बीजेपी ने धोबी पछाड़ लगा कर ममता समेत पुरे विपक्ष की हवा निकाल दी ।  अगला राष्ट्रपति…

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सावन को आने दो

कुछ तो ख़ता ज़रूर हुई होगी जमाने से वर्ना सावन क्यूँ आनाकानी करता आने से ✍️ हम सभी ने अपने स्कूलों के बंधे बंधाए सिलेबस में ये तो ज़रूर पढ़ा होगा कि धरती का कितना सारा हिस्सा पानी से घिरा हुआ है।सागर का पानी भाप बनकर बादल का रूप धारण कर लेता है और बरसात…

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आनंद से भरा प्याला पीने को मिलता है

खोजना है तो सिर्फ आनंद की खोज कर, संसार में स्वयं को आडंबर से अलग रख। झूठी प्रतिष्ठा  के पीछे  नहीं  भाग अधिक, बहुत कुछ करना है पास में है थोड़ा वक्त। लोग उलझायेंगे  किन्तु रहना है सावधान, धैर्यऔर विवेक से मंजिल तक पहुंचना है। आदमी के लिए कोई  काम असंभव नहीं, दृढ़-संकल्प  के  साथ…

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सही कदम

        घर के बाहर बारिश की झड़ी लगी हुई थी और अन्दर सीमा और रमेश चाय के साथ पकौड़े खाने का आनंद ले रहे थे । बारिश में ज्यादातर लोग चाय पकौड़े का आनंद लेते हैं। बातें करते करते सीमा को अपना बचपन याद आने लगा । कैसे वह बारिश में बाहर भाग जाती थी…

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गोपीनाथ बोरदोलोई

(10 जून, 1890 से 05 अगस्त, 1950) प्रारंभिक जीवन :- लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलाई का जन्म 10 जून, 1890 को असम के नौगाँव ज़िले के रोहा नामक स्थान पर हुआ था। इनके पिता का नाम श्री बुद्धेश्वर बोरदोलोई तथा माता का नाम श्रीमती प्रानेश्वरी बोरदोलोई था। जब गोपीनाथ मात्र 12 साल के ही थे तभी इनकी…

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आत्मालाप : उल्टे पांव भूत के

           देवेन्द्र कुमार पाठक गांव में अब मास्क कोई भी नहीं लगाता.हाँ, वे लोग घर, जेब, बैग-थैले में एक-दो मास्क जरूर रखे रहते हैं, जो कुछ पढ़े-लिखे हैं या फिर वे सयाने जिन्हें शासन-सियासत, आधि-व्याधि, सूखा-बाढ़, अकाल-गिरानी  और दुनियादारी की गहरी समझ है. जिनको ऐसे दुर्दिन भुगतने- झेलने के बड़े तल्ख और कड़वे अनुभव हैं….

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नफरत का आतंक

कातिल जहाँ बेखौफ है कौन सा ये देश हैकानून का है राज नहीं पर कहलाता प्रदेश हैजहाँ कत्ल को लानत नहीं इज्जत वो समझने लगेभारत माता के आंगन में भी क्या विषधर साँप पलने लगे? कितने दिन कितनी रातें कितने घण्टों में सजा मिलेगीफाँसी से ज्यादा कुछ और क्या कानून की रजा मिलेगीइस क्रूरता को…

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बंकिमचंद्र के जन्मदिन पर अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन

भारतीय स्वतंत्रता काल में क्रांतिकारियों का प्रेरणास्रोत -‘वंदे मातरम्’- जो 1937 में भारत का राष्ट्रगीत बन गया, जिसके रचयिता बंग्ला भाषा के प्रख्यात उपन्यासकार एवं कवि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के जन्मदिन पर “अंतरराष्ट्रीय साहित्य संगम” (साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था) के तत्वावधान में संस्था के अध्यक्ष श्री देवेंद्र नाथ शुक्ल एवं महासचिव डॉ. मुन्ना लाल प्रसाद के संचालन…

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काव्य हिन्दुस्तान अंतरराष्ट्रीय साहित्य समूह का 150 घंटे का ऑनलाइन कार्यक्रम संपन्न

रेखा शर्मा स्नेहा के संयोजन में कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्यप्रदेश के गीतकार डॉ देवेंद्र तोमर ने की। काव्य हिंदुस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर फेसबुक समूह द्वारा आयोजित प्रथम वार्षिक उत्सव हेतु भव्य काव्य सम्मेलन आयोजित किया गया जो दिनाँक-12_62022 जून से दिनाँक-17_6’2022 तक लगातार 24 घंटा रात दिन कार्यक्रम जिसमे 300 कवियों ने काव्य पाठ कर कार्यक्रम…

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योग की महत्वता— योग दिवस—– प्रवीण बहल

सारे विश्व में हर व्यक्ति के जीवन में– योग का महत्व बढ़ गया है– अगर हम 50 वर्ष पीछे चले जाएं तो हमें याद होगा कि हर स्कूल में पढ़ाई शुरू होने से पहले पी टी हुआ करती थी– महत्व था शरीर को चुस्त बनाना– आज यह— अध्ययन के विषय में आ गया– जब से…

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