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राजनीतिक सफरनामा : मिलावटी सामग्री ने होश उड़ाए – कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

अब सारी मुहिम मिलवाटी सामग्री को जब्त कर लेने की है । त्यौहार आते ही खाद्य विभाग सक्रिय हो जाता है और खाद्य सामग्री बेचने वालों पर कार्यवाही करने लगता है, शेष दिनों के ऐसी कार्यवाही नहीं हो पाती । फोटो मेें देखा जा रहा है कि किस बेरहमी के साथ खाद्य सामग्री में मिलावट…

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साक्षात्कार : आने वाली पीढी के लिए ज्ञान का महासागर भरा पडा है। –रामदेव धुरंधर

मॉरीशस के वरिष्ठ साहित्यकार रामदेव धुरंधर से राजेन्द्र परदेसी की बातचीत । प्रश्न 1 – मित्र रामदेव धुरंधर जी, आपसे एक महत्वपूर्ण प्रश्न करता हूँ। हिन्दी जगत में एक धारणा बनी होती है आप भारत के नागरिक थे जो मॉरिशस में जा कर बस गए हैं। आप इस पर क्या कहेंगे?उत्तर – आपका प्रश्न स्वयं…

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व्यंग्य -बर्थ-डे अनारकली का : – राजेन्द्र परदेसी

सुबह आफिस जाने लगा तो श्रीमती जी ने कहा, अजी सुनते हो! आज जरा जल्दी लौट आना। शर्मा जी के यहाँ शाम को चलना है, उनकी अनारकली का बर्थ डे है। उनकी मिसेज कल ही कह गयी थी कि आप दोनों जने जरूर आइयेगा।यह तो जानता था कि शर्मा जी मुहल्ले के बडे़ आदमी है।…

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बेरोजगारी का शोर बनाम समाधान – राजेंद्र परदेसी

आज शिक्षा और बेरोजगारी की बहुत बात की जाती है। नेताओं से लेकर चाय की दुकान तक यही चर्चा है। पर क्या कभी हमने सोचा है कि समस्या की जड़ कहाँ है? क्या कोई भी सरकार, चाहे वह किसी भी राज्य या देश की हो, विद्यालयों और विश्वविद्यालयों से निकलने वाले हर विद्यार्थी को सरकारी…

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व्यवस्था परिवर्तन बनाम आत्म परिवर्तन -राजेन्द्र परदेसी

पक्ष हो या विपक्ष, चुनाव आते ही दोनों जनता से कहते हैं – “व्यवस्था बदलो”। वही आम जनता, जो प्रतिनिधि चुनकर व्यवस्था चलाने के लिए भेजती है। जिसे अधिक लोग चुनकर भेजते हैं, उसी को सत्ता मिलती है।  हम हर पांच साल में एक सपना देखते हैं। “इस बार व्यवस्था बदल जाएगी”। नया नेता आएगा,…

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बदलता भारत, बनता भारत

हम जिस भारत के रूप में उभरे हैं, और जिस भारत की हम अभी भी तलाश कर रहे हैं प्रत्येक स्वतंत्रता दिवस हमें अपने राष्ट्र के अतीत पर चिंतन करने और भविष्य पर विचार करने का अवसर देता है। स्वतंत्रता के पिछले 80 वर्षों में भारत में आए कुछ परिवर्तनों को याद करने का यह…

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सामनता पर मुखर हुआ समाज, छात्रों के सब्र का बाँध टूट रहा

मुद्दा : आरक्षण की गलत नीतियों से प्रभावित हो रहा सामान्य वर्ग के छात्रों का भविष्यमांग : जिन राज्यों अथवा गाँवों में आरक्षण की जरुरत बस वही तक सिमित कीजिये आरक्षणसुझाव : आरक्षण रिफार्म कीजिये, आरक्षण को आर्थिक स्थिति पर लागू कीजियेलेखक : पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर रांची में आंदोलनरत छात्रों…

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प्रेमचंद की १४६ वीं जयंती पर उनकी पत्नी को समर्पित

‘शिवरानी देवी’ कहावत है- “ हर सफल पुरुष के पीछे एक स्त्री का हाथ होता है।” तथा“ पुरुष की उन्नति में स्त्री का मौन किंतु अपरिहार्य योगदान निहित होता है।” इस कहावतों को चरितार्थ किया है प्रेमचंद की अर्द्धांगिनी शिवरानी देवी ने, जिन्होंने अपने मौन, संयमित एवं अनिवार्य योगदान से प्रेमचंद नामक विराट साहित्य पुरुष…

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स्वतंत्रता से विकसित भारत की ओर

15 अगस्त भारत के इतिहास का वह स्वर्णिम दिवस है जिसने करोड़ों भारतीयों को स्वतंत्रता का अमूल्य उपहार दिया। यह केवल राष्ट्रीय ध्वज फहराने और देशभक्ति के गीत गाने का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन, कर्तव्यबोध और भविष्य के संकल्प का भी दिन है। स्वतंत्रता हमें सहज रूप से प्राप्त नहीं हुई; इसके पीछे असंख्य स्वतंत्रता…

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अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस पर विशेष “किताबों के पन्नों से लेकर अनकही कहानियों तक”

“किताबों के पन्नों से लेकर अनकही कहानियों तक”… वो दोस्त जो हमारी डायरी के हिस्से होते हैंUmaMehtaTrivedi, freelance writer, Karnataka ​जिंदगी की किताब में कई पन्ने ऐसे होते हैं जो कोरे छूट जाते हैं,लेकिन कुछ पन्नों पर शब्दों की जगह कुछ खास लोगों के हस्ताक्षर होते हैं। अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस के अवसर पर जब हम…

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