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बारहमासी वसंत होगा

कविता मल्होत्रा (संरक्षक)

किसी को नज़ारे पसंद आते है

तो कोई हरियाली का तलबगार है

ख़ुशियाँ बाँटकर जग को ख़ुशी देना

प्रकृति के दिव्य कारोबार का आधार है

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वसंत ऋतु अपने आगमन के साथ-साथ जीवन दर्शन का एक बहुत ख़ूबसूरत संकेत भी लेकर आती है।हर तरफ़ रंग बिरँगे फूल देखकर किसका मन खुश नहीं होता होगा। हर तरफ़ फैली हरियाली किसको अपनी तरफ़ आकर्षित नहीं करती होगी।कई लोग पहाड़ी स्थानों पर घूमने चले जाते हैं तो कुछ लोग अपने दोस्तों और परिजनों के साथ ही सैर सपाटे के लिए निकल जाते हैं।ऐसा क्या है जो सभी को प्रकृति के सान्निध्य में समय बिताने के लिए मजबूर करता होगा?

हम सभी को मौसम के अनुसार कपड़े पहनना, जूते पहनना, बाहर घूमना, खाना-पीना और अपने मन माफ़िक़ समय बिताना बहुत पसंद है।लेकिन अपनी पसंद अपने स्वार्थ की परिधि में सिमटी होती है।जबकि प्रकृति का संदेश तो बहुत व्यापक है, जो सारे संसार को बिना कुछ लिए हरदम बाँटती रहती है, और बाँटकर खुश भी होती है।

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अगर हमारे जीवन का लक्ष्य सही हो तो ध्यान बन जाता है

सोच कर उठाया गया कदम प्रकृति का वरदान बन जाता है

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हम सबको निःशुल्क ज्ञान देने की व्यवस्था प्रकृति के माध्यम से की गई है।अब ये मानव जाति पर निर्भर करता है कि उस ज्ञान के ख़ज़ाने को बटोर ले या नज़रअंदाज़ कर दे।

प्रकृति का ये नियम है कि वो हमें जो भी कुछ देती है, उसे वापस भी ले लेती है।हम लेते हुए खुश होते हैं तो वापस लौटाते समय भी हमें अनासक्त होकर सहजता से बर्ताव करना चाहिए।

वसंत की दस्तक के साथ हम सब सुगँधित पुष्पों का आनंद लेने के लिए उत्सुक हो जाते हैं, लेकिन कभी फूलों की देखभाल का दायित्व उठाने का ख़्याल हम में से शायद ही किसी को आया हो।

बस ज़रा से दृष्टिकोण की जरुरत है। अगर हम सभी अपने आस-पास के वातावरण को वसंती रखने का लक्ष्य निर्धारित कर लें तो समूचा विश्व बारहमासी वसंत का हस्ताक्षर बन जाएगा।

अब बारहमासी वसंत प्रकृति के विरूद्ध जाकर तो बनाया नहीं जा सकता। लेकिन एक रास्ता है जो दिलों की पगडंडी से होकर गुजरता है।केवल निःस्वार्थ प्रेम ही ऐसा एकमात्र  माध्यम है जो हर दिल में फूल खिलाकर वैश्विक वसंत की गवाही दे सकता है।

केवल प्रेम दिवस के नाम पर काग़ज़ी गुलाब बाँटने से बेहतर है अपने जीवन के हर पल को वसंती बना लिया जाए।ये तभी संभव है जब हम एक दूसरे के प्रति बैर भाव को त्याग कर परस्पर प्रेम के फूल खिलाएँ।

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चलो अब के बरस वसंत को मुट्ठी में क़ैद कर लेते हैं

अपने दिलों में निःस्वार्थ प्रेम के दिव्य बीज भर लेते हैं

बारहमासी वसंत होगा फिर हर दिल में खिलेंगे गुलाब

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