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सूरज की सगी बहन

आग उगलती दोपहरी ये अंगारे सा दिन, कब आषाढ़ घन गरजेंगे कब बरसेगा सावन। प्यासे अधर नदी झरनों के, कंठ कुओं के सूखे, दिन भर के दुबके नीड़ों में, पंछी सोऐं भूखे। प्रातः से ही तपन तपस्विन करने लगी हवन, कब मेघों का बिजुरियों से होगा मधुर मिलन। सड़कों पर सन्नाटा लेटा, मृग मरीचिका बनकर,…

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प्यासी धरती मुरझा मधुवन

प्यासी धरती तुझे पुकारे, प्यासी नदिया तुझे पुकारे,       आ रे मेघा अब तो आ रे। बादल नीलगगन पर छाते, संग आंधियों को ले आते, तेरे राजदूत बनकर वे, झूठे आश्वासन दे जाते। सूखी पोखर तुझे पुकारे, आ रे मेघा अब तो आ रे।  कोयल सूखी अमराई में,  विरह गीत गाती रहती है,  और मोरनी…

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सविता चड्ढा द्वारा लिखी पुस्तक”हिंदी पत्रकारिता भूमिका और समीक्षा” का लोकार्पण और उनकी कहानियों पर चर्चा संपन्न

“हिंदी पत्रकारिता भूमिका एवं समीक्षा’ का लोकार्पण पंजाब केसरी की चेयरपर्सन श्रीमती किरण चोपड़ा,श्री अनिल जोशी, श्री ऋषि कुमार शर्मा ,डाॅ. मुक्ता, ओमप्रकाश प्रजापति एवं मनमोहन शर्मा ‘शरण’ जी के कर कमलों से संपन्न हुआ। लेखिका सविता चड्ढा ने उपस्थित सभी माननीय अतिथियों का हार्दिक अभिनंदन और स्वागत करते हुए कहा कि उनका लेखन अपने…

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राम से बड़ा राम का नाम : लता गोयल

राम हिंदू संस्कृति का प्रतीकात्मक शब्द है। राम शब्द के उद्बोधन में ईश्वरत्व का आभास होता है। राम शब्द हमें उस अलौकिक शक्ति का एहसास कराता है जो इस पूरे ब्रह्मांड का रचयिता है, जिस शक्ति के आगे बड़े से बड़े ऋषि और बड़े से बड़े वैज्ञानिक भी नतमस्तक होते हैं। फिर प्रश्न यह है…

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पगड़ी का मान

तुम्हारी बहन के यहां शादी में तुम ही चले जाओ। मुझे नहीं जाना अपनी बेइज्जती कराने के लिए। पूजा अपने पति से झूंझलाकर कह रही थी। पूजा का पति नीतीश चुपचाप पूजा की बात सुन रहा था। पूजा की बात भी सही थी। क्योंकि उसकी बहन अपनी अमीरी के दंंभ में उनको बेइज्जत करती ही…

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व्यंग्य : कार्यकर्ताओं को यह चुनाव चूना लगा गया..

 पंकज कुमार मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी  सांसद बनने का सपना देखने वालों के लिए उनके विश्वासपात्र ही अब सबसे बड़ी चुनौती बने है। अपने  कार्यकर्ताओ को सक्रिय रखना मुश्किल हो गया है तमाम माल मलाई रबड़ी सब बड़का नेता और प्रतिनिधि चचा खाय रहें और कार्यकर्ता को फोकट में इधर उधर दौड़ाय…

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तेरे दर पर आया हूॅ…… !

कुशलेन्द्र श्रीवास्तव ‘‘बाप रे इतने सारे नोट’’ आम आदमी के मुख से तो यह वाक्य निकल ही जाता है जब किसी के घर से नोटों की ढेर सारी गड्डियां बरामद होती हैं । चलो अच्छा है इस बहाने आम आदमी नोटों को भी देख लेता है और नोटों की गड्डियों को भी वरना अब तो…

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मेरी आस

मेरी जीत भी तुम हो मेरी  हार  भी तुम हो मेरी प्रीत भी तुम हो मेरी मीत भी तुम हो मेरा एहसास भी तुम हो मेरी  प्यास  भी  तुम  हो मेरा राज भी तुम हो मेरा नाज भी तुम हो मेरे  दिल  का  साज  भी  तुम  हो मेरे अंतर्मन की आवाज भी तुम हो मेरी…

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भारत विकास परिषद सृष्टि शाखा के तत्वाधान में विराट अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित हुआ ‘एक शाम मां के नाम’

पिलखुवा, भारत विकास परिषद सृष्टि शाखा के तत्वधान में एक विराट अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित हुआ कार्यक्रम के संयोजक| वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार अशोक गोयल रहे| कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार| डॉ वागीश दिनकर ने की।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान से सोहन लाल शर्मा प्रेम रहे।आज के कार्यक्रम का…

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कौन कहता है धरती पर नहीं भगवान : सीमा शर्मा

माँ के त्याग ,समर्पण , योगदान और उनके प्यार के प्रति और सम्मान सभी मातृ शक्तियों को समर्पित करते है इन पंक्तियों के साथकौन कहता है धरती पर नहीं भगवानहमे देखा है इस धरती पर देवी के रूप में है माँ”कोख में रखकर नौ महीने तकलीफ़ सहन करती है माँबाहरी दुनिया के दर्शन भी कराती…

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