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पूर्ण न्याय और संवैधानिक संतुलन

भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक यह है कि उसने राज्य की शक्ति को केवल शासन चलाने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे नागरिकों के अधिकारों की रक्षा का दायित्व भी सौंपा। इसी कारण भारतीय संविधान को केवल शासन संचालन का दस्तावेज नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, राजनीतिक समानता और मानवीय गरिमा का…

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पचास के बाद पेरेंट्स और बच्चे का भविष्य

(देर से संतान, जल्दी चिंताएँ?)  — डॉ. प्रियंका सौरभ विज्ञान ने मानव जीवन को अनेक सुविधाएँ और संभावनाएँ प्रदान की हैं। चिकित्सा विज्ञान की प्रगति ने उन दंपतियों के लिए भी माता-पिता बनने का मार्ग खोल दिया है, जो किसी कारणवश प्राकृतिक रूप से संतान प्राप्ति में सक्षम नहीं थे। IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) जैसी…

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नकाब में सफेदपोश  : देते है भगवान को धोखा, इंसा को क्या छोड़ेंगे..!

पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी मंदिरों और स्कूलों में आया धन जनता का धन होता है। यह भगवान और माँ सरस्वती के नाम पर श्रद्धाभाव से अर्पित किया जाता है, हलांकि ईश्वर तो बस श्रद्धाभाव से पत्रं पुष्पं फलं तोयं के ही आकांक्षी हैं  लेकिन विद्या का मंदिर कही कही तो…

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कोकरोच पार्टी, टूलकिट और जेन-जी को भड़काने का षड्यंत्र — परदे के पीछे कौन?

– डॉ. प्रियंका सौरभ आज का युग सूचना और संचार का युग है। इंटरनेट, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने विचारों के आदान-प्रदान को अभूतपूर्व गति प्रदान की है। एक समय था जब जनमत बनाने का काम अखबारों, पत्रिकाओं और टेलीविजन तक सीमित था, लेकिन अब एक साधारण मोबाइल फोन और इंटरनेट कनेक्शन के माध्यम…

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सुजोक एक्यूप्रेशर ब्योल मेरिडियन” पुस्तक का भव्य लोकार्पण एवं सम्मान समारोह सम्पन्न

नई दिल्ली,6 जून 2026 हिन्दी भवन, विष्णु दिगम्बर मार्ग,आई.टी.ओ.नई दिल्ली में सुप्रसिद्ध लेखिका “डॉ. पुनीता शर्मा रेहन” द्वारा लिखित पुस्तक “सुजोक एक्यूप्रेशर ब्योल मेरिडियन” का भव्य लोकार्पण एवं सम्मान समारोह गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में साहित्य, पत्रकारिता, शिक्षा एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष ऊंचाई…

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संपत्ति की भूख और बिखरते रिश्ते

– डॉ. प्रियंका सौरभ हरियाणा की धरती को लंबे समय तक पारिवारिक प्रेम, भाईचारे और संयुक्त परिवारों की संस्कृति के लिए जाना जाता रहा है। गांवों की चौपालों में रिश्तों की गर्माहट दिखाई देती थी। परिवार केवल खून का रिश्ता नहीं था, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी सुरक्षा और सम्मान का आधार माना जाता था।…

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प्रेम, वियोग और तड़प के कवि (विनम्र श्रद्धांजलि)

आधुनिक उर्दू साहित्य की सबसे प्रिय आवाजों में से एक, डॉ. बशीर बद्र के निधन से उर्दू कविता की दुनिया थोड़ी उदास-सी लग रही है। वे न केवल लाखों लोगों को छूने वाली रचनाओं का भंडार छोड़ गए हैं, बल्कि जीवन को हृदय के सरल लेकिन गहन नजरिए से देखने का एक अनूठा तरीका भी…

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भक्ति, बाबाओं की सत्ता और न्याय का विरोधाभास

जेल, पैरोल और धार्मिक प्रभाव के बीच उलझता भारतीय समाज – डॉ.  सत्यवान सौरभ भारत में धर्म केवल आस्था का विषय नहीं है; वह सामाजिक प्रभाव, राजनीतिक शक्ति और आर्थिक संरचना का भी बड़ा केंद्र बन चुका है। यही कारण है कि जब किसी बड़े धार्मिक बाबा, स्वयंभू संत या आध्यात्मिक संगठन के प्रमुख पर…

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ऐसा क्यों ?

             वन्दना को बहुत दिनों से नहीं देखा तो लगा शायद उसकी शादी हो गयी होगी ।अचानक ही व्हाट्सएप पर उसका नाम दिखा तो गरिमा से न रहा गया उसने मैसेज भेज ही दिया – “अरे वन्दना तू कैसी है ?कहाँ है ?”        कुछ समय बाद वन्दना…

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गर्मी

1 धरती सारी जल उठी, आसमान है मौन रहबर भी भटका हुआ, राह दिखाए कौन राह दिखाए कौन, पड़ा असमंजस भारी होते सब हैरान, परेशां दुनिया सारी देती सबको प्यार, हमारे दुर्गुण सहती यही मातृ रूपेण, हमारी प्यारी धरती। 2 व्याकुल जन्तु जीव सभी, हलाकान दिन रैन धूप चिलचिलाती बड़ी, करे बहुत बेचैन करे बहुत…

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