ऐसा क्यों ?
वन्दना को बहुत दिनों से नहीं देखा तो लगा शायद उसकी शादी हो गयी होगी ।अचानक ही व्हाट्सएप पर उसका नाम दिखा तो गरिमा से न रहा गया उसने मैसेज भेज ही दिया – “अरे वन्दना तू कैसी है ?कहाँ है ?” कुछ समय बाद वन्दना…
वन्दना को बहुत दिनों से नहीं देखा तो लगा शायद उसकी शादी हो गयी होगी ।अचानक ही व्हाट्सएप पर उसका नाम दिखा तो गरिमा से न रहा गया उसने मैसेज भेज ही दिया – “अरे वन्दना तू कैसी है ?कहाँ है ?” कुछ समय बाद वन्दना…
1 धरती सारी जल उठी, आसमान है मौन रहबर भी भटका हुआ, राह दिखाए कौन राह दिखाए कौन, पड़ा असमंजस भारी होते सब हैरान, परेशां दुनिया सारी देती सबको प्यार, हमारे दुर्गुण सहती यही मातृ रूपेण, हमारी प्यारी धरती। 2 व्याकुल जन्तु जीव सभी, हलाकान दिन रैन धूप चिलचिलाती बड़ी, करे बहुत बेचैन करे बहुत…
डिजिटल युग में लोकतांत्रिक असहमति का नया स्वर – डॉ. प्रियंका सौरभ भारतीय लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करने के तरीके समय के साथ बदलते रहे हैं। कभी स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान सत्याग्रह और धरने राजनीतिक प्रतिरोध के प्रमुख माध्यम थे, तो कभी साहित्य, रंगमंच और पत्रकारिता ने सत्ता से सवाल पूछने का कार्य किया। इक्कीसवीं…
संजय सक्सेना,लखनऊ,वरिष्ठ पत्रकारमो-9454105568, 8299050585 भारत की पवित्र भूमि सदैव संतों, साधुओं और महानायकों की धरोहर रही है। हर कोने में ऐसे पराक्रमी पुरुष और नारियां जन्म लेती रही हैं जिन्होंने देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराया। अंग्रेजी राज के विरुद्ध महात्मा गांधी, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद जैसे वीरों ने प्राणों की बाजी लगा…
क़्या पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट 2024 जिसे एंटी पेपर लीक कानून कहा जाने लगा निष्प्रभावी साबित हुआ? नीट-यूजी 2026 सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा पेपर लीक के कारण रद्द- छात्र और अभिभावक सदमे में कि आखिर वास्तविक मास्टरमाइंड कानून से कैसे बार-बार खिलवाड़ करते हैं और बच जाते हैं ? -एडवोकेट किशन…
पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी हमारे ऊपर जो विदेशी कर्ज बढ़ रहा है उसके लिए हमें विदेशी मुद्राओं को एक वर्ष तक संयमित खर्च करने की आवश्यकता है, इसके लिए अब जागने के बाद जब सोना ना खरीदने और पेट्रोल डीजल बचाकर अर्थात ज्यादा उपयोग ना करने का आह्वान हमारे देश…
रोजगार, प्रतिनिधित्व और व्यवस्था के प्रति बढ़ता अविश्वास युवाओं के भीतर ऐसी बेचैनी को जन्म दे रहा है, जो केवल आर्थिक संकट नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक विमर्श के बदलते स्वरूप का संकेत भी है। भारत इस समय विश्व की सबसे युवा आबादी वाले देशों में गिना जाता है। संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न जनसंख्या अध्ययनों के अनुसार…
संकट की घड़ी में जनप्रतिनिधियों का त्याग ही सच्ची राष्ट्रसेवा और लोकतांत्रिक नैतिकता की पहचान है। – डॉ. प्रियंका सौरभ संकट की इस घड़ी में जनप्रतिनिधियों का त्याग ही सच्ची राष्ट्रसेवा देश जब किसी बड़े संकट से गुजरता है, तब केवल सरकारों की नीतियाँ ही नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग का आचरण भी कसौटी…