कहानी : युक्ति -राजेन्द्र परदेसी
विभागाध्यक्ष के सम्मुख अजीब समस्या थी। दो खाली पदों के लिए पहले से ही ऊपर से दो नाम चयन हेतु उनके पास आ चुके थे। उधर वही ऊपर वाले आये दिन सार्वजनिक रूप से यही घोषणा करते कि किसी भी स्तर पर भाई-भतीजाबाद और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। हर कार्य में पारदर्शिता बरती…
