Special Article
सब निपट गए…… !
राजनीतिक सफरनामा सब निपट गए…… ! कुशलेन्द्र श्रीवास्तव चुनाव निपट गए मतलब सब कुछ निपट गया । नियमानुसार चुनाव भी में भी कुछ लोग निपट गए और कुछ लोग निपटते-नपटते रह गए । जो बच गया उसने गहरी सांस ली पर जो निपट गए वे कई दिनों तक तो घर से ही नहीं…
नाटिका : “मिच्छामी दुक्कडम”
पात्र परिचय_: 1_ नव्या एक स्कूल गर्ल।उम्र 17 वर्ष 2_ नीलू कॉलेज गर्ल उम्र 18 वर्ष 3_झलक कॉलेज बॉय उम्र 20 वर्ष 4_ मां उम्र 50 वर्ष 5 _पिता उम्र 54 वर्ष 6 _नाना जी (बूढ़े आदमी साधु यानी भिक्षु वेश में) उम्र 75 वर्ष 7_ नानी जी (बूढ़ी महिला साध्वी वेश में श्वेतांबरी सफेद…
क्यों संदिग्ध है अकादमी पुरस्कारों की वार्षिक गतिविधियां ?
पिछले दशकों में पुरस्कारों की बंदर बांट कथित साहित्यकारों, कलाकारों और अपने लोगों को प्रस्तुत करने के लिए विशेष साहित्यकार, पुरोधा कलाकार, साहित्य ऋषि जैसी कई श्रेणियां बनी है। जिसके तहत विभिन्न अकादमियां एक दूसरे के अध्यक्षों को पुरस्कृत कर रही है और निर्णायकों को भी सम्मान दिलवा रही है। इन पुरस्कारों में पारदर्शिता का…
व्यंग्य – थप्पड़ खाकर उबरे नेता, मानुष, चून…….
पंकज सी बी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर राजनीति में थप्पड़ खाना कभी कभी जरुरी हो जाता है। ये अलग बात है कि कभी थप्पड़ आप खुद आर्गेनाइज करवाते है और कभी कभी यह विपक्ष आर्गेनाइज करा के देता है या फिर कभी कभी देश के होनहार भगत सिंह टाइप के युवा सधे…
लाल बिहारी लाल पत्रकारिता के लिए सम्मानित
सोनू गुप्ता नई दिल्ली। हमारा मैट्रो हिन्दी दैनिक समाचार पत्र के साहित्य संपादक सह साहित्य टी.वी.के संपादक श्री लाल बिहारी लाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान एवं समाजिक सरोकार के लिए जैमिनी अकादमी ,पानीपत द्वारा हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर युगल किशोर शुक्ल स्मृति सम्मान-2024 से डिजीटल रुप से सम्मानित किया गया है।…
धूप में न निकला करो…… !
कुशलेन्द्र श्रीवास्तव बहुत तेज धूप है, सूरज तप रहा है और धरती जल रही है । गर्मी तो हर साल आती है और मई के महिने में धूप भी बहुत तेज होती है, पर इतनी तेज धूप नहीं रही अभी तक शायद ! ऐसा बोला जा सकता है । धूप तेज है तो एक…
लालच में मुर्गी का पेट चीरना बेमानी है और बेईमानी भी
30 मई, हिन्दी पत्रकारिता दिवस के बहाने 30 मई 2024 को भारतीय हिन्दी पत्रकारिता 198 वर्षों की हो गई। दो सौ साल होने में केवल दो साल शेष हैं, यह एक लंबा समय है। भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में अपना अलग महत्व रखने वाला समाचार-पत्र “उदन्त मार्तण्ड” हिन्दी का प्रथम समाचार पत्र, 30 मई 1826…
राम से बड़ा राम का नाम : लता गोयल
राम हिंदू संस्कृति का प्रतीकात्मक शब्द है। राम शब्द के उद्बोधन में ईश्वरत्व का आभास होता है। राम शब्द हमें उस अलौकिक शक्ति का एहसास कराता है जो इस पूरे ब्रह्मांड का रचयिता है, जिस शक्ति के आगे बड़े से बड़े ऋषि और बड़े से बड़े वैज्ञानिक भी नतमस्तक होते हैं। फिर प्रश्न यह है…
व्यंग्य : कार्यकर्ताओं को यह चुनाव चूना लगा गया..
पंकज कुमार मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी सांसद बनने का सपना देखने वालों के लिए उनके विश्वासपात्र ही अब सबसे बड़ी चुनौती बने है। अपने कार्यकर्ताओ को सक्रिय रखना मुश्किल हो गया है तमाम माल मलाई रबड़ी सब बड़का नेता और प्रतिनिधि चचा खाय रहें और कार्यकर्ता को फोकट में इधर उधर दौड़ाय…
तेरे दर पर आया हूॅ…… !
कुशलेन्द्र श्रीवास्तव ‘‘बाप रे इतने सारे नोट’’ आम आदमी के मुख से तो यह वाक्य निकल ही जाता है जब किसी के घर से नोटों की ढेर सारी गड्डियां बरामद होती हैं । चलो अच्छा है इस बहाने आम आदमी नोटों को भी देख लेता है और नोटों की गड्डियों को भी वरना अब तो…
