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लाल बिहारी लाल पत्रकारिता के लिए सम्मानित

सोनू गुप्ता नई दिल्ली। हमारा मैट्रो हिन्दी दैनिक समाचार पत्र के साहित्य संपादक सह साहित्य टी.वी.के संपादक  श्री लाल बिहारी लाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान एवं समाजिक सरोकार के लिए जैमिनी अकादमी ,पानीपत द्वारा हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर युगल किशोर शुक्ल  स्मृति  सम्मान-2024 से डिजीटल रुप से सम्मानित किया गया है।…

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धूप में न निकला करो…… !

                                                                                                   कुशलेन्द्र श्रीवास्तव बहुत तेज धूप है, सूरज तप रहा है और धरती जल रही है । गर्मी तो हर साल आती है और मई के महिने में धूप भी बहुत तेज होती है, पर इतनी तेज धूप नहीं रही अभी तक शायद ! ऐसा बोला जा सकता है । धूप तेज है तो एक…

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लालच में मुर्गी का पेट चीरना बेमानी है और बेईमानी भी

30 मई, हिन्दी पत्रकारिता दिवस के बहाने 30 मई 2024 को भारतीय हिन्दी पत्रकारिता 198 वर्षों की हो गई। दो सौ साल होने में केवल दो साल शेष हैं, यह एक लंबा समय है। भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में अपना अलग महत्व रखने वाला समाचार-पत्र “उदन्त मार्तण्ड” हिन्दी का प्रथम समाचार पत्र, 30 मई 1826…

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राम से बड़ा राम का नाम : लता गोयल

राम हिंदू संस्कृति का प्रतीकात्मक शब्द है। राम शब्द के उद्बोधन में ईश्वरत्व का आभास होता है। राम शब्द हमें उस अलौकिक शक्ति का एहसास कराता है जो इस पूरे ब्रह्मांड का रचयिता है, जिस शक्ति के आगे बड़े से बड़े ऋषि और बड़े से बड़े वैज्ञानिक भी नतमस्तक होते हैं। फिर प्रश्न यह है…

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व्यंग्य : कार्यकर्ताओं को यह चुनाव चूना लगा गया..

 पंकज कुमार मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी  सांसद बनने का सपना देखने वालों के लिए उनके विश्वासपात्र ही अब सबसे बड़ी चुनौती बने है। अपने  कार्यकर्ताओ को सक्रिय रखना मुश्किल हो गया है तमाम माल मलाई रबड़ी सब बड़का नेता और प्रतिनिधि चचा खाय रहें और कार्यकर्ता को फोकट में इधर उधर दौड़ाय…

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तेरे दर पर आया हूॅ…… !

कुशलेन्द्र श्रीवास्तव ‘‘बाप रे इतने सारे नोट’’ आम आदमी के मुख से तो यह वाक्य निकल ही जाता है जब किसी के घर से नोटों की ढेर सारी गड्डियां बरामद होती हैं । चलो अच्छा है इस बहाने आम आदमी नोटों को भी देख लेता है और नोटों की गड्डियों को भी वरना अब तो…

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लड़कों के साथ बेड टच

मम्मी में स्कूल नहीं जाऊंगा, स्कूल नहीं जाऊंगा। छोटा सा बच्चा माधव नींद में चिल्ला रहा था। माधव की मम्मी नेहा को बड़ी विचित्र लगी उसकी यह हरकत। ऐसा तो पहले माधव ने कभी नहीं किया नींद में। माधव तो 5 साल से लगातार स्कूल जा रहा है। पढ़ने में भी खूब अच्छा है। कभी…

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अभ्युत्थानम्  धर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्…..

पंकज कुमार मिश्रा, मिडिया विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी  महाभारत के बाद युधिष्ठिर आश्चर्य में डूब गए। धीमे स्वर में माधव से कहा – यह महाभारत क्यों हुआ ? जबकि वह स्वयं जानते थे कि श्री कृष्ण नहीं होते तो पाण्डु पुत्र भिखारी होते, जैसे 1985 से पहले कश्मीर में पंडित और 2014 से पहले…

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नृत्य केवल मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह भावनाओं को व्यक्त करने की एक कला है

नृत्य एक कला है जो न केवल हमें शारीरिक रूप से सक्रिय रखने में मदद करती है बल्कि शब्दों का उपयोग किए बिना खुद को अभिव्यक्त करने में भी मदद करती है। कई भारतीय शास्त्रीय और लोक नृत्य रूप संस्कृति, समाज, पौराणिक कथाओं और परंपराओं के बारे में संदेश फैलाने का एक लोकप्रिय माध्यम बने…

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प्राचीन ऋषि मुनियों के नाम को कुलषित होने से बचाया जाए

भ्रामक विज्ञापन के सिलसिला में माननीय सुप्रीम कोर्ट बाबा राम देव और उनके सहयोगी बालकृष्ण के प्रति कई बार नाराजगी प्रकट कर चुका है। 22 अप्रैल की सुनवाई में उसने  इंडियन मेडिकल एसोसिएशन यानी आईएमए को भी आड़े हाथों लिया उसने पूछा गया कि आखिर एलोपैथ चिकित्सक गैर जरूरी एवं महंगी दवाइयां लिखने के साथ…

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