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मानवता और भारतीय संस्कृति

लक्ष्य करने की बात है कि  संघर्ष के इस युग मे जब संघर्ष का कोई बौद्धिक कारण नहीं मिलता तो यही समझ में आता है किहिंसक और कुछ हद तक अहिंसक संघर्ष भी क्रोध स्वार्थऔर संकुचित मानस की उपज है । आध्यात्मिक गुरुओं और जीवनदिशा निर्देशक महापुरुषों ने स्पष्ट करना चाहा है कि जीवन में…

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सबको सन्मती दे भगवान : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

गैस की हाहाकार सच्ची में या केवल अफवाह ? अब इस प्रश्न का उत्तर खोजा जा रहा है । जिनको खोजना है वे खोज ही रहे हैं पर आम व्यक्ति परेशान है । रसोई गैस अब आम इंसान के लिए हवा-पानी की भांति ही जरूरी हो चुकी है । रोटी खाना है तो पकाओगे काहे…

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सपने और संघर्ष

डॉ विजय गर्ग  मनुष्य के जीवन में सपनों का बहुत महत्व होता है। सपने हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं और जीवन को एक दिशा प्रदान करते हैं। लेकिन केवल सपने देखना ही पर्याप्त नहीं होता; उन्हें साकार करने के लिए संघर्ष, मेहनत और धैर्य की आवश्यकता होती है। वास्तव में, सपने और संघर्ष…

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बुजुर्गों की उपेक्षा और सुरक्षा का सवाल

डॉ विजय गर्ग  समाज की सभ्यता और संवेदनशीलता का सबसे सटीक पैमाना यह है कि वह अपने बुजुर्गों के साथ कैसा व्यवहार करता है। जिन्होंने जीवन भर परिवार, समाज और राष्ट्र के निर्माण में योगदान दिया, वही लोग आज अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर उपेक्षा, अकेलेपन और असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। बदलती…

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क्लिक के दलदल में फँसा समाज: गालियों से ग्रोथ, शोर से शोहरत

(जहाँ सच सन्नाटा है, तमाशा उत्सव है — क्लिक की संस्कृति में खोता हुआ समाज और डिजिटल मंच पर किनारे पड़ा विवेक) डॉ. सत्यवान सौरभ डिजिटल दुनिया कभी ज्ञान, संवाद और रचनात्मकता की प्रयोगशाला मानी जाती थी। यह विश्वास था कि इंटरनेट लोकतंत्र को मज़बूत करेगा, हाशिये पर खड़े लोगों को आवाज़ देगा और असली…

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विदेश भेजने की होड़ और बदलती मानसिकता

( क्या सचमुच भारत में अवसर कम हैं या हम एक भ्रम में जी रहे हैं?)  – डॉ. प्रियंका सौरभ पिछले कुछ वर्षों में भारतीय समाज में एक नई प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है—बेटे-बेटियों को विदेश भेजने की होड़। कभी पढ़ाई के नाम पर, कभी नौकरी के नाम पर, तो कभी बेहतर जीवन के सपने…

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रंग जो दिलों तक उतर जाएँ.. 

(होली दिलों को जोड़ने और दूरी को मिटाने का सबसे रंगीन मौका) – डॉ. प्रियंका सौरभ भारत की सांस्कृतिक परंपरा में होली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और मानवीय संबंधों का जीवंत उत्सव है। यह वह अवसर है जब रंगों के बहाने मन के भीतर जमी धूल को झाड़ने, रिश्तों में आई दरारों…

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विवाह के बदलते रूप  : डॉ. विजय गर्ग 

माज में समय के साथ कई रीति-रिवाजों और परंपराओं में बदलाव आते रहते हैं। विवाह भी एक ऐसा संस्कार है जो न केवल दो व्यक्तियों को जोड़ता है, बल्कि दो परिवारों और सामाजिक संबंधों को भी जोड़ता है। लेकिन आधुनिक युग में विवाह का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पुराने समय की शादी पहले…

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होली में सुरक्षा और सावधानी जरूरी

समुद्र में डूबने से उतने लोगों की मौत नहीं हुई, जीतने की नशा में डूब कर मर गए होली का संदेश : एकता और प्यार होली भारत का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो रंगों, प्यार और खुशी का प्रतीक है। यह त्योहार हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो आमतौर पर मार्च…

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