Special Article
यूजीसी के कानून के खिलाफ एकजुटता
राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तवएक ओर बड़ी दुर्घटना ने एक राजनीतिक की जान ले ली । हम जितने यांत्रिक होते जा रहे हैं उतना ही हमारा जीवन असुरक्षित होता जा रहा है । हमने ऐसे ही हादसे में सीडीएस विपिन रावत को भी खोया था और पूर्व मुख्यमंत्री रेड्डी को भी । हादसा अब हमें…
महात्मा गांधी और भारत की साझा राष्ट्रीय चेतना का विचार : मनजीत सिंह
महात्मा गांधी मूलतः एक जननेता थे—ऐसे नेता, जिन्होंने लोकतांत्रिक और क्रांतिकारी राजनीति को अमल में उतारकर दिखाया। उनका राजनीतिक जीवन किसी एक विचारधारा या सीमित दायरे में क़ैद नहीं था, बल्कि उसमें समग्रता, परस्पर-संबद्धता और रणनीतिक सूझ-बूझ साफ़ दिखाई देती है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस उनके लिए केवल एक राजनीतिक संस्था नहीं, बल्कि क़ौम और वतन…
परीक्षा से आगे सोचना होगा: शिक्षा का असली मकसद – डॉ विजय गर्ग
आज के दौर में ‘शिक्षा’ और ‘परीक्षा’ एक-दूसरे के पर्याय बन गए हैं। जैसे ही बच्चा स्कूल में कदम रखता है, उसके सीखने की यात्रा अंकों और ग्रेड्स की दौड़ में बदल जाती है। लेकिन क्या जीवन की सफलता केवल उत्तर पुस्तिकाओं में लिखे गए शब्दों तक सीमित है? समय आ गया है कि…
आशा-आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का स्वैच्छिक योगदान
-डॉ. प्रियंका सौरभ क्या राष्ट्र के स्वास्थ्य की देखभाल करने वाली इन महिलाओं को श्रमिक का दर्जा नहीं दिया जाएगा? आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की ज़रूरतें असाधारण नहीं हैं; उन्हें न्यूनतम वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी, तृतीय श्रेणी कर्मचारी का दर्जा और सामाजिक सुरक्षा प्राप्त है। फिर भी, सरकारें उन्हें औपचारिक श्रम अधिकारों से वंचित रखती हैं…
कहानी : रिश्तों की जड़ें
परिवार बड़ा था, घर पुश्तैनी और उसमें ज़िम्मेदारियाँ सबसे भारी। इसी भार को अपने कंधों पर उठाकर संजय ने एक दिन वह निर्णय लिया, जिसने उसके पूरे जीवन की दिशा बदल दी। पुश्तैनी दुकान, बूढ़ी माँ, पत्नी और दो छोटे बच्चे, सबको पीछे छोड़कर वह विदेश चला गया। परदेश उसका सपना नहीं था, मजबूरी थी।…
भारतीय राजनीति में आज भी प्रासांगिक एव अद्वीतीय है महात्मा गांधी (पुण्य तिथि-30 जनवरी पर विशेष)
लाल बिहारी लाल भारत में सत्ता दिल्ली सलतनत से मुगल साम्राज्य फिर मुगल से जब सत्ता अंग्रैजो के हाथ में गई तो पहले अंग्रैजों का व्यापारिक उदेश्य था पर धीरे-धीरे उनका राजनैतिक रुप भी समने नजर आने लगा। और वे अपने इस कुटिल चाल में कामयाब भी हो गये । धीरे –धीरे उनके क्रिया-कलापों के…
शीर्षक-लघु व्यंग झूले के संग
कुछ दिन पहले तीज पार्टी में एक एक सखी ने स्टिकर डाला था जिसमें झूला झूलते हुए आनंद लेते हुए मुझे वह दिन याद आ गए बचपन के दिन जब मैं स्कूल में झूला पंगे डाल डाल कर झूलती थी । हमारा स्कूल में एक झूला विशालकाय था जिसमें तीन तीन झूले थे .लंच के…
क्या नए वर्ष 2026 की तश्वीर से साफ हो पायेगी 2025 की धूल..!
पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी बीते वर्ष 2025 में कई चीजे रही जो भूलने के बाद भी याद आती रहेंगी जिनमें कुछ सामाजिक और राजनैतिक अवसाद और संवैधानिक अपवाद रहें। बिहार चुनाव में विपक्ष की हार हो या सोने चांदी के कीमतों की मार ! स्मृति मंधना की शादी टूटने की…
जीवन का सुख़ बुजुर्गों के श्रीचरणों में
बूढ़े बुजुर्गों, माता-पिता की सेवा तुल्य कोई पुण्य नहीं-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र गोंदिया – भारत आदि-अनादि काल से ही संस्कारों की खान रहा है। यहां की मिट्टी में ही गॉड गिफ्टेड संस्कारों की ऐसी अदृश्य शक्ति समाई हुई है कि मानव जन्म से ही संस्कारों की प्रतिभा मानवीय जीवों में समाहित हो जाती…
भाजपा का चमत्कार : सांसद को प्रदेश अध्यक्ष और विधायक को बनाया राष्ट्रीय अध्यक्ष
पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार, केराकत, जौनपुर यूपी जातिगत दबाव कहें, समीकरण कहें, पीडीए का डर कहें या रणनीति कहें पर यह भाजपा का थिंक टैंक और भाजपा की राजनीती जो ब्राह्मण – ठाकुरों की राजनीति से चलती रही है आज दो पिछड़े नेताओं की 2014 के बाद से सत्ता पर काबिज होने…
