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हे प्रभु बैठी हूं फिर से लिखने

हे प्रभु बैठी हूं फिर से लिखने और पूछती हूं आपसे एक सवाल क्या यह अंत है या मचा हुआ है कोई और बवाल क्या इंसान अपनी करनी पर पछताएगा या बिना पश्चाताप किए ही मर जाएगा क्या कुछ ऐसा है जिसे आप बता रहे हो या फिर बिना कुछ कहे ही दुनिया को डरा…

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डरना नही

  मुसीबतें तो  आएगी   पर फिसलना तुम नहीं।   जिन्दगी तो ये सतायेगी   मगर तुम डरना  नहीं।  बड़े बड़े चले आते यहां  कष्टों केभी पहाड़ कभी।  दोस्ती को भुला कर के  साधते हैं दुश्मनी सभी।  लेता है जीवन परीक्षाएं   कभी तो बड़ी से बड़ी।  जूझते रह जाते उनसे  अड़चनें जो आन पड़ीं।  जिन्दगी…

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स्वयं को पहचान लो

 कुछ ठान लो अपने मन में,                 आ स्वयं को पहचान लो।  भीड़ भरी इस दुनिया में,             तुम भीड़ नहीं हो जान लो।  चलो प्रकृति की गोद में,             फिर खुशियों की कुटी छवायें।  वादियों के आँगन में,     …

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आश्चर्य (लघुकथा)

आज सुबह जितेश का फ़ोन आया; हिमांशु ने फ़ोन रिसीव किया बोला: हेल्लो, क्या हालचाल जितेश, कैसे हो ?जितेश बोला; क्या भाई तबियत खराब है ?”भाई जितेश तुम अब बार-बार बिमार कैसे हो जाते हो ?” हिमांशु ने पूछा ! “भाई याद है मुझे आज भी वह दिन जब मै बच्चा था,और गाँव में रहता था…

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अधूरे ख़्वाब

अधूरे ख़्वाब की ताबीर हूँ मैं कहीं ख़यालों की तेरे तस्वीर हूँ मैं कहीं।। लम्हा-लम्हा तू साथ रहता मेरे। तेरे जीवन की जागीर हूँ मैं कहीं।। हो मुक़म्मल मेरी भी हस्ती कभी। रंग लाती मुहब्बत की तासीर हूँ मैं कहीं।। जर्रे-जर्रे में तेरा अक्स दिखता मुझे। रहगुज़र की तेरे तक़दीर हूँ मैं कहीं।। चलती रहती…

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प्रधानमंत्री जी की मुरीद सारी दुनिया है

प्रधान मंत्री जी का मुरीद सारी दुनिया है,एक-एक इंसान  उनको नमन कर रहा है.जो लोग विश्व-हित में शुभ-कार्य करते हैं,इतिहास उनको  युगों तक याद रखता है. ‘कोरोना’ के जाल मेंआज फंसा है संसार,उससे उबर जाना अब बहुत ही जरूरी है.अन्यथा प्रगति की  गति ही रूक जायेगी,विकास से सबकी तकदीर जुड़ी रहती है. संकट की घड़ी…

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कोरोना

फोकट में काहे का रोना। बड़ा नही है ये बगरौना।। अगर प्यार परिवार से है तो घर के बाहर पांव धरो ना।। नाक आँख मुंह टच मत करना। बार-बार हाथों को धोना।। देखो लॉकडाउन ना टूटे। जबरन घूमो, व्यर्थ मरो ना।। सामाजिक डिस्टेन्स बनाओ। बीच में आकर यार धसो ना।। बाहर जाओ मास्क लगाओ। भीड़भाड़…

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💐 जिन्दगी-अनबूझ पहेली 💐

जिन्दगी इतनी सरल तो कभी भी नहीं थी,कठिनया ऋजु भी रही।लोगों के लिये तो यह ऐसी पहेली जिसको सब ने अपने अपने ढंग से हल करना चाहा,पर वो बिना हल हुएफिसलती रही,मचलती रही।जिन्दगी के अर्थ कोजिसने भी सिर्फ अर्थ में ही ढूंढना चाहा,उसकी जिन्दगी अर्थहीन हो कररह गई।जिन्दगी के अर्थ का वास्तविक मज़ा तोसन्तुष्टि में…

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तन

मत कर तन का घमंडये तन तो नश्वर हैहंसखेल कर पूरी करले जीवन यात्राइस तन को एक दिन मिट्टी में मिल जाना है | मत भटक दर-दरमिलना और बिछुड़नासृष्टि का यही नियम है | आत्मा सुखमय तो सारा जग सुखमयसुख-दु:ख दिन रात का खेलसुख बाहर नहीं,छिपा बैठा है स्वयं के ही भीतर | इच्छाओं को…

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