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आतंकवाद के जड़मूल नाश से पूर्व यह’ ऑपरेशन सिन्दूर’ रुकेगा नहीं : मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (संपादक)

22 अप्रैल को हुआ पहलगाम (जम्मू कश्मीर में) हमला जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। उन परिवारों को या कहें पूरे देशवासियों को कभी न भरने वाला जख्म दे दिया जो जीवन भर दर्द का अहसास कराता रहेगा किन्तु उन परिवारों के साथ पूरे देश की जनता की आवाज एक सुर में उठने…

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पत्रकारिता : चुनौती एवं भविष्य : विजय गर्ग

हिंदी पत्रकारिता दिवस के मौके पर यदि सामाजिक सरोकार रखने वाली निष्पक्ष पत्रकारिता तथा पीत पत्रकारिता के बारे में बात न हो,तो हिंदी पत्रकारिता दिवस की महत्वत्ता का आंकलन नही किया जा सकता। वर्तमान परिदृश्य में पीत पत्रकारिता की प्रबलता और स्वार्थसाधनी राजनीति निजी महत्वकांक्षा के चलते पत्रकारिता मिशन न रहकर व्यवसाय बन चुका है।…

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भारतीय शौर्य के आगे झुका पाकिस्तान, पीओके वापिस देने का बढ़ा दबाव …! पंकज सीबी मिश्रा 

पंकज सीबी मिश्रा  / पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक जौनपुर यूपी भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ आतंक के विरुद्ध जारी युद्ध को फिलहाल अमरीकी हस्तक्षेप के बाद अस्थाई तौर पर रोक दिया है। भारतीय सोशल मीडिया पर भारत के लोगो का गुस्सा स्पष्ट देखा जा सकता है । भारत ने केवल तीन दिन में पाकिस्तान…

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कब तक बचोगो पाकिस्तान……: कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

                                                                                                                 राजनीतिक सफरनामा बच गया पाकिस्तान, लगता है उसकी किस्तम ही अच्छी थी, वरना अब तक तो वहां तिरंगा लहरा रहा होता । हम तो पूरी तरह तैयार भी थे आम लोगों ने भी मानसिकता बना ली थी कि रोज-रोज की झंझट से अच्छा है कि एक बार में ही निपटा लो । हम भारतवासी…

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हिंसा की दीमक के खिलाफ लड़ना ही हमारा मूल उद्देश्य होना चाहिए

कश्मीर और हिमालय हैं भारत के अभिन्न अंग कश्मीर जाना भारत के किसी भी अन्य राज्य अथवा  शहर की तुलना में जाने से बहुत अलग तरह का अनुभव है। पर्यटकों और उनके कश्मीरी मेजबानों के बीच एक गहरा रिश्ता है और उनके बीच एक गंभीर अंतर भी होता है। पर्यटकों का स्वागत करते हुए, घाटी…

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मजदूर दिवस: एक दिन सम्मान, साल भर अपमान

मजदूर दिवस: एक दिन सम्मान, साल भर अपमान मजदूर दिवस केवल एक तारीख नहीं, श्रमिकों की मेहनत, संघर्ष और हक की पहचान है। 1 मई को मनाया जाने वाला यह दिन उस आंदोलन की याद है जिसने काम के सीमित घंटे, सम्मानजनक वेतन और श्रम अधिकारों की लड़ाई लड़ी। लेकिन भारत जैसे देशों में मजदूर…

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“पहलगाम में आतंकी हमला: राष्ट्र के साथ खड़े होने का समय”

“पहलगाम में आतंकी हमला: राष्ट्र के साथ खड़े होने का समय” प्रश्न पूछने के अवसर भी आएँगे, अभी राष्ट्र के साथ खड़े होने का समय है। राष्ट्र सर्वोपरि। हाल की पहलगाम घटना में एक हिंदू पर्यटक को आतंकवादियों ने धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया। यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि भारत की…

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नेताओं की देशभक्ति की अग्निपरीक्षा, सेना में बेटा भेजो, पेंशन लो!”

भारत में एक बार विधायक या सांसद बन जाना आजीवन पेंशन की गारंटी बन चुका है, चाहे उनका संसदीय रिकॉर्ड शून्य क्यों न हो। वहीं, सीमाओं पर तैनात सैनिक हर रोज़ जान जोखिम में डालते हैं, लेकिन उनके परिवारों को न्यूनतम सुविधाएं भी संघर्ष से मिलती हैं। सवाल उठता है – क्या नेताओं की देशभक्ति…

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अक्षय तृतीया: समृद्धि, पुण्य और शुभारंभ का पर्व

अक्षय तृतीया, जिसे ‘आखा तीज’ भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला एक अत्यंत पावन पर्व है। ‘अक्षय’ का अर्थ होता है—जो कभी क्षय (नाश) न हो। यही कारण है कि यह दिन शुभ कार्यों, दान-पुण्य, निवेश और नए आरंभ के लिए…

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मनुवाद से मानवता तक : हमारे शौर्य पर किसका जोर..!

पंकज सीबी मिश्रा  / पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक जौनपुर यूपी पहले परशुराम फिर संत तुलसीदास , महान चाणक्य , स्वतंत्रता के समय मंगल पांडेय , बलिदान के समय वीर चंद्रशेखर आजाद और अब राजनीति में कई ब्राह्मण जिन्होंने मनुवाद के अलख को शीर्ष तक पहुंचाया । सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ ऐसे कई विभूतियों ने…

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