Special Article
अधिकारों की अहवेलना कितना जायज !
______ आपने चुनावों के वक्त देखा होगा कि बातों और वादों का मश्रफ क्या होता है ! चुनाव आने से पहले और चुनाव बीत जाने के छ माह बाद दो आपसी आभासी मित्र फेसबुक पर वैचारिक मतभेद प्रकट करते दिख जाते है ,यहां तक कि गाली गलौज भी कर लेते है और तो और आपसी…
हिमालय देवभूमि को सुरक्षित रखना समय की जरूरत है।
(उत्तराखंड हिमालय देवभूमि के रूप में उभरा है और यह हिंदू तीर्थयात्रा के केंद्र विकसित हुआ है मगर प्राकृतिक आपदाएं इसको विनाशक बना रही है. पिछले एक दशक में हाल की पारिस्थितिक नाजुकताओं को देखते हुए, लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ धरोहर स्थलों को सुरक्षित रखने के लिए दीर्घकालिक संकट प्रतिक्रिया तंत्र और समाधान करना…
माया मिली ना राम, बन गए आंदोलनजीवी !
खद्दर डाल कर ,दरी बिछाकर बिसलेरी का जल पीने वाले देश के परजीवियों को प्रधानमंत्री जी ने आंदोलन जीवी कह दिया । अखिलेश यादव भी खुद को रोक नहीं पाए और खुद को लपेटे में लेकर भाजपा को चन्दा जीवी कह दिया । आप के भगवंत मान ने तो टूल्ल होकर रक्तजीवी कह दिया और…
दरिया ए इश्क-इब़ादत की मुश्क
कविता मल्होत्रा प्रेम है दरिया आग का,उल्टी है इसकी धार जो उतरा सो डूब गया,जो डूब गया वो पार ✍️ अपनी दृष्टि को विस्तार देकर ही सृष्टि के आधार को समझना सँभव है, वर्ना दृष्टिकोण के अभाव में तो शिक्षित लोग भी अशिक्षितों जैसा व्यवहार करने लगते हैं। ✍️ जैसे तुम सबके वैसे ही मैं…
प्रकृति संरक्षण हम सबकी जिम्मेदारी है : मनमोहन शर्मा ‘शरण’
(सम्पादकीय) आप सभी को बसन्त पंचमी की हार्दिक बधाई एवं ज्ञान की देवी माँ सरस्वती का आशीर्वाद आपको प्राप्त हो, ऐसी मेरी मंगलकामना है । मौसम बदला, मौसम का मिजाज बदला, अब पतझड़ समाप्त और पौषे खिलखिलाने लगेंगे, सर्दी की ठिठुरन अब समाप्त सी हो गई है । मनुष्य अपने अड़ियल रवैये से बदलने…
मीडिया और महिला
इस तथ्य से कोई इनकार नहीं करता है कि भारतीय प्रेस में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति पिछले एक दशक में पहले से कहीं अधिक स्पष्ट हो गई है। उन्हें हर जगह स्पॉट किया जाता है – जहां भी समाचार उत्पन्न होता है, समाचार डेस्क को संभालना, संस्करणों की निगरानी करना और न्यूज़रूम में चारों ओर…
मुखर राजनीति के महानायकों के लायक नहीं माहौल !
बिहार राजनीति में उठापटक ,बीते दस तारीख की देर रात्रि तब समाप्त हो गया जब बिहार विधानसभा चुनाव के सभी दो सौ तैतालिस सीटों के परिणाम जारी कर दिए गए । भाजपा, जदयू ,हम और वी आई पी की संयुक्त गठबंधन वाली एन डी ए ने एक सौ पच्चीस सीटों पर कब्ज़ा करके बिहार विधानसभा…
आती रहेंगी बहारें : कविता मल्होत्रा
किसी की वेदना है घर से पीछा छुड़ाने की किसी की व्यथा है अपने घर लौट जाने की ✍️ बीते साल ने कितना कुछ गँवा दिया ये एक नकारात्मक सोच है।बीते हुए लम्हों ने कितना कुछ सिखा दिया ये एक सकारात्मक सोच है। कोरोना-काल में कितने ही लोगों के रोज़गार छिन गए, कितने ही लोग…
वो जीत जो जीत सी ना लगे, वो हार जो हार सी न लगे
सम्पादकीय : मनमोहन शर्मा ‘शरण ‘ हमारे भारत की सुन्दरता–भव्यता यहां के त्यौहारों में देखते ही बनती है । हालांकि 2020 वर्ष कोरोना काल की भेंट चढ़ गया । जनता ने अपना दृष्टिकोण भी सूक्ष्म कर लिया है और आज में जीना प्रारंभ कर दिया जिसमें आवश्यकता की, रोजमर्रा की चीजें और स्वास्थ्य ठीक है,…
कानून के साथ लिंग संवेदीकरण महिलाओं के लिए अच्छा साबित हो सकता है
लैंगिक भेदभाव का मूल कारण भारतीय समाज में प्रचलित पितृसत्तात्मक मन है. हालांकि अब ये शहरीकरण और शिक्षा के साथ बदल रहा है, फिर भी एक के लिए लंबा रास्ता तय करना है. सामाजिक कंडीशनिंग और कठोर लिंग निर्माणों की घटनाओं के कारण असमान संतुलन बना हुआ है) —-प्रियंका सौरभ रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,…
