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सुधार : सरकारी स्कूलों के बच्चों को ही सरकारी नौकरी में लाइये…..!

पंकज सीबी मिश्रा  / राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी यह सितंबर माह शिक्षक दिवस के लिए जाना जाता है। किन्तु वर्तमान शिक्षा व्यवस्था का जो हाल है वह बेहद दयनीय और चिंताजनक है। पहले तो उन सभी शिक्षकों के प्रति आभार प्रकट करता हूँ जो आज भी स्वयं सरकारी मास्टर है, अस्सी हजार के…

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सोशल मीडिया के संबंध में  सर्वोच्च न्यायालय का आदेश

ये सवाल अक्सर मन में आता है कि 21 वीं सदी में सोशल मीडिया पर जो कंटेंट की बाढ़-सी आई हुई है, उस कंटेंट को विनियमित करने के सुप्रीम कोर्ट के कदम का अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर क्या असर होगा? अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन रोकने के लिए दिशानिर्देश कौन बनाएगा? इस विषय में संविधान…

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वोटर अधिकार यात्रा से गरमाई बिहार की राजनीति

राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव बिहार के चुनाव भले ही अभी घोषित नहीं किए गए हें पर बिहार में माहौल चुनावी रंग में ढल चुका है । चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट संशोधन से जागी राजनीतिक पार्टियां अब इसके सहारे ही वैतरणी पार करने की मानसिकता बना चुकी हैं । वैसे तो चुनाव आयोग के…

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श्रीगणेश

           कुन्दन अपने माँ बाप का इकलौता बेटा था । दुबला पतला साँवला सा पर नाक -नक्श सुन्दर था ।उसका मन हमेशा खेल में ही लगा रहता पढ़ाई तो उसे बोझ ही लगती थी । हमेशा अपने पिता से डाँट खाता रहता था पर उसमें जरा भी सुधार नहीं हुआ ।आखिर किसी तरह खींच खाँचकर…

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चीनी, मजबूरी या जरूरी

देश-दुनिया में जिस हिसाब से मधुमेह (शुगर) के रोगियों की तादात बढ़ती जा रही है, उसने यह सोचने के लिए विवश कर दिया है कि चीनी मजबूरी है या जरूरी है। यह तो बात हुई एक खाद्य पदार्थ की और दूसरा मसला है पड़ोसी देश चीन का, उसके उत्पादों और आदमदियों को भी हम चीनी…

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हालात की सौग़ात : आरती परीख

बिमल खिड़की के पास बैठा बाहर झाँक रहा था। हवा धीरे-धीरे परदों से खेल रही थी। आसमान पर बिखरे बादल धूप को ढक रहे थे, जैसे कोई अनकही चुप्पी घर पर फैल गई हो। लेकिन बिमल का मन इस चुप्पी से ज़्यादा भारी था— कल रात से भीतर उमड़ा तूफ़ान अब भी थमा नहीं था।…

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रजिस्टर्ड पोस्ट का अंत : भरोसे की वह मुहर अब नहीं रहेगी

विजय गर्ग डाकिए की साइकिल की घंटी, थैले से झाँकते पत्रों की उत्सुक प्रतीक्षा, और रजिस्टर्ड डाक की पावती पर हस्ताक्षर का रोमांच – ये पल भारतीयों के दिलों में एक युग की तरह अमर हैं। लेकिन अब यह युग समाप्त होने जा रहा है। भारतीय डाक विभाग ने 1 सितंबर, 2025 से अपनी 50…

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स्वतंत्रता का अधूरा आलाप

आज़ादी केवल तिथि नहीं, एक निरंतर संघर्ष है। यह सिर्फ़ झंडा फहराने का अधिकार नहीं, बल्कि हर नागरिक को समान अवसर और सम्मान देने की जिम्मेदारी है। जब तक यह जिम्मेदारी पूरी नहीं होती, हमारी स्वतंत्रता अधूरी है।” — डॉ. प्रियंका सौरभ 15 अगस्त 1947 को हमने विदेशी शासन की बेड़ियों को तोड़ दिया था।…

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प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः…..

पंकज सीबी मिश्रा  / राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी सदाचारी जीवन की समग्रता ही श्री कृष्ण है। इसलिए हमारे शास्त्रों ने भगवान श्री कृष्ण को सोलह कलाओं से परिपूर्ण बताया। श्री कृष्ण होना जितना कठिन है श्री कृष्ण को समझना उससे भी कहीं अधिक कठिन है। भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था,…

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जन-गण-मन अधिनायक….. : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

राजनीतिक सफरनामा आइये हम अपनी स्वतंत्रता की एक और वर्षगांठ गर्वोन्मुख मस्तक के साथ मनाएं । हमारा राष्ट, हमारा ध्वज और हमारा राष्टगान हमारी धरोहर है और हर भारतीय इस पर गर्व करता है । ‘‘जनगण मन अधिनायक’’ की मधुर स्वरलहरियां हमारे तन और मन में जोश भर रहीं हैं । हम नतमस्तक हैं अपने…

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