Special Article
आशा-आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का स्वैच्छिक योगदान
-डॉ. प्रियंका सौरभ क्या राष्ट्र के स्वास्थ्य की देखभाल करने वाली इन महिलाओं को श्रमिक का दर्जा नहीं दिया जाएगा? आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की ज़रूरतें असाधारण नहीं हैं; उन्हें न्यूनतम वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी, तृतीय श्रेणी कर्मचारी का दर्जा और सामाजिक सुरक्षा प्राप्त है। फिर भी, सरकारें उन्हें औपचारिक श्रम अधिकारों से वंचित रखती हैं…
कहानी : रिश्तों की जड़ें
परिवार बड़ा था, घर पुश्तैनी और उसमें ज़िम्मेदारियाँ सबसे भारी। इसी भार को अपने कंधों पर उठाकर संजय ने एक दिन वह निर्णय लिया, जिसने उसके पूरे जीवन की दिशा बदल दी। पुश्तैनी दुकान, बूढ़ी माँ, पत्नी और दो छोटे बच्चे, सबको पीछे छोड़कर वह विदेश चला गया। परदेश उसका सपना नहीं था, मजबूरी थी।…
भारतीय राजनीति में आज भी प्रासांगिक एव अद्वीतीय है महात्मा गांधी (पुण्य तिथि-30 जनवरी पर विशेष)
लाल बिहारी लाल भारत में सत्ता दिल्ली सलतनत से मुगल साम्राज्य फिर मुगल से जब सत्ता अंग्रैजो के हाथ में गई तो पहले अंग्रैजों का व्यापारिक उदेश्य था पर धीरे-धीरे उनका राजनैतिक रुप भी समने नजर आने लगा। और वे अपने इस कुटिल चाल में कामयाब भी हो गये । धीरे –धीरे उनके क्रिया-कलापों के…
शीर्षक-लघु व्यंग झूले के संग
कुछ दिन पहले तीज पार्टी में एक एक सखी ने स्टिकर डाला था जिसमें झूला झूलते हुए आनंद लेते हुए मुझे वह दिन याद आ गए बचपन के दिन जब मैं स्कूल में झूला पंगे डाल डाल कर झूलती थी । हमारा स्कूल में एक झूला विशालकाय था जिसमें तीन तीन झूले थे .लंच के…
क्या नए वर्ष 2026 की तश्वीर से साफ हो पायेगी 2025 की धूल..!
पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी बीते वर्ष 2025 में कई चीजे रही जो भूलने के बाद भी याद आती रहेंगी जिनमें कुछ सामाजिक और राजनैतिक अवसाद और संवैधानिक अपवाद रहें। बिहार चुनाव में विपक्ष की हार हो या सोने चांदी के कीमतों की मार ! स्मृति मंधना की शादी टूटने की…
जीवन का सुख़ बुजुर्गों के श्रीचरणों में
बूढ़े बुजुर्गों, माता-पिता की सेवा तुल्य कोई पुण्य नहीं-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र गोंदिया – भारत आदि-अनादि काल से ही संस्कारों की खान रहा है। यहां की मिट्टी में ही गॉड गिफ्टेड संस्कारों की ऐसी अदृश्य शक्ति समाई हुई है कि मानव जन्म से ही संस्कारों की प्रतिभा मानवीय जीवों में समाहित हो जाती…
भाजपा का चमत्कार : सांसद को प्रदेश अध्यक्ष और विधायक को बनाया राष्ट्रीय अध्यक्ष
पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार, केराकत, जौनपुर यूपी जातिगत दबाव कहें, समीकरण कहें, पीडीए का डर कहें या रणनीति कहें पर यह भाजपा का थिंक टैंक और भाजपा की राजनीती जो ब्राह्मण – ठाकुरों की राजनीति से चलती रही है आज दो पिछड़े नेताओं की 2014 के बाद से सत्ता पर काबिज होने…
राष्ट्रभक्ति का प्रतीक ‘‘वंदे मातरम्’’
राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव चुनाव के पहले पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद और राम मंदिर की तनातनी देखने को मिलने लगी है । उत्तर प्रदेश की एक बाबरी मस्जिद की जंग शदियों तक चली अब दूसरी बाबरी मस्जिद की जंग प्रारंभ हो गई है । राजनीति अपनी जगह है पर देश का सांप्रदायिक सद्भाव…
Social Media Ban for Children: Australia’s Save Childhood Movement-An Example for the World
Social Media Ban for Children-A Save Childhood Movement,considered a protective shield for children in modern society amidst digital pollution, inappropriate content, violent videos, and harmful algorithms-Advocate Kishan Sanmukhdas Bhawnani,Gondia Maharashtra Gondia – While global politics is often dominated by military tensions, economic competition, strategic alliances,and geopolitical shifts, Australia has taken a bold step that has…
जब इलाज भी बाज़ार बन जाए: भारत में स्वास्थ्य अधिकार की लड़ाई
भारत में बढ़ती निजीकरण प्रवृत्ति और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय की कमी: क्या ‘स्वास्थ्य का अधिकार’ सच में न्यायालयों में लागू किया जा सकता है? जब उपचार एक सेवा नहीं, बल्कि बाज़ार की वस्तु बन जाए, तब अधिकारों की भाषा कमजोर पड़ जाती है। – डॉ सत्यवान सौरभ भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा और ढांचा…
