July 2020
जो लोग नियमों का पालन नहीं कर रहे, उन्हें समझाना होगा : मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (30 जून) को देश के नाम संबोधन में अनलॉक-1 के बाद से देश में लापरवाही पर चिंता जताई है। जबकि अभी हमें अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है. विशेषकर कन्टेनमेंट जोन पर हमें बहुत ध्यान देना होगा। जो भी लोग नियमों का पालन नहीं कर रहे, हमें उन्हें टोककर, रोककर…
भारत ने 59 चीनी एप पर प्रतिबंध लगाया
भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए टिकटॉक, वीचैट, यूसी ब्राउजर जैसे 59 चीनी एप पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। भारत सरकार ने यह फैसला पूर्वी लद्दाख में बीते दिनों चीन और भारत की सेना के बीच हुए हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवानों के शहीद होने के बाद उपजे तनाव के…
कोरोना के इलाज के लिए दिल्ली में बनेगा भारत का पहला प्लाज़्मा बैंक : केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, “दिल्ली में प्लाज्मा से कोरोना का सफल उपचार करने के उपरांत केंद्र सरकार से प्लाज्मा थेरेपी की इजाजत तो मिल गई, लेकिन समस्या यह थी कि प्लाज्मा मिलेगा कहां से। इसी समस्या का समाधान करते हुए दिल्ली सरकार ने प्लाज्मा बैंक बनाने का फैसला लिया है। यह देश…
एक गीत चलो गाए
एक गीत चलो गाए जिस संग ज़िंदगी गाए मुसर्रत हो जिसमें इतनी कि मन झुम जाए सिमट दे जो हर ग़मों को इक नगण्य बिंदु में दर्द हो चाहे जितना भी हर कोई भूल जाए एक गीत चलो गाए जिस संग ज़िंदगी गाए। मुरझाईं रुखसारों की हर कलियाँ खिल उठे मौन होंठों पे फिर से…
पत्तों की ताली
अमरैया की छांव तले नन्हे नन्हे ,पांव चले । हरी-भरी, डाली में झूमे बचपन जिसकी ,गोद पले । मीठे फल और ठंडी छांव बरगद वाला, मेरा गांव । लट देखो ,धरती को चूमे मस्ती में वो सर- सर झूमे । ज्यो मतवाली नाव चले अमरैया की छांव तले। नन्हे नन्हे पांव चले। फल हैं जैसे,…
सँभल जाए अगर माली, महके हर रूह की डाली : कविता मल्होत्रा
एक प्राकृतिक आपदा की तरह कोरोना वायरस समूचे विश्व पर मँडराया और वैश्विक बँधुत्व की सीख देकर आगे निकल गया।लेकिन अब भी सीमा पार से परस्पर वैमनस्य के कारण शहादत की खबरें आती हैं तो एैसा लगता है कि अभी मानव को बहुत कुछ सीखना है। कई लोगों को बेरोज़गारी का रोना रोते देखा और…
‘प्रवासी मजदूर और बरसात का कहर’-
आज सारे संसार के सामने कोरोना महामारी का प्रकोप पांव पसार खडा़ है, मानव को झंकजोर कर रख दिया है.एक दूसरे की संवेदना शून्य सी जान पडती है. विश्व की सभ्यता, संस्कृति और सामाजिक ढांचे में अचानक बदलाव आया है, इन सब का शिकार मजदूर वर्ग हुआ है. भारत में प्रवासी मजदूरों के साथ एक…
