दुनियादारी
जो खुद से ही अंजान है उसे क्या दुनियादारी समझाई जाए, एहसान जितनों के हैं हम पर चलो उनसे ही यारी निभाई जाए। होगा कभी यूं भी कि वह खुद से दोस्ती कर लेगें बड़े कठिन हैं रास्ते इस मंजिल के चलो खुद को भी समझाया जाए। टूटते, जुड़ते, बिखरते हैं जो शख्स चिंगारियों को…
