राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव
श्क्ति की आराधना का पर्व नवरात्रि का त्यौहार पूरे देश में मनाया जा रहा है । हर एक सनातनी हिन्दु मॉ के नौ रूपों की पूजा कर अपने लिए सुख यमृद्धि का कामना करता है । ऐसा माना जाता है कि मॉ सभी की रक्षा करती हैं, दुष्टां को दंड देती हें और भक्तों को आशीर्वाद । हमारी संस्कृति की यही तो विशेषता है हम परमपिता परमेश्वर की आराधना कर अपने कष्टों को हर लेने के मनोबल से पूर्ण हो जाते हैं । इस साल तो यह और भी आवश्यक है, क्योंकि प्रकृति ने जिस तरह से अपना रौद्र रूप् दिखाया है उस से हर कोई सहमा हुआ है । बरसात के मौसम के आने के साथ ही बरसात का रौद्र रूप् देखने को मिला । पंजाब, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्यप्रदेश जैसे राज्य आज भी बाढ़ से घिरे हैं । जाने कितनी बार बादल फटे और उसने जाने कितनों लोगों की बली ले ली, धनहानि हुई वह अलग । पहाड़ टूटने से भी कितना नुकसान हुआ । जम्मू-कश्मीर में भी भूस्खलन हुआ और देखते ही देखते धनहानि और जनहानि ने त्राही-त्राही मचा दी । नवरात्रि के पहले ही दिन कलकत्ता में केवल पांच घंटे में दस इंच बारिश हुई और कलकत्ता की सड़के तालाब बन गई, वहां के दुर्गा पंडालों में पानी भरा गया । क्या यह प्रकृति का क्रोध है ? अब तो चिन्तन की आवश्यकता है ही । प्रकृति का दोहन किया, पहाड़ों को काटकर मार्ग बनाया और तेजी से बढ़ती जनसंख्या ने पहाड़ों के नीचे, नदी के किनारे अपने मकान बनाए । विकास के लिए विनाश की आधारशिला हमने ही रखी और अब मानो प्रकृति इसका ही बदला लेने में लगी है । पंजाब की त्रासदी की कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, दिल्ली में कई दिनों तक पानी भरा रहा । बरसात अब भी जारी है और हर दिन डरावना रूप् ले रही है । हे मॉ जगदम्बा हमारी रक्षा करो । लद्दाख में सैंकड़ों आन्दोलनकारियों ने भाजपा कार्यालय जलाकर अपना रोष प्रकट किया उसे सही कैसे ठहराया जा सकता है । क्या भारत की बढ़ती गति को रोकने का विदेशी षडयंत्र है । चिन्तन तो करना पड़ेगा । जो लोग भी इस षडयंत्र में लगे हें वे जान ले कि भारत में नेपाल या बंगलादेश या श्रीलंका जैसे घटनाक्रम नहीं दोहराया जा सकता । लद्दाख की घटना ने और सतर्क कर दिया है । भारत में तो अपनी मांगों को मनवाने के लिए शांतिपूर्ण आन्दोलन होते रहे हें । हम वो देश हें जिसने अहिंसा के बल पर ही भारत को स्वतंत्र करा लिया वो भी क्रूर और सक्षम अंग्रेजी हुकुमत से । मॉ जगदम्बा इन नापाक इरादा वालों को सद्बुद्धि देना । एक और नापाक हरकत चल रही है एक सम्प्रदाय विशेष के द्वारा ‘आई लव मोहमम्द’ वाली । यूं तो आइ लव मोहमम्मद कहने में किसी को क्या आपत्ती हो सकती है । बहुआयामी इस देश में धार्मिक स्वतंत्रता हमारे मौलिक अधिकारों में शामिल की गई है मतलब साफ है आप अपने धर्म को माने, उससे प्यार करें किसी को कोई आपत्ती नहीं है, पर इसके पीछे दुर्भावना नहीं होनी चाहिए । भारत की अखंडता इस कारण से ही मजबूत है कि भारत में रहने वाला हर एक नागरिक वह किसी भी संप्रदाय का हो उसके लिए राष्ट्र प्रथम होता है । आपसी विवाद तो होते रहते हैं पर जब बात देश की एकता और अंखडता की होती है तो सभी को एक होना होता है । अभी ऑपरेशन सिन्दूर के समय हुआ भी । भारत में रहने वाले एक-एक हिन्दुस्तानी ने केवल देश प्रेम की बातें कीं, विदेश में जाकर भी भारत की अंखडता को जोरदार समर्थन दिया, फिर अचानक नया पैंतरा कैसे समाने आ गया ? चिन्तन का बिन्दु यही है । आइ्र लव मोहम्मद के जबाव में आर्ल लव महादेव के पोस्टर भी दिखाई देने लगे । क्रिया की प्रतिक्रिया सामने आने लगी जो स्वाभाविक भी है पर इससे माहौल खराब न हो इस बात का धन तो सभी को रखना ही होगा । समर्थन या विरोध दोनों भारत की एकता के लिए परेशान करने वाले कदम हैं । मॉ जगदम्बा ऐसी सोच से भी हमारी रक्षा करे । बिहार में विधानसभा के चुनाव बस होने ही वाले हैं । चुनाव आयोग कभी भी तारीखों की घोषणा कर सकता है । यूं तो राजनीतिक दल पिठले कई महिनों से तैयारी कर ही रहे हैं ऐसा माना जाए की बिहार में चुनावी माहौल तो कभी का बन चुका हे केवल किस दिन मतदान होना है इसकी तारीखों की घोषणा होना शेष है । पर इस बार बिहार की राजनीति मे जिस तरह उबाल आया है वह भी चिन्तनीय है । राजनीतिक दले विचारधारा के आधार पर गठित होते हैं औार यह विचारधारा को ही आम जनता के माने रखा जाता है ताकि मतदाता विचारधारा के अधार पर किसे मत देना है का मन बना सके । पर जब बात विचारधारा से हटकर आपसी मनमुटाव पर और शत्रुता के भावों से घि जाती है तो लोकतंत्र के लिए भी हानिकारक ही साबित होती है । वोटर लिस्ट बनाए जाने की घोषणा से शुरू हुआ विवाद अब आपसी रंजिश की देहरी तक पहुंचता जा रहा है । आरोप तो लगाए ही जायेगें पर आरोप किस तरह लगाए जा रहे हैं, उसमें विचारधारा या वैमनस्यता कितनी है इस पर चिन्तन होना जरूरी है । बिहार महागंठबंधन और एनडीए गठबंधन में शामिल राजनीतिक दलों के बीच ही होना है । महागठबंधन को सत्ता चाहिए और एनडीए का सत्ता बचाए रखना है । वोटरलिस्ट के काम से ही आरोपों का दौर प्रारंभ हो गया था जो अब भी जारी है । कुछ राजनीतिक दलों को लगता है कि वोटर लिस्ट सुधारने के बहाने वोटरों के नाम अलग किए जा रहे हें और वो वोटर जो महागठबंधन को वोट दे सकते हैं इस आरोप ने हवा पकड़ी तो राहुल गांधी ने वोट चोरी के आरोप लगाए तार्किक ढंग से कि कैसे विभिन्न् विधानसभा चुनावों में वोटर लिस्ट के माध्यम से हेराफेरी की गई । वैसे तो वोटर लिस्ट और चुनाव कराए जाने की सारी जिम्मेदारी चुनाव आयोग की ही होती है और चुनावा आयोग एक स्वतंत्र आयोग है, पर कोई भी आयोग हो वह सत्ता से जुड़ा मान ही लिया जाता है इस कारण से भी चुनाव आयोग को केन्द्र की भाजपा सरकार के इशारों में काम करने वाला बताया गया । प्रश्न तो कई सामने आए और चिन्तन के बिन्दु भी दिए गए पर भले ही चुनाव आयोग ने इन सारे प्रश्नों को नकार दिया हो पर ऐसा माना जा सकता है कि वास्तव में प्रश्न अनुत्तरित ही हैं । चुनाव आयोग के काम करने का तरीका आम लोगों को ज्यादा समझ में नहीं आता इस कारण से भी वो इसमें कम दिलचस्पी लेता है पर जब बात समझने की आती है तो प्रश्न खड़े कर देता है । अभी तक आम व्यक्ति वोटर लिस्ट मे अपना नाम न होने पर खामोशी धारण कर लेता था या बीएलओ को शिकायत कर देता था पर अब उसके सामने अपना नाम वोटर लिस्ट में न होने के कुछ कारण दिखाई देने लगे हैं । जागरूकता तो हर एक मतदाता के सामने होनी ही चाहिए पर जागरूकता सही दिशा की ओर हो तो ज्यादा बेहतर है । पर इसकी दिशा कौन तय करेगा । राहुल गांधी ने ढेर सारे प्रश्न सामने रखे इन्हें आरोप भी कहा जा सकता है और यह समझाने का प्रयत्न किया कि किस तरह वोटर लिस्ट में हेराफेरी कर चुनाव के परिणामों को प्रभावित किया जा सकता है । बहुत सारे दस्तावेज सामने रखे कुछ लोगों को भी सामने लाया गया और यह बताने का प्रयास किया गया कि वोटरलिस्ट में किस तरह से धांधली की जा सकती है । राहुल गांधी के आरोप कितने सही हैं और कितने गलत यह अलग बात है पर चुनाव आयोग को जिस तरह से इन आरोपों का जबाव देना चाहिए था वह नहीं दे पाया । केवल यह कह देना कि आरोप बेबुनियाद है पूरा उत्तर नहीं हो सकता । बहरहाल चुनाव आयोग में पूरे देश की वोटर लिस्ट को बिहार की तर्ज पर सुधारवाने का निर्देश दे दिया है। वैसे तो वोटरलिस्ट में सुधार तो होना ही चाहिए यह एक अच्छा निर्णय माना जा सकता है । राहुल गांधी और चुनाव आयोग की अंत्याक्षरी तो अभी लम्बी चलेगी पर बिहार चुनाव मे यह कितना असर करती है यह देखना होगा । कांग्रेस बिहार चुनाव में इस बार पूरा जोर लगा रही है । कभी बिहार में कांग्रेस की हुकंमत चलती थी पर विगत कुछ दशकों से उसे वहां कुछ विधानसभा सीटों को जीतने में भी कठिनाई हो रही है । इस बार राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के बाद जिस तरह से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश आया है उससे कांग्रेस हाइकमान को लगने लगा है कि शायद वह अपनी पुरानी जमीन पा सकती है इसके चलते ही वहां कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग भी आयोजित की गई और प्रिंयका गांधी को भही जिम्मेदारी दी गई । पर कांग्रेस के इस रूख से आरजेडी की परेशानी बढ़ती दिखाई दे रही है । आरजेडी वहां मुख्य विपक्षी पार्टी की भूमिका में है पर अब कांग्रेस उसके बारबरी मं आकर खड़ी होती है तो उसे नुकसान होगा । इसके कारण ही इस बात की संभावना भी व्यक्त की जाने लगी है कि जब महागठबंधन में सीटों का बंटवारा होगा तो कुछ गड़बड़ होती दिखाई देगी । एनडीए भी इससे अछूता नहीं है । हर एक राजनीतिक दल चाहता है कि वो अधिक सीटों पर चुनाव लड़े ताकि उसका दबाब बढ़े पर इसमें रिस्क यह होती है कि अनावश्यक सीटों पर चुनाव लड़ने से हार की संभवना ज्यादा बढ़ जाती है और इसका खमियाजा सत्ता पा लेने में उठाना पड़ता है । बहरहाल बिहार चुनाव के चलते अब दो महिने घमसान होता रहेगा और आरोप-प्रत्यारोपों का दौर दिखाई देता रहेगा । मॉ जगम्बा सभी को सद्बुद्धि दें यह ही प्रार्थना इस नवरात्रि में की जा सकती है ।
